राष्ट्रीयजहां सवाल करने की इजाजत नहीं, वो जगह खतरनाक है: जावेद अख्तर

Abhishek KumarAugust 21, 2017571 min

महाराष्ट्र स्थित पुणे में ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ ने ‘जवाब दो’ नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के जाने माने शायर और मशहुर गितकार जावेद अख्तर ने कहा कि, ‘जिस जगह सवाल करने की इजाजत नहीं हो, वो खतरनाक जगह हैं।’

अख्तर ने कहा कि, मैं हैरान नहीं हूं कि कोपर्निकस और गैलीलियो को सताया गया था क्योंकि वे सच की जांच करते थे, जो सैकड़ों साल पहले विज्ञान के अभ्यास से सीखते थे। जावेद ने कहा कि यह समझा जा सकता है क्योंकि उस समय लोग अज्ञानी होते थे और बेहतर तरीके से जानने का कोई तरीका नहीं था। हालांकि, आज लोगों को पता है और जो कुछ भी विज्ञान ने लाया है ,उन्हें देखते हैं। वे उपग्रह लॉन्च करते हैं और इसे अपने प्रोग्रामिंग के आधार पर एक सटीक स्थान पर भेजते हैं। हालांकि, वे अब भी संगठित धर्म के नेताओं की ओर से अंधाधुंध फैलाए जा रहे अंधविश्वासों का पालन करते हैं। अगर यह सिजोफ्रेनिया नहीं हैं तो क्या है?

अख्तर ने डॉ. दाभोलकर की प्रशंसा की और कहा कि वे महाराष्ट्र के लोगों को अंधविश्वासों के जाल से दूर कर, बुद्धिवाद के एक प्रगतिशील विचार को पेश करने की कोशिश कर रहे थे। दुर्भाग्य से, हमारा समाज, जो रूढ़िवादी होने में प्रसन्न है, जो इसे अपनी समस्याओं से मुक्त करने के लिए ईश्वर पर निर्भर करता है, उसने कभी ये समझने की नहीं कोशिश की कि वो क्या कह रहे थे’। जावेद अख्तर पहले भी समाज के हालातों पर बोलते रहे है।

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