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आईएस से जुड़ा है Us के गे नाइट क्लब में 50 लोगों की जान लेने वाला शख्स

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Us के गे नाइट क्लब में गोलीबारी

रविवार रात गे नाइट क्लब में हुई गोलीबारी की घटना में 50 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

हमलावर एक्सप्लोसिव्स से भरी जैकेट पहन कर क्लब में घुसा था। एफबीआई ने इसे आतंकी घटना बता कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना में 50 लोगों के मारे जाने के साथ ही 53 से ज्यादा लोग और एक पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए है।

हमलावर का नाम उमर मतीन बताया गया है। उसके माता-पिता अफगानिस्तान के हैं और वह फ्लोरिडा के पोर्ट सेंट लुइस का रहने वाला था।

इस आतंकी हमले का संदिग्ध हमलावर उमर एस मतीन दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी जी4एस में काम करता था। कंपनी के प्रवक्ता डेविड स्टैरफिल्ड के मुताबिक़, मतीन 10 सितंबर 2007 से ही इस कंपनी में कार्यरत था और वह ड्यूटी के दौरान हमेशा से अपने पास बंदूक रखा करता था। वो यहां एक सुरक्षा अधिकारी के पद पर तैनात था।

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इससे पहले पुलिस ने रविवार को कहा था कि संदिग्ध हमलवार 29 वर्षीय मतीन जो कि हमले के बाद पुलिस कार्रवाई में मारा गया, वह फ्लोरिडा का निवासी था और उसके मा-बाप अफगानिस्तान से आकर यहां बसे थे।

अमेरिकी खूफिया एजेंसी एफबीआई ने कहा था कि उमर मतीन ने हमले से पहले इमरजेंसी नंबर 919 पर कॉल किया था और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई थी।

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घटना के चश्मदीद जॉर्डन ने लिखा, ‘मैं वहीं था जब रात 2 बजे क्लब में फायरिंग शुरू हुई। तब क्लब पूरा भरा हुआ था। शूटर असॉल्ट राइफल लिए हुए था। उसने अंदर कई लोगों को बंधक बना रखा था।’ जॉडन ने यह सूचना शोसल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर दी। पुलिस ने हमलावर से लोगों को बचाने के लिए धमाका कर उसका ध्यान बटा दिया। इस प्रकार पुलिस कुल 30 लोगों को सुरक्षित वहां से निकालने में सफल रही।

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न्यूजीलैंड में कोविड-19 के 2 नए मामले दर्ज

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coronavirus infection

न्यूजीलैंड में शनिवार को कोरोनावायरस के 2 नए मामले सामने आए हैं। इसमें एक मामला आइसोलेशन सेंटर से है और दूसरा मामला कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में सामने आया है।

न्यूजीलैंड हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि आइसोलेशन में रह रहे जिस व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई उसकी उम्र 30 साल के आसपास है और वह रूस से संयुक्त अरब अमीरात होता हुआ न्यूजीलैंड पहुंचा है।

दूसरा मामला एक यात्री का है जिसने क्राइस्टचर्च से ऑकलैंड तक एक चार्टर विमान से यात्रा की।मंत्रालय ने कहा कि उस विमान के 3 लोगों का पहले ही परीक्षण पॉजिटिव आ चुका है। वहीं ऑकलैंड की क्वारंटीन फैसिलिटी में 32 लोग थे, जिनमें से 15 लोग ऐसे हैं, जो अपने घरेलू संपर्कों के कारण संक्रमित हुए।

अब यहां के अस्पताल में 2 कोविड-19 रोगी हैं, जो कि एक सामान्य वार्ड में आइसोलेशन में हैं।वर्तमान में देश में 61 सक्रिय मामले हैं। वहीं शनिवार तक न्यूजीलैंड में कुल 25 लोगों की मौत हो चुकी थी।

आईएएनएस

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चीन से आया है कोरोना, कभी नहीं भूलूंगा ये बात, सत्ता मिली तो करूंगा ‘ड्रैगन’ से निर्भरता खत्म: ट्रंप

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Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इस बात को दोहराया है कि कोरोना वायरस चीन से आया है और वह इस बात को कभी नहीं भूलेंगे।

ट्रंप ने कहा कि अगर लोग उन्हें सत्ता में बनाए रखने के लिए वोट करते हैं तो वह चीन से देश की निर्भरता को खत्म करने की कसम खाते हैं। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि बीजिंग के साथ कोरोना वायरस के बाद पहले जैसे संबंध मायने नहीं रखते हैं। 

तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए ट्रंप न्यूपोर्ट वर्जीनिया में शुक्रवार को एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान ट्रंप ने कहा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था बहुत अच्छा कर रही थी, फिर हम पर चीन से आए इस वायरस का हमला हो गया।

उन्होंने कहा, उन्हें ऐसा कभी नहीं होने देना चाहिए था। हम इसे नहीं भूलेंगे। हमने देश को लगभग बंद किया, हमने लाखों लोगों की जान बचाई। अब हमने रिकॉर्ड के साथ देश को खोल दिया है। 

अमेरिका वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। 2,00,000 से अधिक अमेरिकियों की वायरस से चलते मौत हुई है और देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे लाखों नौकरियों का नुकसान हुआ है।

ट्रंप ने कहा कि अगर मुझे अगले चार साल और मिलते हैं, तो मैं अमेरिका को दुनिया की विनिर्माण महाशक्ति बना दूंगा। हम सभी के लिए चीन पर अपनी निर्भरता को समाप्त कर देंगे।

ट्रंप के चीन के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद ही कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ। इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए अमेरिका और चीन के बीच लगभग एक साल तक बातचीत चली। 

अमेरिका और चीन ने साल की शुरुआत में व्यापार सौदे के फेस-1 पर हस्ताक्षर किए। इस हस्ताक्षर के बाद दो साल से चला आ रहा टैरिफ युद्ध खत्म हो गया। इसके चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था खासा प्रभावित हुई थी। 

मई में ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार समझौते को फिर से जारी करने से इनकार कर दिया। वहीं, अमेरिका ने 14 सितंबर को चीन से पांच सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें कंप्यूटर-पार्ट्स, कपास और बाल उत्पाद शामिल हैं।

अमेरिका ने इसके पीछे की वजह मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में श्रम शिविरों में जबरन लोगों द्वारा इन वस्तुओं के उत्पादन को बताया।  

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यूएनजीए 2020 में इमरान खान ने दोहराया 2019 का भाषण

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Imran Khan Pakistan

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में दिया गया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भाषण उनके पिछले साल के भाषण का ही कॉपी था।

खान के भाषण में इस बार भी भ्रष्ट कुलीन, पेड़ लगाने, इस्लामोफोबिया, आरएसएस, मोदी, कश्मीर की ही बातें शामिल थीं।
इतना ही नहीं, खान का भाषण और उसे पढ़ने का प्रवाह और तरीका तक पिछले साल की तरह था। अगर इसमें कुछ नया था तो वह कोरोनावायरस की बातें थीं। इसके अलावा पिछले साल के भाषण का कुछ हिस्सा इस साल के भाषण में नहीं था।

इस बार खान ने पिछली बार की तरह महिलाओं और हिजाब का कोई उल्लेख नहीं किया। 2019 के भाषण में उन्होंने कहा था, एक महिला कुछ देशों में अपने कपड़े उतार सकती है, लेकिन वह उसमें कुछ बढ़ा नहीं सकती? और ऐसा क्यों हुआ है? क्योंकि कुछ पश्चिमी नेताओं ने इस्लाम को आतंकवाद के साथ जोड़ लिया है।

उनके भाषण की कुछ लाइनें आंशिक रूप से संपादित थीं। उदाहरण के तौर पर 2019 में उन्होंने कहा था- हमने पांच साल में एक अरब पेड़ लगाए। अब हमने 10 अरब पेड़ों का लक्ष्य रखा है। वहीं 2020 में कहा -हमने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अगले तीन वर्षों में 10 अरब पेड़ लगाने का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है।

2019 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अवधारणा को समझाया था और कहा था मुझे यह समझाना होगा कि आरएसएस क्या है। श्री मोदी आरएसएस के जीवनर्पयत सदस्य हैं। यह हिटलर और मुसोलिनी से प्रेरित एक संगठन। वे उसी तरह नस्लीय श्रेष्ठता में विश्वास करते हैं जैसे नाजी आर्य नस्ल के वर्चस्व में विश्वास करते थे।

इस बार इस्लामोफोबिया का संदर्भ लेकर कहा, इसके पीछे का कारण आरएसएस की विचारधारा है जो दुर्भाग्य से आज भारत पर शासन कर रही है। इस चरमपंथी विचारधारा की स्थापना 1920 के दशक में की गई थी, आरएसएस के संस्थापक पिताओं ने नाजियों से प्रेरणा ली और नस्लीय शुद्धता-वर्चस्व की उनकी अवधारणाओं को अपनाया।

ऐसी ही स्थिति कश्मीर के मामले में भी रही। पिछले साल कहा था, जब हम सत्ता में आए तो मेरी पहली प्राथमिकता थी कि पाकिस्तान वह देश होगा जो शांति लाने की पूरी कोशिश करेगा। यही वह समय है जब संयुक्त राष्ट्र को भारत को कर्फ्यू हटाने के लिए कहना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र को कश्मीर के आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर देना चाहिए। पिछले 72 सालों से भारत ने कश्मीरी लोगों की इच्छा के विरुद्ध और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए जम्मू-कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। अगर दो परमाणु देशों के बीच एक पारंपरिक युद्ध शुरू होता है .. तो कुछ भी हो सकता है।

वहीं भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान को अपने जबाव में कहा, पिछले 70 वर्षों में दुनिया को जो एकमात्र चीज दी है वह है आतंकवाद, कट्टरपंथ और कट्टरपंथी परमाणु व्यापार।

बता दें कि कश्मीर को लेकर प्रमुख प्रस्ताव के 47 वें नंबर के मुताबिक पाकिस्तान को कश्मीर से अपने सैनिकों और नागरिकों को वापस लेना है।

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