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अब प्रेग्नेंट होने में मदद करेंगे ये ‘स्पर्मवोट’

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प्रेग्नेंट

पहली बार जर्मन वैज्ञानिकों ने एक मोटरचालित ‘स्पर्मवोट’(स्पर्म रोबोट) बनाने में कामयाबी हासिल की है उन स्वस्थ शुक्राणुओं को तैरने में मदद करेगी जिसकी गति थोड़ी धीमी होती है, लेकिन गर्भधारण के लिए वे बिल्कुल सक्षम होते हैं. गर्भधारण नहीं कर पाने का एक प्रमुख कारण शुक्राणुओं की तैरने की चाल सुस्त होना भी है. इसका इलाज कृत्रिम गर्भाधान या अन्य प्रजनन तकनीक से किया जाता है, लेकिन यह शत-प्रतिशत कामयाब नहीं है.

जर्मनी के आईएफडब्ल्यू ड्रेसडेन के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव नैनोसाइंस के शोधार्थियों ने एक माइक्रोमोटर बनाने में कामयाबी हासिल की है जो शुक्राणुओं की पूंछ में चिपक कर उसकी गति बढ़ाने का काम करती है.

प्रयोगशाला में मोटर ने अपने काम को बेहद सटीक तरीके से किया और शुक्राणुओं को संभावित निषेचन के लिए अंडाणु तक तेजी से पहुंचाकर उससे अलग हो गया.

शोधकर्ता मरियाना मेडिना-सेनचेझ, लुकास स्वार्ज, ओलीवर जी स्मिड और उनके साथियों का कहना है कि इस तकनीक के क्लिनिकल टेस्टिंग से पहले इसमें सुधार करने की जरूरत है.

ब्रिटेन ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्राइलॉजी विभाग के अनुसार फिलहाल उपलब्ध कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की सफलता दर 30 फीसदी से भी कम है. वहीं, आईवीएफ (इन वित्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक कहीं ज्यादा सफल है, इस काफी अधिक खर्च होता है. इस शोध को एसीएस जर्नल नैनो लेटर्स में प्रकाशित किया गया है.

wefornews bureau

स्वास्थ्य

कोरोना वैक्सीन आने से पहले दुनियाभर में मौतों का आंकड़ा 20 लाख तक पहुंच सकता है : डब्ल्यूएचओ

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WHO Tedros Adhanom Ghebreyesus

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि कोरोना का प्रभावी वैक्सीन व्यापक रूप से इस्तेमाल में लाए जाने से पहले दुनियाभर में कोरोनोवायरस से मरने वालों की संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है।

बीबीसी के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन प्रमुख माइक रायन ने शुक्रवार को कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाने की स्थिति में यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

चीन में प्रकोप शुरू होने के नौ महीने बाद दुनियाभर में कोविड -19 से मरने वालों की संख्या तेजी से 10 लाख होने की ओर बढ़ रही है।

रायन ने यूरोपीय लोगों से खुद से यह पूछने का आग्रह किया कि क्या उन्होंने लॉकडाउन की आवश्यकता से बचने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।

उन्होंने सवाल किया कि क्या सभी विकल्प लागू किए गए थे, जैसे परीक्षण और ट्रेसिंग, क्वारंटीन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना और हाथ धोना।

इससे पहले, स्पेन की राजधानी मैड्रिड ने कोरोना के मद्देनजर आठ और जिलों में सख्त प्रतिबंध लगा दिए जो अब शहर के 10 लाख लोगों को प्रभावित करते हैं।

फ्रांस में, दक्षिणी शहर मार्सिले में बार और रेस्तरां के कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों को बंद करने का विरोध किया। वहीं, ब्रिटेन में दैनिक संक्रमण मामले बढ़ने के साथ कई क्षेत्रों में सख्त प्रतिबंधों की घोषणा की गई है।

आईएएनएस

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स्वास्थ्य

भारत बायोटेक का इंट्रानेजल कोविड वैक्सीन के लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से करार

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अग्रणी वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने कोविड-19 के ‘नोवल चिम्प एडेनोवायरस, सिंगल डोज इंट्रानेजल’ वैक्सीन के लिए बुधवार को सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ लाइसेंसिंग समझौता होने की घोषणा की।

हैदराबाद स्थित कंपनी के पास अमेरिका, जापान और यूरोप को छोड़कर सभी बाजारों में वैक्सीन वितरित करने का अधिकार है।

जहां एक ओर परीक्षण के पहले चरण का ट्रायल सेंट लुइस यूनिवर्सिटी की वैक्सीन एंड ट्रीटमेंट इवैल्यूएशन यूनिट में होगा, वहीं भारत बायोटेक आवश्यक विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद, भारत में क्लिनिकल परीक्षणों के आगे के चरणों को आगे बढ़ाएगा और हैदराबाद के जीनोम वैली में स्थित जीएमपी सुविधा में वैक्सीन के बड़े पैमाने पर निर्माण का कार्य करेगा।

भारत बायोटेक के अनुसार, इस इंट्रानेजल वैक्सीन ने चूहों पर अध्ययन में सुरक्षा के अभूतपूर्व स्तर को दिखाया है। प्रौद्योगिकी और डेटा को हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका सेल में और नेचर के एक संपादकीय में प्रकाशित किया गया है।

भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने कहा, हमें इस इनोवेटिव वैक्सीन पर सहयोग करने पर गर्व है। हमें उम्मीद है कि हम इस वैक्सीन को 1 अरब डोज तक पहुंचा देंगे। एक इंट्रानेजल वैक्सीन न केवल एडमिनिस्टर करने में सरल है, बल्कि सुई, सीरिंज आदि जैसे चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों के उपयोग को कम करने के लिए भी सरल होगा।

उन्होंने कहा कि एक प्रभावी नेजल डोज न केवल कोविड-19 से बचाएगा, बल्कि यह एक अन्य प्रकार की प्रतिरक्षा बनाकर रोग के प्रसार को भी रोकेगा।

आईएएनएस

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राष्ट्रीय

संसद ने महामारी संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

यह विधेयक संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया । इस संबंध में अध्यादेश अप्रैल में जारी किया गया था ।

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Lok Sabha

नयी दिल्ली, 21 सितंबर : संसद ने सोमवार को महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्ष वर्द्धन ने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों से हमारी सरकार लगातार महामारी जैसे विषयों से निपटने के बारे में समग्र एवं समावेशी पहल अपना रही है. ’’

डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा, ‘‘ इस दिशा में सरकार ‘राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम’ बनाने पर काम कर रही है ।’’ उन्होंने कहा कि इस बारे में विधि विभाग ने राज्यों के विचार जानने का सुझाव दिया था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘पहले दो वर्षो हमें सिर्फ चार राज्यों मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, गोवा और हिमाचल प्रदेश से सुझाव मिले। अभी हमारे पास 14 राज्यों से सुझाव आ चुके हैं।’’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम बनाने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने वायरस पर शोध के संबंध में जीनोम श्रृंखला तैयार करने सहित कई अन्य कार्यो का उल्लेख किया ।

उन्होंने कहा कि पिछले नौ महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कोविड के खिलाफ अभियान चलाया । प्रधानमंत्री ने स्वयं कई बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया ।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकार करते हुए सोमवार को इसे मंजूरी दी । उच्च सदन ने कुछ दिन पहले महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी थी ।

यह विधेयक संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया । इस संबंध में अध्यादेश अप्रैल में जारी किया गया था ।

उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के माध्यम से महामारी रोग अधिनियम 1897 में संशोधन किया गया है। इसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है । साथ ही, विधेयक में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करने का भी प्रावधान है।

इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुंचाने कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न करने और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुंचाने पर जुर्माने और दंड का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अधिकतम पांच लाख रूपये तक जुर्माना और अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।

निचले सदन में विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि यह सरकार डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कर्मियों की तरफ ध्यान नहीं दे रही, जबकि उन्हें ‘‘कोरोना योद्धा’’ कहती है।

उन्होंने हालांकि कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और उनकी टीम द्वारा रात-दिन किये गये परिश्रम की सराहना की।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अर्द्धचिकित्साकर्मियों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुभाष भामरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया और उनका मनोबल बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी ने समाज के दो रूप दिखाए। एक में जहां समाज के सभी वर्गों ने जरूरतमंदों और गरीबों की मदद की, वहीं समाज ने दूसरा रूप भी देखा कि किसी सोसाइटी में या घर में रोगी पाये जाने पर पड़ोसियों ने उनका बहिष्कार किया।

पेशे से चिकित्सक रहे भामरे ने कहा कि डॉक्टर और अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित होने का खतरा होते हुए भी दिन रात काम करते रहे। प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया। उनका मनोबल बढ़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन पर हमलों से मन व्यथित होता है। डॉक्टरों को सम्मान मिलना चाहिए।’ द्रमुक की टी सुमति ने कहा कि यह संशोधन ऐसे समय में किया गया, जब तमिलनाडु में हजारों छात्रों ने सरकार से नीट को टालने की मांग की।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह रवैया नहीं चलेगा कि राज्य सरकार काम करे और केंद्र केवल आदेश दे।

उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बारे में स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन कार्रवाई करेगा, कौन सी एजेंसी कार्रवाई करेगी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कृष्ण देवरयालू ने कहा कि हमें डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए।

शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, बीजद के बी महताब, बसपा के गिरीश चंद्र, भाजपा की हिना गावित, कांग्रेस के सप्तगिरी उल्का, हनुमाल बेनीवाल आदि सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।

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