विटामिन डी से हो सकता है ये गंभीर बीमारी का इलाज | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

स्वास्थ्य

विटामिन डी से हो सकता है ये गंभीर बीमारी का इलाज

Published

on

विटामिन डी की उच्च खुराक का सेवन बहुभागी (मल्टीपल) स्केलोरोसिस के इलाज के लिए कारगार साबित हो सकता है. एक नए शोध से यह बात सामने आई है. मल्टीपल स्केलोरोसिस एक स्व प्रतिरक्षित (ऑटो इम्यून) बीमारी है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है. इस रोग के इलाज में विटामिन डी अहम योगदान दे सकता है.

हॉपकिन्स युनिवर्सिटी के अध्ययनकर्ता पीटर कैलाब्रेसी के अनुसार, “यह निष्कर्ष रोमांचक है कि विटामिन डी स्क्लेरॉसिस के इलाज के लिए सुरक्षित, सस्ता और सुविधाजनक है.”

श्रीर में विटामिन डी के कम स्तर से मल्टीपल स्क्लेरॉसिस की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से अपंगता और कई रोगों के होने का खतरा होता है.

इस अध्ययन में 40 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था, जो मल्टीपल स्क्लेरॉसिस से पीड़ित थे. इन्हें 10,400 इंटरनेशनल यूनिट्स (आईयू) और 800 इंटरनेशनल यूनिट्स विटामिन डी की खुराक छह महीनों तक प्रतिदिन दी गई.

बीमारी

बीमारी

इस अध्ययन में विटामिन डी की कमी वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया था.

रक्त में विटामिन डी और ‘टी’ कोशिकाओं की मात्रा को मापने के लिए अध्ययन की शुरुआत में रक्त की जांच की गई. इसकी दोबारा यह जांच अध्ययन के तीसरे महीने और फिर छठे महीने में की गई.

मल्टीपल स्क्लेरॉसिस से ग्रस्त लोगों के रक्त में विटामिन डी का सर्वश्रेष्ठ स्तर जानने के लिए 40 से 60 नैनोग्राम प्रति मिली को एक लक्ष्य के रूप में प्रस्तावित किया गया.

निष्कर्ष में देखा गया कि मल्टीपल स्क्लेरॉसिस से ग्रस्त जिन प्रतिभागियों को विटामिन डी की उच्च मात्रा दी गई उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा करने में कामयाबी हासिल की. वहीं विटामिन डी की कम खुराक लेने वाले प्रतिभागी अपने लक्ष्य को पूरा करने में असफल रहे.

इसके अलावा विटामिन डी की उच्च खुराक लेने वाले प्रतिभागियों में मल्टीपल स्क्लेरॉसिस से संबंधित ‘टी’ कोशिकाओं के प्रतिशत में कटौती देखी गई.

अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी की उच्च और निम्न खुराक लेने वाले दोनों ही प्रतिभागियों में विटामिन डी के दुष्प्रभाव निम्न रहे.

यह अध्ययन पत्रिका ‘जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है.

स्वास्थ्य

भारत बायोटेक का इंट्रानेजल कोविड वैक्सीन के लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से करार

Published

on

अग्रणी वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने कोविड-19 के ‘नोवल चिम्प एडेनोवायरस, सिंगल डोज इंट्रानेजल’ वैक्सीन के लिए बुधवार को सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ लाइसेंसिंग समझौता होने की घोषणा की।

हैदराबाद स्थित कंपनी के पास अमेरिका, जापान और यूरोप को छोड़कर सभी बाजारों में वैक्सीन वितरित करने का अधिकार है।

जहां एक ओर परीक्षण के पहले चरण का ट्रायल सेंट लुइस यूनिवर्सिटी की वैक्सीन एंड ट्रीटमेंट इवैल्यूएशन यूनिट में होगा, वहीं भारत बायोटेक आवश्यक विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद, भारत में क्लिनिकल परीक्षणों के आगे के चरणों को आगे बढ़ाएगा और हैदराबाद के जीनोम वैली में स्थित जीएमपी सुविधा में वैक्सीन के बड़े पैमाने पर निर्माण का कार्य करेगा।

भारत बायोटेक के अनुसार, इस इंट्रानेजल वैक्सीन ने चूहों पर अध्ययन में सुरक्षा के अभूतपूर्व स्तर को दिखाया है। प्रौद्योगिकी और डेटा को हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका सेल में और नेचर के एक संपादकीय में प्रकाशित किया गया है।

भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने कहा, हमें इस इनोवेटिव वैक्सीन पर सहयोग करने पर गर्व है। हमें उम्मीद है कि हम इस वैक्सीन को 1 अरब डोज तक पहुंचा देंगे। एक इंट्रानेजल वैक्सीन न केवल एडमिनिस्टर करने में सरल है, बल्कि सुई, सीरिंज आदि जैसे चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों के उपयोग को कम करने के लिए भी सरल होगा।

उन्होंने कहा कि एक प्रभावी नेजल डोज न केवल कोविड-19 से बचाएगा, बल्कि यह एक अन्य प्रकार की प्रतिरक्षा बनाकर रोग के प्रसार को भी रोकेगा।

आईएएनएस

Continue Reading

राष्ट्रीय

संसद ने महामारी संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

यह विधेयक संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया । इस संबंध में अध्यादेश अप्रैल में जारी किया गया था ।

Published

on

Lok Sabha

नयी दिल्ली, 21 सितंबर : संसद ने सोमवार को महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्ष वर्द्धन ने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों से हमारी सरकार लगातार महामारी जैसे विषयों से निपटने के बारे में समग्र एवं समावेशी पहल अपना रही है. ’’

डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा, ‘‘ इस दिशा में सरकार ‘राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम’ बनाने पर काम कर रही है ।’’ उन्होंने कहा कि इस बारे में विधि विभाग ने राज्यों के विचार जानने का सुझाव दिया था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘पहले दो वर्षो हमें सिर्फ चार राज्यों मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, गोवा और हिमाचल प्रदेश से सुझाव मिले। अभी हमारे पास 14 राज्यों से सुझाव आ चुके हैं।’’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम बनाने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने वायरस पर शोध के संबंध में जीनोम श्रृंखला तैयार करने सहित कई अन्य कार्यो का उल्लेख किया ।

उन्होंने कहा कि पिछले नौ महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कोविड के खिलाफ अभियान चलाया । प्रधानमंत्री ने स्वयं कई बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया ।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकार करते हुए सोमवार को इसे मंजूरी दी । उच्च सदन ने कुछ दिन पहले महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी थी ।

यह विधेयक संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया । इस संबंध में अध्यादेश अप्रैल में जारी किया गया था ।

उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के माध्यम से महामारी रोग अधिनियम 1897 में संशोधन किया गया है। इसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है । साथ ही, विधेयक में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करने का भी प्रावधान है।

इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुंचाने कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न करने और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुंचाने पर जुर्माने और दंड का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अधिकतम पांच लाख रूपये तक जुर्माना और अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।

निचले सदन में विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि यह सरकार डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कर्मियों की तरफ ध्यान नहीं दे रही, जबकि उन्हें ‘‘कोरोना योद्धा’’ कहती है।

उन्होंने हालांकि कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और उनकी टीम द्वारा रात-दिन किये गये परिश्रम की सराहना की।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अर्द्धचिकित्साकर्मियों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुभाष भामरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया और उनका मनोबल बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी ने समाज के दो रूप दिखाए। एक में जहां समाज के सभी वर्गों ने जरूरतमंदों और गरीबों की मदद की, वहीं समाज ने दूसरा रूप भी देखा कि किसी सोसाइटी में या घर में रोगी पाये जाने पर पड़ोसियों ने उनका बहिष्कार किया।

पेशे से चिकित्सक रहे भामरे ने कहा कि डॉक्टर और अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित होने का खतरा होते हुए भी दिन रात काम करते रहे। प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया। उनका मनोबल बढ़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन पर हमलों से मन व्यथित होता है। डॉक्टरों को सम्मान मिलना चाहिए।’ द्रमुक की टी सुमति ने कहा कि यह संशोधन ऐसे समय में किया गया, जब तमिलनाडु में हजारों छात्रों ने सरकार से नीट को टालने की मांग की।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह रवैया नहीं चलेगा कि राज्य सरकार काम करे और केंद्र केवल आदेश दे।

उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बारे में स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन कार्रवाई करेगा, कौन सी एजेंसी कार्रवाई करेगी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कृष्ण देवरयालू ने कहा कि हमें डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए।

शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, बीजद के बी महताब, बसपा के गिरीश चंद्र, भाजपा की हिना गावित, कांग्रेस के सप्तगिरी उल्का, हनुमाल बेनीवाल आदि सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।

Continue Reading

स्वास्थ्य

जब तक कोरोना वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक कैसे हो बचाव?

भारत में 30 वैक्सीन के लिए समर्थन दिया गया है जो विकास के विभिन्न स्तरों पर हैं। इसमें से 3 वैक्सीन ट्रायल के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण में हैं। चार टीके प्री क्लिनिकल मूल्यांकन के उन्नत चरण में हैं।

Published

on

Coronavirus,

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि देश में कोरोना वैक्सीन के निर्माण का काम प्रगति पर है लेकिन जब तक यह नहीं आ जाती है, तब तक दो गज दूरी सहित सोशल डिस्टेंसिंग ही वैक्सीन है। लोकसभा में नियम-193 के तहत कोविड-19 वैश्विक महामारी पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि दुनिया में कोविड-19 रोधी 145 टीका ‘प्री क्लिनिकल’ के स्तर पर हैं और इसमें से 35 का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में 30 वैक्सीन के लिए समर्थन दिया गया है जो विकास के विभिन्न स्तरों पर हैं। इसमें से 3 वैक्सीन ट्रायल के प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण में हैं। चार टीके प्री क्लिनिकल मूल्यांकन के उन्नत चरण में हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘टीके के विकास का काम प्रगति पर है लेकिन जब तक यह नहीं आता है तब तक दो गज दूरी सहित सोशल डिस्टेंसिंग ही टीका है।’

हर्षवर्धन ने कहा कि वायरस के शोध की दिशा में 2000 से ज्यादा वायरसों की जीनोम श्रृंखला तैयार की गई है । इसके अलावा 40 हजार वायरसों के नमूनों का निक्षेपागार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में 110 प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को समर्थन दिया गया है।

हर्षवर्धन ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगाने के सरकार के साहसिक फैसले को लागू करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर लोगों द्वारा जनता कर्फ्यू का पालन करना इस बात का प्रमाण है कि भारत इस महामारी के खिलाफ मिलकर खड़ा रहा। उन्होंने कहा, ‘एक समय था जब पीपीई किट का स्वदेशी उत्पादन नहीं हो रहा था। आज इस दिशा में आत्मनिर्भर है।’

उन्होंने कहा कि आज प्रतिदिन 10 लाख से ज्याद किट रोज बनाने की क्षमता हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लॉकडाउन की अवधि का ठीक से उपयोग किया गया है और इस दौरान राज्यों को समर्थन भी दिया गया। उन्होंने कहा कि 17 हजार समर्पित कोविड केंद्र बनाएं गए, 1773 कोविड जांच केंद्र बन गए। हर्षवर्धन ने कहा कि देश में 6.37 करोड़ कोविड-19 जांच हो चुके हैं । आज भी 12 लाख टेस्ट हुए हैं ।

उन्होंने कहा कि सुनियोजित तरीके से इस स्थिति से निपटने का काम किया गया और इसके तहत आवश्यक वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। 64 लाख मजदूरों को श्रमिक एक्सप्रेस, बसों आदि से उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया । 12 लाख से अधिक लोगों को वंदे भारत अभियान के तहत विदेशों से लाया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके अलावा राज्यों की भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं अन्य योजनाओं के तहत मदद की गई।

Continue Reading

Most Popular