कोलंबो: श्रीलंका के दिग्गज राजनेता रानिल विक्रमसिंघे ने कई विश्व रिकॉर्ड स्थापित करते हुए हिंद महासागर द्वीप राष्ट्र के 26वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। श्रीलंका अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

रिकॉर्ड तोड़ छठे अवसर के लिए पद संभालते हुए विक्रमसिंघे ने पीएम के रूप में शपथ ली। उनके प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेता और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने उन्हें शपथ दिलाई। इस तरह विक्रमसिंघे संसद में सिर्फ एक सीट के साथ सरकार चलाने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।

राष्ट्रपति राजपक्षे ने चल रहे संकट के बीच विपक्षी दलों को आमंत्रित किया कि वे सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए टीम में शामिल हों।

साजिथ प्रेमदासा के नेतृत्व में मुख्य विपक्षी यूनाइटेड पीपुल्स पावर और अनुरा कुमारा डिसनायके के नेतृत्व वाली मार्क्‍सवादी पार्टी नेशनल पीपुल्स पावर ने राष्ट्रपति राजपक्षे के इस्तीफा देने तक सरकार बनाने से इनकार कर दिया।

देशभर में हिंसा भड़कने के बाद राष्ट्रपति के बड़े भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने विवादास्पद रूप से इस्तीफा दे दिया, जब उनके समर्थकों के एक समूह ने गंभीर वित्तीय संकट के बीच सरकार को हटाने की मांग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमले किए।

नवनियुक्त पीएम विक्रमसिंघे ने कहा, (ब्रिटिश पीएम विंस्टन) चर्चिल के पास 1939 में उनका समर्थन करने वाले केवल चार सदस्य थे। संकट के कारण वह जिस तरह प्रधानमंत्री बने, मैंने भी वही किया है। उन्होंने यह बात तब कही, जब पत्रकारों ने संसद में बहुमत के बिना पीएम बनने के उनके नैतिक अधिकार पर सवाल उठाया।

विक्रमसिंघे ने धार्मिक समारोहों में भाग लेने के बाद कोलंबो में एक बौद्ध मंदिर से निकलते समय आश्वासन दिया, मैं सभी दलों की भागीदारी से सरकार बनाऊंगा।

उन्होंने पत्रकार से कहा, क्या आप क्षुद्र राजनीति में लिप्त रहते हुए ईंधन और गैस के बिना पीड़ित होना चाहते हैं या मौजूदा संकट का समाधान खोजना चाहते हैं? उन्होंने भरोसा दिया कि वह मौजूदा संकट से उबरने के लिए काम करेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे सबसे पहले विक्रमेसिघे को बधाई देने वालों में से एक थे।

राजपक्षे ने एक ट्विटर संदेश में कहा, नवनियुक्त प्रधानमंत्री को बधाई। मैं आपको शुभकामनाएं देता हूं कि आप देश को इन मुश्किल हालात से उबारने में कामयाब हों।

नवनियुक्त प्रधान मंत्री को बधाई देते हुए कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने कहा कि वह राजनीतिक स्थिरता की आशा करता है और आरडब्ल्यू-यूएनपी के शपथ ग्रहण के अनुसार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के मुताबिक गठित श्रीलंका सरकार के साथ काम करने के लिए तत्पर है। श्रीलंका के प्रधानमंत्री और श्रीलंका के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जारी रहेगी।

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