राजनीतिप्रियंका गांधी ने बीजेपी सरकार से पूछे कुछ सॉलिड सवाल

WeForNews DeskJune 7, 2021871 min

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार कोरोना महामारी के दौर में भी आंकड़ो की बाजीगरी से बाज़ नही आई और संक्रमितों से लेकर कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या का आंकडा बताने में खेल करती रही है।

प्रियंका ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कोरोना महामारी में लोगों ने सरकार से आंकड़ों की पारदर्शिता की आवश्यकता स्पष्ट की थी। ये इसलिए जरूरी है कि आंकड़ों से कई बातों का पता लगता है और उससे फिर बेहतर तरीके से इलाज देना संभव होता है।

उन्होंने कहा कि आंकड़ों से ही बीमारी का फैलाव क्या है, संक्रमण ज्यादा कहां है, किन जगहों को सील करना चाहिए या फिर कहां टेस्टिंग बढ़ानी चाहिए। इसका पता चलता है। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। प्रियंका ने पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

कांग्रेस महासचिव ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि विशेषज्ञों का मानना है कि पहली लहर के दौरान आंकड़ों को सार्वजनिक न करना दूसरी लहर में इतनी भयावह स्थिति पैदा होने का एक बड़ा कारण था। लेकिन इसके बाद भी सरकार ने आंकड़ों को जागरूकता का साधन बनाने की बजाय बाज़ीगरी का माध्यम बना डाला।

प्रियंका गांधी ने आगे बताया कि सरकार ने महामारी में किस तरह आंकड़ों के साथ खेला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू से ही कोरोना वायरस से हुई मौतों एवं कोरोना संक्रमण की संख्या को जनसंख्या के अनुपात में दिखाया मगर टेस्टिंग के आंकड़ों की टोटल संख्या बताई। आज भी वैक्सीनेशन के आंकड़ों की टोटल संख्या दी जा रही है आबादी का अनुपात नहीं। और उसमें पहली और दूसरी डोज़ को एक में ही जोड़कर बताया जा रहा है। ये आंकड़ों की बाज़ीगरी है।

कांग्रेस महासचिव ने मोदी सरकार पर आंकड़ों को छुपाने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से जुड़े तमाम आंकड़ों को केवल सरकारी चैम्बरों में कैद रखा गया। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों द्वारा पत्र लिखकर इन आकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग के बावजूद भी ये नहीं किया गया।

प्रियंका ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना टेस्टिंग के आंकड़ों में यूपी जैस राज्यों आंकड़ों को सही तरीके से लोगों के सामने नहीं रखा। सरकार ने कुल टेस्टों की संख्या में RTPCR और एंटीजन टेस्ट के आंकड़ों को अलग-अलग करके नहीं बताया (यूपी में एंटीजन टेस्ट और RTPCR का अनुपात 65:35 था)। इसके चलते टोटल संख्या में तो टेस्ट ज्यादा दिखे लेकिन वायरस का पता लगाने की एंटीजन टेस्ट की सीमित क्षमता के चलते वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या का सही अंदाजा नहीं लग सका।

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