व्यंग्य – एक हम ही हैं जो अपने कष्टों के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार नहीं हैं..!

Blog: Mukesh Kumar Singh बेहाल चेन्नई का नज़ारा देखकर किसके रौंगटे नहीं ख़ड़े होंगे! किसको दहशत नहीं हो रही होगी! कौन हमारी भ्रष्ट व्यवस्था को शुरू से अन्त तक नहीं कोसता होगा! कौन ‘ऊपर वाले’ से रहम की भीख़ नहीं माँग रहा होगा! ये सारे काम ऐसे हैं जिन्हें हम बख़ूबी कर सकते हैं. इसीलिए करते भी हैं. लेकिन क़ुदरत है कि सुनती ही नहीं! ये क़ुदरत उन लोगों को सद्बुद्धि क्यों नहीं देती जिनकी...