तेलगांना: लहराया गया देश का सबसे ऊंचा तिरंगा | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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तेलगांना: लहराया गया देश का सबसे ऊंचा तिरंगा

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तेलंगाना राज्य की दूसरी सालगिरह पर मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव ने हैदराबाद में देश का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा झंडा फहराया।

हुसैन सागर तालाब के पास संजीवया पार्क पर 303 फीट यानी 92 .35 मीटर का यह राष्ट्रीय झंडा हमेशा लहराता रहेगा। ऐसा लगता है जैसे पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न राज्यों में बड़े और ऊँचे झंडे लगाने की होड़ चल रही है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में जो झंडा लहराया गया था उससे हैदराबाद का झंडा 10 मीटर ऊँचा है, जबकि इसके पहले झारखंड के 81 मीटर ऊँचे झंडे का छत्तीसगढ़ के झंडे ने रिकार्ड तोडा था। हैदराबाद पॉलिएस्टर से बने 108 फ़ीट ऊँचे और 72 फ़ीट चौड़े इस झंडे का भार 92 किलो है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस झंडे की लागत 2 करोड़ रुपए है। झंडे की ऊंचाई की वजह से हैदराबाद एयरपोर्ट पर विमानों के आने-जाने में रुकावट आने के दिक्कत को देखते हुए एएआई से अनुमति ली गई थी।

 

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खेती कॉर्पोरेट क्षेत्र को देने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर रही है सरकारः कांग्रेस

अहमद पटेल ने इसे देश का काला कानून बताया। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता इस कानून को लेकर देश को गुमराह कर रहे हैं।

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Ahmed Patel

केंद्र सरकार ने देश की खेती को कॉर्पोरेट क्षेत्र के हवाले करने की मंशा से किसानों से संबंधित विधेयक को पारित कराया है। सरकार ने विधेयक पारित कराने में न केवल जल्दबाजी की, बल्कि असंवैधानिक तरीका भी अपनाया। यह कहना है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रताप सिंह बाजवा और शक्ति सिंह गोहिल का।

किसानों से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस पार्टी के इन सभी नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। अहमद पटेल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार के इस मनमाने तरीके को लेकर ही कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है।

प्रधानमंत्री के बयान में सच्चाई नहीं

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर जो कह रहे हैं, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। यह कानून किसानों के खिलाफ है और इससे देश के किसानों को भारी नुकसान होगा। सरकार इसी तरह भूमि अधिग्रहण विधेयक को भी लेकर संसद में आई थी, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के कारण उसे वापस लेना पड़ा था।

अहमद पटेल ने इसे देश का काला कानून बताया। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता इस कानून को लेकर देश को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा के नेता जो बात कह रहे हैं, उससे जुड़े सवाल पर केंद्र सरकार कोई जवाब नहीं दे पा रही है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मत विभाजन की मांग करना संसद के सदस्यों का अधिकार है। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की तो इसे खारिज कर दिया गया और क्रूरता से कानून को पारित करा लिया गया। ऐसा करना देश के संघीय ढांचे का अपमान है। यह धोखा है और विधेयक गलत तरीके से पारित हुआ है।

प्रताप सिंह बाजवा ने कानून लाने के समय पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ से जूझ रहा है। गलवां घाटी जैसी हिंसक झड़प हो रही है। दूसरी तरफ कोविड-19 की महामारी जैसा संकट है। ऐसे समय में केंद्र सरकार इस तरह का कानून लेकर आ रही है। बाजवा का कहना है कि केंद्र सरकार इस कानून को अगले साल भी ला सकती थी, लेकिन अपने कॉर्पोरेट घराने वाले मित्रों को लाभ पहुंचाने की उसे काफी हड़बड़ी है।

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अंतरराष्ट्रीय

लद्दाख गतिरोध: भारत और चीन के बीच कोर कमांडरों की वार्ता आज

इन उपायों में सैनिकों को शीघ्रता से हटाना, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचना, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों एवं प्रोटोकॉल का पालन करना और एलएसी पर शांति बहाल करने के लिये कदम उठाना शामिल हैं।

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China India

भारत और चीन की सेनाओं के बीच कोर कमांडरों की छठे दौर की बातचीत आज मोल्डो में होने जा रही है। इसमें मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के सौनिकों को पीछे हटाना और तनाव घटाने पर बनी पांच सूत्री सहमति के क्रियान्वयन पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से चीन की ओर मोल्डो में सुबह 9 बजे यह वार्ता शुरू होने वाली है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पहली बार विदेश मंत्रालय से एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के इसमें हिस्सा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि भारत इस वार्ता में कुछ ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद कर रहा है।

शंघाई सहयोग संगठन (LAC) से अलग 10 सितंबर को मास्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई एक बैठक में दोनों पक्ष सीमा विवाद हल करने पर एक सहमति पर पहुंचे थे। इन उपायों में सैनिकों को शीघ्रता से हटाना, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचना, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों एवं प्रोटोकॉल का पालन करना और एलएसी पर शांति बहाल करने के लिये कदम उठाना शामिल हैं।

वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करने वाले हैं जो लेह स्थित भारतीय थल सेना की 14 वीं कोर के कमांडर हैं। जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लियू लिन के करने की संभावना है, जो दक्षिण शिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

भारतीय राजनयिक जयंत खोबरागड़े को वीजा देने से पाकिस्तान का इनकार

इस मुद्दे पर न तो भारत की तरफ से और न ही पाकिस्तान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है।

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Imran Khan Pakistan

भारत के वरिष्ठ राजनयिक जयंत खोबरागड़े को पाकिस्तान ने वीजा देने से इंकार कर दिया है। जयंत को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग का कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया जाना था। घटनाक्रम से जुड़े लोगों ने रविवार को यह जानकारी दी। समझा जाता है कि पाकिस्तान ने जयंत के वीजा को इस आधार पर मंजूरी नहीं दी कि वह इस पद के लिए अत्यधिक वरिष्ठ हैं।

घटनाक्रम से जुड़े लोगों ने बताया कि भारत ने जून में ही जयंत को भारत का उप उच्चायुक्त बना कर वहां भेजने के अपने कदम से पाकिस्तान को अवगत करा दिया था। इस मुद्दे पर न तो भारत की तरफ से और न ही पाकिस्तान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है।

पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिये जाने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र सरकार के कदम के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को निलंबित कर राजनयिक संबंधों को कमतर कर दिया है। जम्मू कश्मीर पर भारत के निर्णय के बाद पाकिस्तान ने यहां अपने उच्चायोग में किसी उच्चायुक्त को नहीं भेजा है।

तब से दोनों देशों के उच्चायोगों का नेतृत्व दोनों देशों के उप उच्चायुक्त कर रहे हैं। इस साल जून में भारत ने पाकिस्तान से कहा था कि वह यहां अपने उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या में कटौती करते हुए उसे आधा कर दे। भारत ने यह भी कहा था कि वह इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग में भी कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेगा।

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