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ये सुपर फूड बनाएंगे बालों को मजबूत और चमकदार!

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अक्सर बालों की समस्या से परेशान ही रहते हैं।

खासतौर पर महिलाए तो इस समस्या से ज्यादा जूझती हैं। कई बार तो बाल बहुत झड़ने लगते हैं। लेकिन शायद आप नहीं जानते हों कि इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए आपको अपनी डायट में कुछ चेंजेज करने की जरूरत है।

आज हम आपको ऐसे ही कुछ खास फूड के बारे में बता रहे हैं जो जिनके सेवन से आप ना सिर्फ बालों की समस्या से निजात पा सकते हैं बल्कि उन्हें चमकदार और मजबूत भी बना सकते हैं।

ऐसा माना जाता है कि आंवला खाना बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

बालों

बालों

बादाम खाने से बाल मुलायम होते हैं।

साइट्रस फ्रूट्स जैसे संतरा, अनार, चैरी आदि का सेवन करना भी बालों के लिए फायदेमंद होता है।

शिमला मिर्च खाना भी काफी अच्छा होता है

इन सब चीजों के अलावा अंडे खाने से भी आपके बाल सिल्की हो जाते हैं।

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Uttar Pradesh: अनुमति के बिना दाढ़ी रखने पर पुलिसकर्मी निलंबित

अली को दाढ़ी हटाने के लिए तीन बार चेतावनी दी गई थी और दाढ़ी बढ़ाने को लेकर अनुमति लेने के लिए कहा गया था। हालांकि, पुलिसकर्मी ने अनुमति नहीं ली और दाढ़ी बढ़ाना जारी रखा।

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UP Police Inteshar Ali

उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर इंतेसार अली को बिना अनुमति के दाढ़ी रखने पर निलंबित कर दिया गया और पुलिस लाइंस भेज दिया गया है।

अली को दाढ़ी हटाने के लिए तीन बार चेतावनी दी गई थी और दाढ़ी बढ़ाने को लेकर अनुमति लेने के लिए कहा गया था।

हालांकि, पुलिसकर्मी ने अनुमति नहीं ली और दाढ़ी बढ़ाना जारी रखा।

एसपी बागपत अभिषेक सिंह ने कहा कि पुलिस मैनुअल के अनुसार, सिर्फ सिखों को दाढ़ी रखने की अनुमति है, जबकि अन्य सभी पुलिसकर्मियों को चेहरे साफ-सुथरा रखना आवश्यक है।

एसपी ने कहा, “यदि कोई पुलिसकर्मी दाढ़ी रखना चाहता है, तो उसे उसकी अनुमति लेनी होगी। इंतेसार अली से बार-बार अनुमति लेने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया और बिना अनुमति के दाढ़ी रख ली।”

अली पुलिस बल में सब-इंस्पेक्टर के रूप में शामिल हुए और पिछले तीन सालों से बागपत में तैनात थे।

वहीं उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने दाढ़ी रखने की अनुमति मांगी थी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

पीएम मोदी ने दुर्गा पूजा के मौके पर बताया नारी शक्ति का महत्व

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Narendra Modi

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजन समारोहों में वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेते हुए नारी शक्ति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति हमेशा से सभी चुनौतियों को परास्त करने की ताकत रखती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारी मां दुर्गा ‘दारिद्रय दु:ख भय हारिणि’ कही जाती हैं, ‘दुर्गति-नाशिनी’ कही जाती हैं। अर्थात, वो दुखों को, दरिद्रता को, दुर्गति को दूर करती हैं। इसलिए, दुगार्पूजा तभी पूरी होती है जब हम किसी के दुख को दूर करते हैं, किसी गरीब की मदद करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिषासुर का वध करने के लिए माता का एक अंश ही पर्याप्त था, लेकिन इस कार्य के लिए सभी दैवीय शक्तियां संगठित हो गई थीं। वैसे ही नारी शक्ति हमेशा से सभी चुनौतियों को परास्त करने की ताकत रखती है। ऐसे में सभी का दायित्व है कि संगठित रूप से सभी उनके साथ खड़े हों।

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला सशक्तीकरण को भाजपा का संस्कार और संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि रेप की सजा से जुड़े कानूनों को बहुत सख्त किया गया है, दुराचार करने वालों को मृत्युदंड तक का प्रावधान है। भारत ने जो नया संकल्प लिया है – आत्मनिर्भर भारत के जिन अभियान पर हम निकले हैं, उसमें भी नारी शक्ति की बहुत बड़ी भूमिका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए केंद्र सरकार के कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 22 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोलना हो या फिर मुद्रा योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को आसान ऋण देना हो। चाहे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान हो या फिर तीन तलाक के खिलाफ कानून हो। देश की नारीशक्ति को सशक्त करने के लिए निरंतर काम किया जा रहा है।

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खान-पान में भारतीय बेहद शौकीन, खर्च करने के मामले में हैं न्यूयॉर्क से आगे

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food

भारतीय खाने-पीने के मामले में बेहद शौकीन होते हैं। भारतीयों के खाने-पीने पर खर्च की तुलना न्यूयॉर्क से करने पर हैरान करने वाले परिणाम सामने आए हैं। जहां औसनत भारतीय हर दिन अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खाने की थाली पर खर्च करते हैं।

वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक औसतन अपनी दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खाने की थाली पर खर्च करते हैं, जो भारतीय की तुलना में बेहद कम है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 

रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की सबसे मंहगी थाली दक्षिणी सूडान की है, जहां लोगों को औसतन अपनी दैनिक आय का 186 प्रतिशत जरूरी सामग्री पर खर्च करना होता है। खाने पर खर्च को लेकर दुनिया के 36 देशों की सूची में भारत 28वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय हर दिन भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खर्च करते हैं। वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक हर दिन अपनी भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खर्च करते हैं। 

रिपार्ट में सामने आया कि उप-सहारा अफ्रीका के देश इस क्षेत्र में शीर्ष 20 में से 17वें स्थान पर हैं। इसमें कहा गया कि इन देशों में ज्यादातर खाद्य सामग्री बाहर से आयात की जाती है, जो आर्थिक रूप से विश्व में इन देशों को कमजोर बनाती है। इसके चलते इन देशों में भुखमरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। श्रमिकों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। 

जलवायु परिवतर्न ने बढ़ाई मुश्किलें : 

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील और विकसित देशों में रहने वाले लोगों की दैनिक आय का भोजन पर खर्च करने को लेकर भारी असमानताएं हैं। विकासशील देशों के नागरिकों को विकसित देशों की अपेक्षा भोजन के लिए अधिक श्रम करना पड़ता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन ने कई देशों में लोगों का भोजन के प्रति संघर्ष और बढ़ा दिया है।

जिन देशों में लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है, वहां जलवायु परिवर्तन के चलते उपज कम हो रही है। वहीं ये लोग परिवार को खिलाने के लिए अनाज व अन्य खाद्य सामग्री खरीदने में असमर्थ होते हैं। अब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस कम आय वाले श्रमिकों के सामने नई चुनौतियां दी हैं। बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और कारोबारों के ठप रहने के चलते लोगों को पौष्टिक भोजन जुटाने मुश्किल हो रही है। 

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