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पाक को औक़ात दिखा सकते हैं तो दिखाइए, लेकिन ख़ोखले बयानों से बचिए

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पाक को औक़ात दिखा सकते हैं तो दिखाइए, लेकिन ख़ोखले बयानों से बचिए

By:मुकेश कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

पठानकोट आतंकी हमले के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर भी अब देश के उन शूरवीर नेताओं में शामिल हो चुके हैं जो सीमा पार से आने वाले आतंक के लिए पाकिस्तान को माकूल जवाब देने की ‘निजी राय’ रखते हैं. सेना दिवस के मौक़े पर दिल्ली में आयोजित एक सेमीनार में पर्रिकर ने कहा कि ‘कैसे, कब और कहां, इसका चयन आप भले ही कर लें, लेकिन निजी तौर पर मेरा ये मानना है कि जो लोग या संगठन भारत को नुक़सान पहुंचाते हैं, उन्हें भी वैसी ही हरक़तों की पीड़ा झेलनी चाहिए. तभी वो दूसरों का दर्द समझ पाएंगे.’ इसे ही जैसे को तैसा या ‘Eye for an Eye’ कहते हैं.

मनोहर पर्रिकर के विचार बड़े सीधे और सरल लग सकते हैं लेकिन रक्षा मंत्री के संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्हें अपनी निजी राय को जगज़ाहिर करने से बचना चाहिए था. क्योंकि रक्षा मंत्री के बोल जहां एक ओर हमारी सेनाओं के मनोबल को सीधे प्रभावित करते हैं, वहीं इसका ताल्लुक़ देश की साख़ से भी होता है, क्योंकि राय को निजी बताने से भी उसकी अहमियत कम नहीं होती.

उल्टा, ये सवाल ख़ड़ा होता है कि निजी राय और सरकारी नज़रिये में फ़र्क़ क्यों है? लोकतंत्र में नेताओं और उनकी पार्टियों को इसीलिए तो जनादेश मिलता है कि वो अपनी निजी राय को सरकारी नीति में तब्दील कर सकें. यदि किसी वजह से संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी निजी राय से समझौता करना पड़े तो उसके पास दो विकल्प हैं – पहला, निजी राय को लेकर वो ख़ामोश रहें और सरकारी नीति को ही अपनी राय मानकर उसकी पैरवी करें. दूसरा, यदि वो सरकारी नीति से असहमत हैं तो कैबिनेट के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धान्त (Principal of Collective Responsibility of the Cabinet) के मुताबिक़ अपने पद से इस्तीफ़ा देकर सरकार से अलग हो जाएं.

संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए ‘एक साथ दो नांव की सवारी करना’ मुनासिब नहीं है. इससे ‘लक्ष्मण रेखा’ को लांघने जैसी परिस्थिति बन जाती है. तुलसीदास ने लिखा है, ‘दुइ कि होइ इक संग भुआलू. हंसब ठठाई फुलाउब गालू.’ यानी गाल फूलाना और ठहाका लगाना जैसे दो काम एक साथ नहीं किये जा सकते. मनोहर पर्रिकर की निजी राय से हफ़्ते भर पहले केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कह चुके हैं कि ‘हम पाकिस्तान से दोस्ती बनाना चाहते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम कमज़ोर हैं. अगर पाकिस्तान आतंक की मदद से भारत में इस तरह की घटनाओं को अंज़ाम देता है तो हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.’ इसी तरह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी न जाने कितनी ही बार पाकिस्तान को मुंह-तोड़ जवाब देने की बात कर चुके हैं. ख़ुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रुख जगज़ाहिर है कि पाकिस्तान से हमें उसकी ही भाषा में बात करनी चाहिए. उसे ‘लव-लेटर’ नहीं लिखना चाहिए. एक के बदले दस सिर लाने चाहिए.

भारतीय नेताओं के ये तेवर कोई नये नहीं हैं. पाकिस्तान के भी कान पक गये होंगे, इन्हें सुनते-सुनते! देश की जनता भी आये दिन इस बात पर बहस करती है कि आख़िर कब तक हमारे नेता हमें वीर-रस के इन नारों से भरमाते रहेंगे! शहीद सैनिकों के परिवारों में भी इसे लेकर बेहद आक्रोश रहता है. उन्हें लगता है कि नेताओं की नीतियों का ख़ामियाज़ा वो अपनी प्राण देकर भरते हैं. नेताओं के ऐसे ही रुख की वजह से ही करोड़ों भारतीयों का ख़ून ख़ौलने लगता है कि हम कब यूं बातों के तीर चलाते रहेंगे? कब वाकई में पाकिस्तान को सबक सिखाने का वो काम करके दिखाएंगे, जिसकी बातें की जाती हैं! करोड़ों लोगों को युद्ध की पेंचीदगियों के बारे में पता नहीं है लेकिन वो पलक झपकते ही भारत सरकार से ये अपेक्षा करने लगते हैं कि हमें पाकिस्तान में घुसकर कम से कम उसके आतंकी अड्डों को तो नेस्तनाबूत कर ही देना चाहिए. हाल ही में, बाबा रामदेव भी यही पाठ पढ़ाते दिखायी दिये.

इसी तरह करोड़ों लोगों का मानना है कि भारत को तब तक पाकिस्तान कोई रिश्ता नहीं रखना चाहिए जब तक कि वो आतंकवाद को शह देने की अपनी नीति पर क़ायम रहता है. उससे कोई बातचीत नहीं करनी चाहिए. उसके साथ क्रिकेट भी नहीं खेलना चाहिए. कई बार तो ‘जितने मुंह उतनी बातें’ वाली दशा होती है. ‘पाकिस्तान और आतंकवाद’ राजनीति का मुद्दा बन जाता है. इसकी बदौलत हरेक पार्टी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती हैं. राजनीति होती है, इसलिए जनता को बरगलाया भी जाता है. कोरे और झूठे वादे किये जाते हैं. सच्चाई को जानबूझ कर छिपाया जाता है. देशवासियों को ज़मीनी हक़ीक़त नहीं समझायी जाती.

राजनेता उन्हें भारत की लाचारी या उसकी सीमाओं के बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहते. वो जनता को धोखे में रखना चाहते हैं, क्योंकि इससे उनका सियासी उल्लू सीधा होता है. पाकिस्तान की सरकारी नीति से भारत के मुसलमानों की मानसिकता को जोड़ा जाता है. इससे धार्मिक ध्रुवीकरण पैदा किया जाता है. दूसरी ओर, भारत सरकार ख़ुद को बहुत ताक़तवर बताते नहीं अघाती. जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान के मुक़ाबले भारतीय सेनाओं की शक्ति भले ही ज़्यादा हो, लेकिन दोनों परमाणु हथियारों वाले देश हैं. किसी ने भी इन्हें सिर्फ़ सज़ावटी अस्त्रों की रूप में नहीं बनाया है.

भारत की सैन्य शक्ति बड़ी है लेकिन पाकिस्तान भी कोई पिद्दी सा नहीं है. भारत मज़बूत और बेहतर स्थिति में ज़रूर है. लेकिन दोनों देशों के सैन्य दमख़म में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ नहीं है. हम पाकिस्तान से किसी भी युद्ध में ज़रूर जीत सकते हैं. हमारी पक्की जीत पर किसी को कोई शंका नहीं हो सकती. लेकिन भारत के पास इतनी शक्ति नहीं है कि वो पाकिस्तान को नेस्तनाबूत कर दे. हमारी सैन्य शक्ति बमुश्किल महीने भर का युद्ध लड़ने लायक है. पाकिस्तान की तो इससे भी कम है. फिर दिक़्क़त क्या है? हम पाकिस्तान के दांत क्यों नहीं खट्टे कर देते? इन सवालों का सीधा-सीधा जवाब हमारे राजनेता हमें कभी क्यों नहीं समझाते?

वजह सिर्फ़ इतनी सी है कि युद्ध में भारी विध्वंस होगा. युद्ध बहुत ख़र्चीला है. हमारी अर्थव्यवस्था इतनी मज़बूत नहीं है कि हम युद्ध का भारी ख़र्च आसानी से झेल लेंगे. पाकिस्तान की हालत तो और भी मरियल है. वो तो जीता ही है अमेरिकी सहायता पर. लेकिन हमारे सामने ग़रीबी, बेकारी, भूख, अशिक्षा, कुपोषण जैसी बुनियादी चुनौतियों से लड़ने का बड़ा लक्ष्य है. यदि हम एक बार युद्ध की राह पर चल निकले तो इन लक्ष्यों का हासिल करने में पचासों साल पीछे चले जाएंगे. इन मोर्चों पर पाकिस्तान की हालत हमसे भी कई गुना बद्तर है. इसीलिए उसकी सेना अपने वर्चस्व को क़ायम रखने के लिए आतंकवाद के रूप में भारत पर सस्ता युद्ध थोपती रही है. सीधी टक्कर वाला महंगा युद्ध लड़ना उसके बूते का नहीं है.

सबसे बड़ी बात ये है कि युद्ध से किसी समस्या का समाधान नहीं होता. युद्ध-विराम और शान्ति समझौते की बारी आती ही है. इसे अपनाना ही पड़ता है, क्योंकि कोई भी युद्ध अनन्त काल तक नहीं चल सकता. पाकिस्तान के जन्म से ही भारत की कोशिश ये है कि आपसी विवाद को बातचीत से ही सुलझाया जाए. विश्व समुदाय भी यही चाहता है. इसीलिए, वो हमेशा बातचीत के लिए दबाव बनाये रखता है. लेकिन जब भी बातचीत को पटरी पर लाने की कोशिश होती है, आतंकी उसे पटरी से उतारने में सफल हो जाते हैं. भारतीय जनमानस भी आतंकियों की साज़िश में फंस जाता है. आतंकी हमले के अन्ज़ाम देते ही हमारे नेता और तमाम रक्षा विशेषज्ञ वीर-रस से लबालब और ओजपूर्ण बयान देते लगते हैं. इससे ‘गयी भैंस पानी में’ वाली बात हो जाती है.

इसीलिए ज़रूरत है कि हमारे ‘माननीय नेतागण’ अपनी ज़ुबान को संयम दें. देश को अन्धेरे में रखने के बजाय उसे ज़मीनी सच्चाई बताएं. चुनौतियों के लिए तैयार करें. क्योंकि हवाई-क़िले बनाने से फ़ायदा नहीं, बल्कि नुक़सान ही होता है. जब भारत आर्थिक रूप से बहुत मज़बूत हो जाएगा, तभी हम वास्तविक महाशक्ति बन पाएंगे. अभी तो दोनों देशों में बहुत फ़र्क़ है. एक बहुत ज़्यादा ग़रीब है तो दूसरा उससे थोड़ा कम! एक परिपक्व उदारवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है तो दूसरा कट्टरवादी धर्मान्ध फौज़ी तानाशाहों की मुट्ठी में क़ैद मुल्क है, जहां लोकतंत्र जन्म से ही सिसक रहा है!

ज़रा हटके

Dev Deepawali: स्नान से लेकर उपवास तक, इन बातों का रखें खास ध्यान होगा शुभ

इस बार खास बात ये है कि कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया भी लगने जा रहा है। देव दिवाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सभी देवता स्वर्गलोक से दिवाली मनाने काशी में आते हैं।

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Dev Deepawali 2020: काशी में हर साल देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल देव दिवाली 30 नवंबर 2020 को मनाई जाएगी। इस बार खास बात ये है कि कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया भी लगने जा रहा है। देव दिवाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सभी देवता स्वर्गलोक से दिवाली मनाने काशी में आते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसी मान्यताएं हैं कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता हैं। आइए जानते हैं कि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

1.कार्तिक माह को बहुत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने पवित्र नदी में स्नान करने की प्राचीन परंपरा रही है। मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ महीने में, श्री हरि जल में रहते हैं। इसलिए सूर्योदय से पहले रोजाना नदी में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है, विशेषकर दीप दिवाली पर। इस दिन, लोग हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, पुष्कर और गर्गगंगा जैसे तीर्थ स्थानों में स्नान करने जाते हैं।

2.माना जाता है कि देव दीपावली के दिन सभी देव गंगा के घाट पर आते हैं और दीप जलाते हैं। इसलिए इस दिन नदी, तालाब आदि स्थानों पर दीप दान करें, ऐसा करने से आपको सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

3.देव दीपावली के त्योहार पर उपवास का बहुत महत्व है। इस दिन उपवास रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन शालिग्राम और तुलसी जी की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन तुलसी की पूजा करने वाले लोगों की मनोकामना पूरी होती है।

4.इसके अलावा आपको शराब या अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहना चाहिए। इस शुभ दिन को जमीन पर सोना शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर सोने से सभी रोगों और विकारों से छुटकारा मिलता है।

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ज़रा हटके

Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव के इन विचारों को अपनाएं, बदल जायेगा जीवन

Guru Nanak Jayanti 2020 के शुभ अवसर पर पढ़ें नानक देव के कुछ ऐसे विचार जिसे अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है।

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Guru Nanak Jayanti 2020: कल यानी 30 नवंबर को गुरु नानक जयंती कल मनाई जाएगी। गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु माने जाते हैं। गुरु नानक देव का जन्म रावी नदी के तट पर बसे एक गांव तलवंडी (अब पाकिस्तान) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था।

बचपन से ही गुरु नानक देव धार्मिक प्रवृति के थे। गुरु नानक के जन्मदिन को सिख धर्म में प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। हालांकि कई विद्वानों में इनके जन्मदिन को लेकर मतभेद भी हैं।

Guru Nanak Jayanti 2020 के शुभ अवसर पर पढ़ें नानक देव के कुछ ऐसे विचार जिसे अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है।

1.गुरु नानक देव जी का मानना था कि भगवान एक है और वह हर जगह पर है।

2.गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से धन कमाना चाहिए।

3.जरूरतमंदो की सहायता के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिेए।

4.पैसों को कभी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए।

5.गुरु नानक देव जी पुरुष और स्त्री में कोई फर्क नहीं करते थे, उनके अनुसार कभी भी महिलाओं का अनादर नहीं करना चाहिए।

6.तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए।

7.सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए।

8.हमें हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है इसलिए कभी भी मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।

9.भी मनुष्यों को प्रेम, एकता, समानता और भाईचारा का संदेश देना चाहिए। जब मन पाप और लज्जा से अपवित्र हो जा़ए तब ईश्वर का नाम लेने से वह स्वच्छ हो जाता है।

10.इक ओंकार का नारा गुरु नानक देव जी ने ही दिया था और वो कहते थे कि सबका पिता एक है इसलिए सभी लोगों को एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

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राम लीला मैदान की ओर कूच कर रहे किसान, पुलिस ने निरंकारी मैदान में लाकर छोड़ा

दरअसल निरंकारी मैदान पर किसानों के लिए बेसिक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके तहत सबसे पहले यहां किसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था करवाई जा रही है।

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farmers at Sindhu border

नई दिल्ली, 27 नवंबर । कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर अपना डेरा बनाया हुआ है। हालांकि पंजाब से दिल्ली आए किसानों को बुराड़ी के निरंकारी मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई है। लेकिन फिलहाल किसान अभी बॉर्डर पर जमे हुए हैं। जो किसान दिल्ली में घुस गए थे और रामलीला मैदान पहुंचने की कोशिश कर रहे थे उन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर बुराड़ी के निरंकारी मैदान में लाकर छोड़ दिया है।

पंजाब से दिल्ली अपना विरोध जताने आई सुनीता रानी और उनके साथी आज दिल्ली के राम लीला मैदान की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उनके मुताबिक पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बुराड़ी के निरंकारी मैदान छोड़ दिया है। उनके साथ और भी महिलाएं मौजूद है।

सुनीता रानी ने आईएएनएस को बताया, 2 दिन पहले हम पंजाब से चले थे। हमारे और भी साथी सिंघु बॉर्डर पर मौजूद है। दो दिन के सफर के बाद हम राम लीला मैदान पहुचने वाले थे मुश्किल से 1 किलोमीटर रह गए थे। वहीं हम सबको इकठ्ठा होना था वहाँ हमें करीब 2 बजे पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने हमें पूरे दिन घुमाया और अब हमें यहां बुराड़ी मैदान में छोड़ दिया है।

सुनीता के साथ आए अन्य लोग भी फिलहाल बुराड़ी के निरंकारी मैदान में बैठे हुए हैं। हालांकि इन लोगों का कहना है कि हम सभी को सिंघु बॉर्डर जाना है। लेकिन अब फिलहाल पुलिस इन्हें वापस बॉर्डर जाने देगी या नहीं ये अभी तक साफ नहीं हो सका है।

इन सभी की गाड़ियों पर ऑल इंडिया किसान सभा का झंडा लगा हुआ है। वहीं एक बस और 2 अन्य 4 पहिया गाडियां साथ मे मौजूद है। फिलहाल सभी ने बुराड़ी के निरंकारी मैदान में की गई लंगर की व्यवस्था से इन लोगों ने खाने का इंतजाम किया है।

दरअसल निरंकारी मैदान पर किसानों के लिए बेसिक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके तहत सबसे पहले यहां किसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था करवाई जा रही है।

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा खुद बुराड़ी पहुंचकर स्वयं व्यवस्था का जायजा लिया था। किसानों के लिए टेंट, शेल्टर, चलते-फिरते टॉइलट उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है।

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