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पंजाब के मुख्यमंत्री ने शहरी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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Amarinder Singh

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को राज्य के सभी 167 कस्बों और शहरों में 700 करोड़ रुपये के खर्च के साथ विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लंबित वैट आकलन के लिए एकमुश्त निपटान योजना की घोषणा के साथ 11,000 करोड़ रुपये के शहरी पर्यावरण सुधार कार्यक्रम (यूईआईपी) का चरण दो शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं को वर्चुअल तरीके से लॉन्च करते हुए कहा कि आबकारी और कराधान विभाग जल्द ही इस योजना को अधिसूचित करेगा, जिसे उनकी सरकार ने उन व्यवसायों की चिंताओं के मद्देनजर शुरू करने का फैसला किया है, जो उनके मूल्य वर्धित कर (वैट) आकलन और शिकायतों से संबंधित मुद्दों का तेजी से निवारण नहीं हो पाया।

यह देखते हुए कि शहर आर्थिक गतिविधि के केंद्र भी हैं, इसलिए व्यापार और उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाना आवश्यक है, उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने उद्योगों और कराधान विभागों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उपयोगकर्ता, उद्योग और व्यापारियों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में जाने की जरूरत न पड़े।

अमरिंदर सिंह ने शहरों की सफाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया और सभी शहरों से घरेलू ठोस कचरे को अलग करने का आग्रह किया।

उन्होंने भारत सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए नवांशहर की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यूईआईपी योजनाएं, जिनके तहत पहले चरण में 3,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं, राज्य को शहरों के बुनियादी ढांचे और इसके निवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार करने में मदद करेंगी।

940 स्थानों पर 45,000 से अधिक लोगों से डिजिटल रूप से जुड़े मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुए वित्तीय संकट के बावजूद इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने में कामयाबी मिली है।

यह देखते हुए कि पंजाब की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है, जिन्हें आमतौर पर विकास के इंजन के रूप में माना जाता है, अमरिंदर सिंह ने कहा कि परियोजनाएं शहरों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के अनुरूप हैं।

आईएएनएस

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देश में कोरोना मरीजों की संख्या 90 लाख के पार

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भारत में बीते 24 घंटों में कोविड-19 के 36,652 नए मामले सामने आए हैं, जिनके साथ कुल आंकड़े 96,08,211 हो गए हैं। वहीं और 512 मौतों के साथ संक्रमण से हुई मौतों की संख्या 1,39,700 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।

देश में वर्तमान में 4,09,689 सक्रिय मामले हैं, जबकि अब तक 90,58,822 रोगियों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। भारत में रिकवरी दर 94.28 प्रतिशत है, जबकि मृत्यु दर 1.45 प्रतिशत है।

मंत्रालय ने कहा, ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत में सक्रिय मामले 4.2 लाख से नीचे हो गए। रिकवर हुए मामले में 90 लाख के निशान को पार कर गए हैं।महाराष्ट्र अब तक 1,842,587 मामलों के साथ सबसे प्रभावित राज्य बना हुआ है।

वहीं प्रतिदिन दर्ज किए जा रहे नए मामलों में 78 प्रतिशत योगदान दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का है, जिनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक के दौरान कहा था कि विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ सप्ताहों में कोविड -19 वैक्सीन तैयार हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि वैज्ञानिकों के संकेत के साथ ही वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस मामलों की कुल संख्या 6.57 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि मृत्यु 15.1 लाख से अधिक हो गई है।

विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम्स साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने शनिवार को अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि वर्तमान में दुनियाभर में संक्रमण के कुल मामले और मृत्यु क्रमश: 65,771,488 और 1,516,035 हैं।

सीएसएसई के अनुसार, अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक कोविड प्रभावित देश है। यहां संक्रमण के 14,343,430 मामले और 278,605 मृत्यु दर्ज की गई है। वहीं संक्रमण के मामलों के हिसाब से वैश्विक सूची में भारत दूसरे स्थान पर है।

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किसान आंदोलनः 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान, कल देशभर में पीएम मोदी का फूंकेंगे पुतला

5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाएंगे। इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे।

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Farmers Protest Ghazipur Border

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन दिल्ली के विभिन्न बार्डर पर चल रहा है। अब किसान आंदोलन को तेज करने की तैयारी में हैं। 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे तथा आठ दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया गया है।

शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए किसानों ने कहा कि एमएसपी पर सरकार से बात चल रही है लेकिन हम तीनों कानून वापस करवा कर रहेंगे । भारतीय किसान यूनियन के महासचिव, एचएस लाखोवाल ने कहा कि कल, हमने सरकार से कहा कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाएंगे। इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा, के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हम आंदोलन को तेज करेगे। सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि नए कानून “किसान विरोधी” हैं, और वे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे वे बड़े निगमों की “दया” पर चले जाएंगे।

कल फिर होगी सरकार से बातचीत

किसानों का आंदोलन 9वें दिन भी जारी है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल की कल हुई बैठक भी बेनतीजा रही। करीब आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। सरकार की ओर से कहा गया कि बैठक सकारात्मक रही। अब किसान और सरकार के बीच 5 दिसंबर को फिर पांचवें दौर की बातचीत होगी।

सुप्रीम कोर्ट दायर की गई है याचिका

वहीं, किसान आंदोलन के चलते बंद दिल्ली सीमा खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि शाहीन बाग फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन प्रशासन की तरफ से तय जगह पर होना चाहिए, सड़क बाधित नहीं की जा सकती इसलिए लोगों को तय जगह पर भेजा जाए। कोविड से जुड़े निर्देशों का पालन भी करवाया जाए।

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मांगें पूरी न होने पर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन तेज करेंगे किसान

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नई दिल्ली, 4 दिसंबर । दिल्ली-गाजीपुर सीमा पर तीन कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर शनिवार को होने वाले एक और दौर की चर्चा अनिर्णायक होती है, तो वे राष्ट्रीय राजधानी में अधिक सड़कें और खाद्य उत्पादों की आपूर्ति ठप करके विरोध प्रदर्शन को तेज करेंगे।

गौरतलब है कि विज्ञान भवन में गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच चौथे दौर की वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची, लेकिन सरकार ने किसानों की कुछ मांगों पर अपना रुख नरम कर लिया है। हालांकि, किसानों ने तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तक विरोध प्रदर्शन को रोकने से इनकार कर दिया। चर्चा का एक और दौर शनिवार दोपहर 2 बजे के लिए रखा गया है।

सीमा बिंदु पर विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारत किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आईएएनएस से कहा, किसान चाहते हैं कि सरकार कानूनों को वापस ले और एक नया मसौदा तैयार करे। वर्तमान में इसमें कॉपोर्रेट्स के हितों का ध्यान रखा गया है। कानून किसानों के लिए होना चाहिए और उनसे सलाह ली जानी चाहिए। या तो सरकार कल हमारे अनुरोधों पर सहमत होगी या हम विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। अधिक किसान यहां आने के लिए तैयार हैं।

संघ के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान 26 जनवरी की परेड के साक्षी बने रहेंगे और राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर अपने ट्रैक्टर चलाएंगे।

तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह विर्क ने कहा, अगर सरकार कल हमारी मांगों को नहीं मानती है, तो हम राष्ट्रीय राजधानी में जाने वाले दूध, सब्जियों और फलों की आपूर्ति को रोक देंगे। सड़कों को अवरुद्ध करना सिर्फ पहला कदम था। हम कल अगले कदम के बारे में फैसला करेंगे।

दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर किसान पिछले नौ दिनों से धरने पर बैठे हैं। सिंघु सीमा पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जबकि कई अन्य समूहों ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर दिल्ली-यूपी गाजीपुर सीमा और दिल्ली-यूपी चिल्ला सीमा पर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है।

आंदोलन कर रहे किसान इस साल के शुरू में संसद द्वारा पारित तीन कृषि बिलों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली के निराकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे वे बड़े कॉपोर्रेट घरानों की दया पर जिएंगे।

ये तीन नए कृषि विधेयक कानून हैं – कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण); कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता; और फार्म सेवा और आवश्यक वस्तु (संशोधन)।

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र ने किसानों को गुमराह किया है।

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