जाकिर नाइक को 31 जुलाई तक कोर्ट में पेश होने का आदेश | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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जाकिर नाइक को 31 जुलाई तक कोर्ट में पेश होने का आदेश

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मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने जाकिर नाइक को 31 जुलाई को शारीरिक रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अगर वह हाजिर नहीं होते हैं, तो अदालत उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर देगी। ईडी ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट की अर्जी दी।

दरअसल नाइक भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और घृणास्पद भाषण देने के आरोप में वॉन्टेड है। नाइक लगभग दो सालों से भरतीय कानून से बचने के लिए मलेशिया में रह रहा है।

बांग्लादेश में 2016 में हुए एक आतंकी हमले के बाद उसके खिलाफ यहां दाखिल किए गए मामलों के बाद से वह फरार है। बीते हफ्ते भारत ने कट्टरपंथी उपदेशक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के लिए मलेशिया से एक औपचारिक अनुरोध किया है। ईडी ने नाइक पर 193 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है।

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जामिया हिंसा: दिल्ली HC ने पूछा- क्या पुलिस के खिलाफ दर्ज हुई FIR

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जामिया हिंसा से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अमन लेखी ने दिल्ली पुलिस की तरफ से बहस पूरी कर चुकी है। दिल्ली दंगों और जामिया हिंसा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट 1 अक्टूबर को करेगा।

जामिया हिंसा मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने बहस की। अमन लेखी ने कहा कि चूंकि ये मामला रूटीन का है, इसलिए इस केस का ट्रांसफर नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, एक-एक मामले पर इन्क्वायरी चल रही है, जहां भी बात हुई है कि पुलिस ने ज्यादा फोर्स लगाई है उस पर जांच हो रही है, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी उस दिन पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है।

दिल्ली हाईकोर्ट जामिया में हुई हिंसा के मामले में याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिसमें स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। इन याचिकाओं में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अमन लेखी से कहा कि आपको हमें संतुष्ट करना पड़ेगा कि पुलिस के जवानों के खिलाफ क्या-क्या इन्क्वायरी चल रही है, क्या कोई एफआईआर भी दर्ज हुई है?  

अमन लेखी ने सीआरपीसी का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने जो कुछ किया, भीड़ को हटाने के लिए किया और कानून के दायरे में किया। पुलिस ने कई चेतावनी भी दी।

वहां वार्निंग के बावजूद भीड़ हटी नहीं, बल्कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचने लगी और कानून को अपने हाथ में लेने का प्रयास किया गया। प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए एंटी रायट इक्विपमेंट को वहां लगाया गया था।

पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और डीटीसी बस को आग के हवाले कर दिया गया। लेखी ने कहा, लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए पुलिस जामिया यूनिवर्सिटी में दाखिल हुई।

सीआरपीसी की धारा 129 के तहत पुलिस की कार्रवाई बिल्कुल सही है। जबकि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई या एक्शन लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 132 के मुताबिक केंद्र सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। याचिकाकर्ता ने खुद केंद्र सरकार से पुलिस के खिलाफ मामला चलाने के लिए कोई इजाजत नहीं मांगी। तो किस बात की एफआईआर?  

अपनी बहस को आगे बढ़ाते हुए अमन लेखी ने कोर्ट से कहा कि मजिस्ट्रेट भी पुलिस अफसर के खिलाफ मामला नहीं चला सकता जब तक केंद्र सरकार की स्वीकृति न हो, खासकर इस तरह के मामलों में।

कोर्ट अब इस मामले की जांच किसी और को ट्रांसफर भी नहीं कर सकता क्योंकि चार्जशीट दायर हो चुकी है। जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई है उनमें से किसी एक ने भी अभी तक इस कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है। एनएचआरसी ने भी मुआवजे की बात कही नहीं कही है बल्कि पुलिस की कार्रवाई को सही बताया है।

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लाठी हत्या का हथियार नहीं, यह ग्रामीणों की पहचान, SC ने एक मामले में सुनाया अहम फैसला

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लाठी ग्रामीणों की पहचान से जुड़ी है, इसे हत्या का हथियार नहीं कह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिपण्णी की और हत्या की एक धारा को गैर इरादतन हत्या की धारा में बदल दिया। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी के जेल में रहने की अवधि को सजा मानते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश भी दिया।

छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरएफ नरीमन की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा कि गांव के लोग लाठी लेकर चलते हैं, जो उनकी पहचान है। यह तथ्य है कि लाठी को हमले के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे सामान्य तौर पर हमला करने या हमले का हथियार नहीं माना जा सकता।

जस्टिस आरएफ नरीमन, इंदिरा बनर्जी और नवीन सिन्हा की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले में आरोपी ने लाठी से सिर पर हमला किया। इसके बाद पीड़ित की दो दिन बाद मौत हो गई। ऐसे मामले में अदालत को हत्या के पीछे के कारण का पता लगाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत को मारपीट के तरीके, हत्या की प्रकृति, चोटों की संख्या समेत कई अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला देना चाहिए।

गौरतलब है कि आरोपी जुगत राम ने भूमि विवाद में एक व्यक्ति के सिर पर लाठी से हमला किया था, हमले की वजह से पीड़ित की दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद साल 2004 में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया और फिर सेशन कोर्ट ने जुगत राम को उम्रकैद की सजा सुना दी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि यह हत्या पहले से योजना बना कर नहीं की गई थी बल्कि गुस्से में हो गई थी, हालांकि अदालत ने धारा 302 के तहत सजा बरकरार रखी थी जिसके बाद इस फैसले को आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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चीन विवाद: राजनाथ की अगुवाई में हुई बड़ी बैठक, विदेश मंत्री-CDS शामिल

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भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव लगातार जारी है। इस बीच दिल्ली में इसी मसले पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई इस बैठक में कई अन्य बड़े अधिकारी शामिल रहे।

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सीडीएस बिपिन रावत और एनएसए अजित डोभाल भी शामिल थे। इस दौरान LAC के मौजूदा हालात और आने वाली तैयारियों पर मंथन किया गया।

बता दें कि ये बैठक तब हुई जब बीते दिन ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में चीन विवाद पर विस्तार से बयान दिया है। राजनाथ सिंह ने सदन को सूचित किया कि लद्दाख सीमा पर हालात गंभीर हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस विवाद को बातचीत और शांति से सुलझाना चाहता है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। ऐसे में अगर चीन पीछे नहीं हटता है, तो भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयार हैं।

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