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सेंसेक्स में 232 अंकों की तेजी

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देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी देखी गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 232.22 अंकों की तेजी के साथ 27,009.67 पर और निफ्टी 65.40 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 8,266.45 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 56.09 अंकों की तेजी के साथ 26,833.54 पर खुला और 232.22 अंकों या 0.87 फीसदी तेजी के साथ 27,009.67 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 27,082.63 के ऊपरी और 26,829.53 के निचले स्तर को छुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी सुबह 34.50 अंकों की तेजी के साथ 8,235.55 पर खुला और 65.40 अंकों या 0.80 फीसदी तेजी के साथ 8,266.45 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 8,294.95 के ऊपरी और 8,216.40 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी तेजी देखी गई। मिडकैप 32.92 अंकों की तेजी के साथ 11,417.06 पर और स्मॉलकैप 107.75 अंकों की तेजी के साथ 11,280.67 पर बंद हुआ।

बीएसई के 19 में से 15 सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (1.70 फीसदी), बैंकिंग (1.63 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.57 फीसदी), तेज खपत उपभोक्ता वस्तु (1.35 फीसदी) और घातु (1.30 फीसदी) सेक्टरों में सर्वाधिक तेजी रही।

बीएसई के चार सेक्टरों तेल व गैस (0.14 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.05 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.04 फीसदी) और दूरसंचार (0.03 फीसदी) में गिरावट रही।

–आईएएनएस

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आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्र के उद्योगों में अगस्त में 8.5 प्रतिशत घटा उत्पादन

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प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना काल में प्रमुख उद्योगों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्र के उद्योगों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।

बुनियादी ढांचा क्षेत्र के आठ प्रमुख उद्योगों का उत्पादन अगस्त माह में सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत घटा है। यह लगातार छठा महीना है जब इस क्षेत्र के उद्योगों में गिरावट आई है।

अगस्त में मुख्य तौर पर इस्पात, रिफाइनरी उत्पादों और सीमेंट का उत्पादन घटने से इसमें गिरावट रही। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्र के उद्योगों का उत्पादन पिछले साल अगस्त 2019 में 0.2 प्रतिशत घटा था।

मंत्रालय के आंकड़ों में कहा गया है कि कोयला और उर्वरक को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में अगस्त 2020 में गिरावट रही। कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, इस्पात, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी सभी छह क्षेत्रों के उत्पादन में इस दौरान कमी आई है।

चालू वित्त वर्ष 2020- 21 के पहले पांच माह (अप्रैल से अगस्त) के दौरान कुल मिलाकर बुनियादी ढांचा क्षेत्र के आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 17.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि एक साल पहले इसी अवधि में क्षेत्र में ढाई प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

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31 अक्तूबर तक बढ़ी वित्त वर्ष 2019 का GST वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा

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सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीएसटी वार्षिक रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा को एक महीने बढ़ाते हुए 31 अक्तूबर 2020 तक कर दिया है। पहले इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर तक थी।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने ट्वीट किया कि, ‘आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर चुनाव आयोग से उचित मंजूरी हासिल करने के बाद सरकार ने जीएसटीआर-9 और जीएसटीआर 9सी के तहत वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख को 30 सितंबर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्तूबर 2020 तक कर दिया है।’ 

इससे पहले सरकार ने मई में 2018-19 के लिए वार्षिक जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को सितंबर 2020 तक तीन महीने के लिए बढ़ाया था। जीएसटीआर-9 एक वार्षिक रिटर्न है, जो करदाताओं द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शासन के तहत दाखिल किया जाता है। 

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भारत दुनिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक : अभिजीत बनर्जी

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Abhijit-Vinayak-Banerjee

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अभिजीत बनर्जी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

उन्होंने यह भी कहा कि समस्याओं से निपटने को लेकर सरकार का आर्थिक प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं था। हालांकि, बनर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में सुधार देखने को मिलेगा।

प्रख्यात अर्थशास्त्री ने ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-19 महामारी संकट से पहले से ही धीमी पड़ रही थी। वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2017-18 में 7 प्रतिशत से कम होकर 2018-19 में 6.1 प्रतिशत पर आ गई। वहीं 2019-20 में घटकर यह 4.2 प्रतिशत रह गई।

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। देश की अर्थव्यवस्था में चालू तिमाही (जुलाई-सितंबर) में पुनरूद्धार देखने को मिलेगा। बनर्जी ने कहा कि 2021 में आर्थिक वृद्धि दर इस साल के मुकाबले बेहतर होगी।

बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था में रिकार्ड 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। कई एजेंसियों और संस्थानों ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान जताया है। गोल्डमैन सैक्श ने अपने पूर्व के अनुमान को संशोधित करते हुए 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 14.8 प्रतिशत जबकि फिच रेटिंग्स ने 10.5 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान जताया है।

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