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शाओमी मैक्स फैबलेट की लॉन्च तारीख का हुआ खुलासा

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शाओमी के आने वाले फैबलेट को लेकर पिछले कई दिनों से चर्चा है। कंपनी ने शाओमी मैक्स फैबलेट के 10 मई को लॉन्च होने की पुष्टि कर दी है। एक वीबो पोस्ट में शाओमी ने बताया कि एमआई मैक्स स्मार्टफोन का लॉन्च इवेंट बीजिंग नेशनल कनवेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

कंपनी ने एक दूसरी वीबो पोस्ट में एमआई मैक्स की टीजर फोटो जारी की थी। शाओमी द्वारा जारी की गई फोटो से इस स्मार्टफोन की पहली झलक देखने को मिली है। फोटो में फोन को एक जींस की जेब में दिखाया गया है। इसके अलावा फोन के अगले हिस्से में एमआई लोगो भी नहीं दिख रहा है। शाओमी के फोन में शुरुआत से ही एमआई लोगो अगले हिस्से में दिया जाता है।

हाल ही में एक कथित लीक फोटो में इस स्मार्टफोन के कंपनी के फ्लैगशिप स्मार्टफोन एमआई 5 की तरह होने का दावा किया गया था। फ्लैगशिप स्मार्टफोन की तरह ही मैक्स में एक होम बटन देखा जा सकता है जिसमें फिंगरप्रिंट स्कैनर इंटीग्रेट है। फ्रंट पैनल के अलावा, मैक्स फैबल्ट का रियर कैमरा सेटअप भी शाओमी एमआई 5 की तरह ही दिया गया है। हालांकि इन दोनों फोन में कुछ फर्क भी देखा जा सकता है। एमआई 5 में जहां 5.15 इंच का स्क्रीन है वहीं शाओमी मैक्स के 6.4 इंच बड़े डिस्प्ले के साथ आने की खबरे हैं।

शाओमी ने एक पोल में लोगों से अगले स्मार्टफोन के नाम को लेकर सुझाव मांगा था। चीनी टेक कंपनी ने चार विकल्प दिए थे जिसमें ‘शाओमी मैक्स’ को सबसे ज्यादा वोट मिले। हालांकि इस नए डिवाइस को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई थी लेकिन इसके नाम से जाहिर होता है कि यह एक पॉवरफुल और बड़े आकार वाला हैंडसेट हो सकता है।

इससे पहले कई लीक में इस डिवाइस के क्वाड एचडी स्क्रीन और स्नैपड्रैगन 820 प्रोसेसर के साथ आने की खबरें थीं। लेकिन अब बेंचमार्किंग वेबसाइट जीएफएक्स पर हुई लिस्टिंग से खुलासा हुआ है कि यह एक मिड-रेंज स्मार्टफोन होगा जिसमें 1080 पिक्सल का स्क्रीन और स्नैपड्रैगन 650 प्रोसेसर, 2 जीबी रैम, 16 मेगापिक्सल रियर और पांच मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा होगा। कंपनी ने शाओमी रेडमी नोट 3 में भी यही प्रोसेसर दिया था।

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गूगल ने हटाए चीन से संबंधित 3,000 फर्जी यूट्यूब चैनल

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अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने में अब बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं, इस बीच गूगल ने जुलाई से सितंबर तक की अवधि में 3,000 से अधिक ऐसे फर्जी यूट्यूब चैनल हटाए हैं, जो चीन से संबंधित एक बड़े स्पैम नेटवर्क का हिस्सा रहे थे।

इनके द्वारा अपने चैनल पर चुनाव को प्रभावित किए जाने संबंधी अभियानों को संचालित किया जा रहा था। कंपनी द्वारा इनका सफाया किए जाने के परिणामस्वरूप अब ये अपने चैनल पर दर्शक जुटा पाने में असमर्थ हैं।

शुक्रवार देर रात गूगल ने अपने एक बयान में कहा, हमने जितने भी वीडियोज के पहचान किए हैं, उनमें से अधिकतर में लोगों के देखे जाने की संख्या दस से भी कम हैं और इस पर भी असली के यूजर्स के मुकाबले इन्हें स्पैम अकांउट्स से ही देखे गए हैं, जो वर्तमान में सक्रिय नहीं है।

गूगल थ्रेट एनालिसिस ग्रुप टीएजी से शेन हंटले ने कहा, हालांकि इन नेटवर्क्‍स के द्वारा पोस्ट तो नियमित तौर पर किया जाता रहा है, लेकिन इनमें स्पैम कंटेंट की अधिकता रही है। हमने यूट्यूब पर प्रभावी ढंग से दर्शकों तक इनकी पहुंच नहीं देखी है।

आईएएनएस

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सैमसंग ने भारत में लॉन्च किया गैलेक्सी फिट2 फिटनेस ट्रैकर

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सैमसंग ने आज अपना नया फिटनेस ट्रैकर लॉन्च किया, जिसे उसने गैलेक्सी फिट2 नाम दिया है। गैलेक्सी फिट2 स्लिम, लाइटवेट, लम्बी अवधि वाले बैटरी वाला और ट्रैकिंग फीचर्स से लैस है।

इसकी कीमत 3999 रुपये है और यह दो रंगों-काले और स्कारलेट में उपलब्ध है। इसकी बिक्री 16 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। गैलेक्सी फिट2 में एक इंडेंटेड स्ट्रिप है जो पसीने को जमा नहीं होने देता।

इसका वजन 21 ग्राम है और 159एमएएच की बैटरी से लैस है। इस बैटरी के साथ यह एक बार चार्ज में 15 दिनों तक काम कर सकता है।

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गू्गल ने अब तक के सबसे बड़े डीडॉस साइबर हमले को रोका

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गूगल ने कहा है कि साइबर सुरक्षा खतरे जैसे डिस्ट्रीब्यूटेड डिनाइल-ऑफ-सर्विस (डीडीओएस) वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह हर आकार के व्यवसाय और उपयोगकर्ता के भरोसे को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

टेक दिग्गज ने खुलासा किया है कि उसके बुनियादी ढांचे ने सितंबर 2017 में ऊंची बैंडविथ वाले 2.5 टीबीपीएस डीडॉस के हमले को नाकाम किया था।

गूगल ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, हमारे हजारों आईपी को एक साथ निशाना बनाने के बावजूद हमले का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हमलावर ने चकमा देने के लिए कई नेटवर्क का उपयोग करके 167 एमबीपीएस (प्रति सेकंड लाखों पैकेट) से 1,80,000 सीएलएडीएपी, डीएनएस और एसएमटीपी सर्वरों को उजागर किया था।

कंपनी ने आगे कहा, यह हमलावरों के अच्छी तरह से साधन संपन्न होने की बात को दशार्ता है क्योंकि यह हमला, एक साल पहले मिराई बॉटनेट पर हुए 623 जीबीपीएस की तुलना में 4 गुना बड़ा था। यह अब तक का सबसे उंची -बैंडविड्थ का हमला था।

डीडॉस हमला बेवजह का ट्रैफिक बढ़ाकर पीड़ित की सेवा को बाधित करती है। हालांकि यह हमला उपयोगकर्ता के डेटा को उजागर नहीं करता है और समझौता करने के लिए भी नहीं कहता है। लेकिन यदि सिस्टम में आई रुकावट को जल्दी नहीं हटाया जाता तो यह उपयोगकर्ताके विश्वास को खोने का कारण बनता है।

गूगल ने यह भी कहा कि हमलावर सिस्टम को बाधित करने के लिए लगातार नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं।

गूगल ने कहा, हम भविष्य में होने वाले हमलों के अपेक्षित आकार का अनुमान लगा सकते हैं। लिहाजा हमें अप्रत्याशित चीजों के लिए तैयार रहना जरूरी है।

कंपनी ने हाल ही में क्लाउड आर्मर मैनेज्ड प्रोटेक्शन की घोषणा की है जो उपयोगकर्ताओं को अपनी तैनाती को सरल बनाने, लागतों का प्रबंधन करने और एप्लिकेशन की सुरक्षा के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाता है।

गूगल ने कहा कि यह इंटरनेट समुदाय के दूसरे लोगों के साथ काम कर रहा है ताकि वह उस इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करके खत्म कर सके, जिनके जरिए ये हमले किए गए।

–आईएएनएस

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