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शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में गिरावट

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गिरावट
शेयर बाजार

देश के शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मंगलवार को गिरावट का रुख बना हुआ है।

प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.30 बजे 49.69 अंकों की गिरावट के साथ 26,817.23 पर और निफ्टी भी 16.05 कमजोरी के साथ 8,222.45 पर कारोबार करते देखे गए।

बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 40.05 अंकों की बढ़त के साथ 26,497.11 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 16.9 अंकों की बढ़त के साथ 8,255.40 पर खुला।

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राष्ट्रीय

राज्यों के हिस्से का 47 हजार करोड़ न देकर केंद्र ने तोड़ा GST क्षतिपूर्ति कानून : कैग

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GST
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कैग ने केंद्र सरकार द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (सेस) के 47,272 करोड़ रुपये कब्जा की बात सामने आई है।

नियमों के हिसाब से यह रकम जीएसटी लागू होने से घटे राजस्व की पूर्ति के लिए राज्यों में बंटनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस रकम को अपने ही पास रख लिया। 

सरकारी खातों की अपनी ऑडिट रिपोर्ट में महालेखा परीक्षक व नियंत्रक (कैग) ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के पहले दो साल में जुटाई गई इस रकम को अलग से चिह्नित करते हुए टिप्पणी लिखी है।

कैग के मुताबिक, 2017 से जीएसटी लागू होने के कारण राजस्व हानि के बदले राज्यों को मुआवजा देने के लिए नॉन-लैप्सेबल जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह निधि में राशि जमा की जानी थी। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं करते हुए जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून का उल्लंघन किया। 

कैग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में जीएसटी सेस के तौर पर 62,612 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, लेकिन इनमें से 56,146 करोड़ रुपये ही क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह निधि में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 में भी 95,081 करोड़ रुपये में से 54,275 करोड़ रुपये की रकम ही निधि में जमा कराई गई।

2017-18 के 6,466 करोड़ रुपये और 2018-19 में 40,806 करोड़ रुपये की रकम को सरकार ने अपने खातों में ‘अन्य उद्देश्य’ के नाम से दिखाया है। इससे उस साल सरकार के खाते में राजस्व प्राप्ति की अधिकता और राजकोषीय घाटे में कमी दिखाई दी।

कैग की इस रिपोर्ट से केंद्र और राज्यों के बीच सेस क्षतिपूर्ति को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा तेज हो सकता है। राज्यों को पिछले वित्त वर्ष से वादे के अनुरूप मुआवजा जीएसटी से नहीं मिल सका है।

केंद्र सरकार ने इसके लिए आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए पर्याप्त धन जमा नहीं होने का तर्क दिया है और इस राजस्व कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को बाजार से कर्ज उगाहने की सलाह दी है। लेकिन कांग्रेस, वाम, तृणमूल और आप जैसे विपक्षी दलों की सत्ता वाले राज्यों ने केंद्र की इस सलाह का विरोध किया है। ऐसे में कैग की रिपोर्ट के बाद ये राज्य हल्ला मचा सकते हैं।

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सेंसेक्स 835 अंक उछला, 11000 के ऊपर बंद हुआ निफ्टी

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घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार लिवाली आने से लगातार छह सत्रों की गिरावट पर ब्रेक लगा। सेंसेक्स 835 अंकों की जबरदस्त तेजी के साथ 37,389 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी करीब 245 अंक चढ़कर 11,050.25 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों में दो फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई। आईटी, टेलीकॉम और ऑटो सेक्टरों के शेयरों में जोरदार लिवाली रही।

सेंसेक्स पिछले सत्र से 835.06 अंकों यानी 2.28 फीसदी की तेजी के साथ 37,388.66 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी बीते सत्र से 244.70 अंकों यानी 2.26 फीसदी की तेजी के साथ 11,050.25 पर बंद हुआ।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र से 438.29 अंकों की तेजी के साथ 36,991.89 पर खुला और 37,471.17 तक उछला, जबकि दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर 36,730.52 रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी बीते सत्र से 104.85 अंकों की तेजी के साथ 10,910.40 पर खुला और 11,072.60 तक उछला, जबकि दिनभर कारोबार के दौरान निफ्टी का निचला स्तर 10,854.85 रहा।

बीएसई मिडकैप सूचकांक पिछले सत्र से 403.47 अंक यानी 2.90 फीसदी की तेजी के साथ 14,336.68 पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 327.30 अंकों यानी 2.31 फीसदी की तेजी के साथ 14,495.58 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में तेजी रही जबकि सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच शेयरों बजाज फिनसर्व (6.64 फीसदी), एचसीएल टेक (5.01 फीसदी), भारती एयरटेल (4.98 फीसदी), इंडसइंड बैंक (4.97 फीसदी) और एलएंडटी (4.58 फीसदी) शामिल रहे।

बीएसई के सभी 19 सेक्टरों में तेजी दर्ज की गई। बीएसई के सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच सेक्टरों में टेलीकॉम (5.73 फीसदी), टेक (4.02 फीसदी), आईटी (3.63 फीसदी), ऑटो (3.40 फीसदी) और पूंजीगत वस्तुएं (3.10 फीसदी) शामिल हैं।

–आईएएनएस

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सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा लुढ़का, 3 फीसदी टूटा निफ्टी

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खराब वैश्विक संकेतों और डेरीवेटिव सीरीज के अनुबंधों की समाप्ति के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम का आलम रहा।

सेंसेक्स 1,115 अंक लुढ़कर 36,554 पर ठहरा जबकि निफ्टी 326 अंक टूटकर कर 10,806 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स पिछले सत्र से 1,114.82 अंकों यानी 2.96 फीसदी की गिरावट के साथ 36,553.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी बीते सत्र से 326.30 अंकों यानी 2.93 फीसदी की गिरावट के साथ 10,805.55 पर बंद हुआ।

निराशाजनक वैश्विक संकेतों से घरेलू शेयर बाजार में आरंभिक कारोबार के दौरान बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ था।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र से 386.24 अंकों की गिरावट के साथ 37,282.18 पर खुला और 36,495.98 तक लुढ़का जबकि दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स का ऊपरी स्तर 37,304.26 रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी बीते सत्र से 120.85 अंकों की गिरावट के साथ 11,011 पर खुला और दिनभर के कारोबार के दौरान 10,790.20 तक लुढ़का जबकि कारोबार के दौरान निफ्टी का ऊपरी स्तर 11,015.30 रहा।

आईएएनएस

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