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अब आपकी सेल्फी होगी ऑनलाइन पेमेंट का पासवर्ड

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आपने ऑनलाइन लेन-देन में सीमित अंकों वाले पासवर्ड का यूज तो जरुर किया होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि अब आपकी सेल्फी भी ऑनलाइ पेमेंट का पासवर्ड बन सकती है।

जी हां, हांगकांग में एक ऐसा एप बनाया गया है जो यूजर्स के चेहरे की पहचान करने पर मोबाइल पेमेंट करता है, जिसकी वजह से फ्रोड रोकने में मदद मिलेगी। न्यूज पेपर में छपी एक खबर के मुताबिक हांगकांग के स्टार्टअप नीट ने मोबाइल पेमेंट के लिए चेहरे को पहचानने वाला ऐप लॉच किया।

जिसे ‘नीट’ नाम दिया गया है, ‘नीट’ ऐपल-पे और एंड्रॉयड-पे जैसे पेमेंट ऑप्शन के साथ आसानी से काम करता है। हालांकि आम लोगों को ‘नीट’ के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। नीट के संस्थापक डेविड रोजा का कहना है कि यह मोबाइल बैंक अकाउंट की तरह है। अकाउंट खोलते वक्त आपकी जो फोटो सेव होगी, भुगतान के वक्त सेल्फी से उसका मिलान किया जाएगा। सेल्फी से आपके फोटो के मिलान के बाद ही पैसा मिलेगा।

वहीं पेटीएम संस्थापक विजय शेखर ने बताया कि अभी कहना मुश्किल है कि यह कब लॉन्च होगा। रिजर्व बैंक ने मंजूरी नहीं दी है। अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह ऐप ऑनलाइन पेमेंट में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में कितना कारगर साबित होता है।
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गूगल ने हटाए चीन से संबंधित 3,000 फर्जी यूट्यूब चैनल

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अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने में अब बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं, इस बीच गूगल ने जुलाई से सितंबर तक की अवधि में 3,000 से अधिक ऐसे फर्जी यूट्यूब चैनल हटाए हैं, जो चीन से संबंधित एक बड़े स्पैम नेटवर्क का हिस्सा रहे थे।

इनके द्वारा अपने चैनल पर चुनाव को प्रभावित किए जाने संबंधी अभियानों को संचालित किया जा रहा था। कंपनी द्वारा इनका सफाया किए जाने के परिणामस्वरूप अब ये अपने चैनल पर दर्शक जुटा पाने में असमर्थ हैं।

शुक्रवार देर रात गूगल ने अपने एक बयान में कहा, हमने जितने भी वीडियोज के पहचान किए हैं, उनमें से अधिकतर में लोगों के देखे जाने की संख्या दस से भी कम हैं और इस पर भी असली के यूजर्स के मुकाबले इन्हें स्पैम अकांउट्स से ही देखे गए हैं, जो वर्तमान में सक्रिय नहीं है।

गूगल थ्रेट एनालिसिस ग्रुप टीएजी से शेन हंटले ने कहा, हालांकि इन नेटवर्क्‍स के द्वारा पोस्ट तो नियमित तौर पर किया जाता रहा है, लेकिन इनमें स्पैम कंटेंट की अधिकता रही है। हमने यूट्यूब पर प्रभावी ढंग से दर्शकों तक इनकी पहुंच नहीं देखी है।

आईएएनएस

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सैमसंग ने भारत में लॉन्च किया गैलेक्सी फिट2 फिटनेस ट्रैकर

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सैमसंग ने आज अपना नया फिटनेस ट्रैकर लॉन्च किया, जिसे उसने गैलेक्सी फिट2 नाम दिया है। गैलेक्सी फिट2 स्लिम, लाइटवेट, लम्बी अवधि वाले बैटरी वाला और ट्रैकिंग फीचर्स से लैस है।

इसकी कीमत 3999 रुपये है और यह दो रंगों-काले और स्कारलेट में उपलब्ध है। इसकी बिक्री 16 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। गैलेक्सी फिट2 में एक इंडेंटेड स्ट्रिप है जो पसीने को जमा नहीं होने देता।

इसका वजन 21 ग्राम है और 159एमएएच की बैटरी से लैस है। इस बैटरी के साथ यह एक बार चार्ज में 15 दिनों तक काम कर सकता है।

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गू्गल ने अब तक के सबसे बड़े डीडॉस साइबर हमले को रोका

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गूगल ने कहा है कि साइबर सुरक्षा खतरे जैसे डिस्ट्रीब्यूटेड डिनाइल-ऑफ-सर्विस (डीडीओएस) वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह हर आकार के व्यवसाय और उपयोगकर्ता के भरोसे को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

टेक दिग्गज ने खुलासा किया है कि उसके बुनियादी ढांचे ने सितंबर 2017 में ऊंची बैंडविथ वाले 2.5 टीबीपीएस डीडॉस के हमले को नाकाम किया था।

गूगल ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, हमारे हजारों आईपी को एक साथ निशाना बनाने के बावजूद हमले का हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हमलावर ने चकमा देने के लिए कई नेटवर्क का उपयोग करके 167 एमबीपीएस (प्रति सेकंड लाखों पैकेट) से 1,80,000 सीएलएडीएपी, डीएनएस और एसएमटीपी सर्वरों को उजागर किया था।

कंपनी ने आगे कहा, यह हमलावरों के अच्छी तरह से साधन संपन्न होने की बात को दशार्ता है क्योंकि यह हमला, एक साल पहले मिराई बॉटनेट पर हुए 623 जीबीपीएस की तुलना में 4 गुना बड़ा था। यह अब तक का सबसे उंची -बैंडविड्थ का हमला था।

डीडॉस हमला बेवजह का ट्रैफिक बढ़ाकर पीड़ित की सेवा को बाधित करती है। हालांकि यह हमला उपयोगकर्ता के डेटा को उजागर नहीं करता है और समझौता करने के लिए भी नहीं कहता है। लेकिन यदि सिस्टम में आई रुकावट को जल्दी नहीं हटाया जाता तो यह उपयोगकर्ताके विश्वास को खोने का कारण बनता है।

गूगल ने यह भी कहा कि हमलावर सिस्टम को बाधित करने के लिए लगातार नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं।

गूगल ने कहा, हम भविष्य में होने वाले हमलों के अपेक्षित आकार का अनुमान लगा सकते हैं। लिहाजा हमें अप्रत्याशित चीजों के लिए तैयार रहना जरूरी है।

कंपनी ने हाल ही में क्लाउड आर्मर मैनेज्ड प्रोटेक्शन की घोषणा की है जो उपयोगकर्ताओं को अपनी तैनाती को सरल बनाने, लागतों का प्रबंधन करने और एप्लिकेशन की सुरक्षा के जोखिम को कम करने में सक्षम बनाता है।

गूगल ने कहा कि यह इंटरनेट समुदाय के दूसरे लोगों के साथ काम कर रहा है ताकि वह उस इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करके खत्म कर सके, जिनके जरिए ये हमले किए गए।

–आईएएनएस

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