स्वास्थ्यदिल्ली में जहरीली धुंध : हरकत में आई केंद्र सरकार, सोमवार को बुलाई दिल्‍ली और पड़ोसी राज्‍यों के पर्यावरण मंत्रियों की मीटिंग

Dinesh ChandraNovember 6, 2016221 min

वायु प्रदूषण को लेकर आज दिल्‍ली के हालात ऐसे हैं कि केंद्र सरकार ने इसे इमरजेंसी करार दिया है।

इस मामले में उसने सोमवार को दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों (यूपी, हरियाणा और पंजाब) के पर्यावरण मंत्रियों की मीटिंग बुलाई है। इस हालात से निपटने के लिए दिल्‍ली सरकार भी हरकत में दिख रही है।

दिल्‍ली और इसके आसपास के इलाकों में स्‍मॉग का कहर जारी है। यह कहर एक दिन का नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे बढ़कर इस हालात तक पहुंचा है। दिल्‍ली में तो पहले से ही एयर पॉल्‍यूशन था।

इसको लेकर एनजीटी ने दिल्‍ली सरकार को लगातार उचित कदम उठाने के लिए कहा और तलाड़ भी लगाई लेकिन सरकार ने लापरवाही बरती।

इसका नतीजा यह निकला कि जैसे ही दीपावली की रात पटाखों का धुंआ बढ़ा तो हालात बेकाबू हो गए। पूरी दिल्ली और आसपास के इलाके को स्मॉग ने अपनी गिरफ्त में ले लिया।

इस मामले पर राजनीति करना बंद करें सभी पार्टियां
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा, ‘प्रदूषण से दिल्ली में इमरजेंसी के हालात हैं। ये स्थिति खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। हमें इससे निपटने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे।’

अनिल माधव ने अपील की है कि दिल्ली के प्रदूषण को लेकर कोई भी राजनीतिक पार्टी आरोप-प्रत्यारोप का खेल ना खेले और इस समस्या से निपटने में सहयोग करे।

बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की फटकार के बाद दिल्ली सरकार हरकत में आई है। हालांकि राजधानी में बढ़े प्रदूषण के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल ने सीधे तौर पर पड़ोसी राज्यों को कसूरवार ठहराया है।

सांस के मरीजों की तादाद हुई 6 गुना
दीपावली के बाद लगातार स्मॉग की स्थिति ज्‍यादा खतरनाक होती जा रही है। बढ़ते प्रदूषण को लेकर रिपोर्ट में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। बाताया जा रहा है कि इस दौरान सांस के मरीजों की तादाद 6 गुना तक बढ़ गई है।

दिल्ली में प्रदूषण ने 17 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आप सुनकर सन्नाटे में आ जाएंगे कि दिल्ली वालों के फेफड़े 40 सिगरेट के बराबर धुआं रोज़ सोख रहे हैं।

रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली सामान्य से 20 गुना ज्यादा प्रदूषित हो गई है। दिल्ली में हर चौथे बच्चे को फेफड़े की शिकायत है। जिससे अस्पतालों में 25 फीसदी तक मरीज़ बढ़ गए हैं। यही नहीं, सांस के मरीज़ों की संख्या 5 से 6 गुना बढ़ गई है।

जानें, क्‍यों और कैसे हुए ऐसे हालात
1. गाड़ियों का धुआं वायु प्रदूषण के लिए बड़ी वजह बनी है।
2. दिवाली की रात अंधाधुंध पटाखे छोड़े जाने से हालात बेकाबू हुए।
3. चिमनियां और फैक्ट्रियों के धुएं बड़ी वजह है।
4. भलस्वा और गाजीपुर में जलाए जा रहे कूड़े से भी स्थिति बिगड़ी है।
5. पंजाब और हरियाणा में जलाए जा रहे भूसे से भी पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।

wefornews bureau

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