ब्लॉगराजनीतिपहले से ही टूटे हुए लोगों का और भरोसा मत तोड़िये मोदीजी

WeForNews DeskJanuary 8, 20227041 min
narendra modi Black

5 जनवरी 2022 का लार्ड डलहौजी के चूक-सिद्धांत से कोई नाता नहीं है। डलहौजी द्वारा लागू वह ‘चूक-सिद्धांत’ भारत के स्वतंत्र राज्य को रद्द करने वाला सिद्धांत था। पर यह दिवस चूक-दिवस के रूप में ही जाना जायेगा? क्योंकि इसी दिन प्रधान सेवक की सुरक्षा में चूक हुई थी। एकदम जुल्मे हो गया भाई। पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक यह केतना खराब मामला है? आने वाले दिनों में यह चूक-दिवस सियासी इतिहास का हिस्सा बनेगा। जेल में सुरंग’ की तरह सुरक्षा में सेंध..? ना! ना!!

मोदी है तो मुमकिन है। चूक को भी अचूक बना देने का नाम नरेंद्र मोदी है? थैंक गॉड! मोदी किसी तरह फिरोजपुर से जिन्दा बचकर दिन-दहाड़े दिल्ली लौट आये? पंजाब के इस फ़िरोजपुर की रात बड़ी काली रात होती है। इसी काली रात को भगत सिंह, राजगुरु और बटुकेश्वर दत्त को अंग्रेजों ने आनन-फानन में फांसी के बाद जलाया था। सतलज साक्षी है। यह इतिहास तो साबरमती के इस नए संत को भी पता है?

सतलज का यह शहीदी किनारा अपने ५६ इंच के सीना वाले रहनुमा को याद ही कर रहा था। मोदी 45000 करोड़ की सौगात लेकर गए थे?शहीदों की यह भूमि फिरोजपुर, पीएम का पैकेज पाकर धन्य-धन्य हो जाती? पर यह नहीं हुआ। थोड़ी सी चूक हो गयी, अन्यथा भगत सिंह की इस भूमि पर मोदीजी अवश्य पहुँचते?

लौट के पीएम घर को आये। मोदी बदलाव लाने वाले पीएम भले ही साबित नहीं हो पाए हों, पर बदला लेने में इनका क्या जोड़? ये हर मांग पूरी करते हैं। दूध मांगने पर खीर देते हैं और कश्मीर मांगने पर चीर देते हैं…? ये घुसकर बदला लेते हैं, स्ट्राइक करते हैं? देखा न आपने? सुरक्षा में चूक होने पर इन्होने चन्नी पर कैसा अचूक निशाना साधा?

मोदी हैं भारतीय भीड़ंदाज। तीर निशाने पर लगाते हैं। कांग्रेस छटपटा रही है। गोदी मीडिया पगला सी गयी है। मीनाक्षी लेखी, स्मृति ईरानी को रोता विलखता देख मुझे भी दया आने लगी। अगर मैं कंगना को कलपते देख लेता तो दया के सागर में ही डूब जाता? अभी मोदी के अंगना में कंगना का बड़ा काम था। पर कंगना नजर नहीं आयी। अगर कंगना रो दे तो भक्त लोग और ही भक्ति में डूबने लगेंगे। चूड़ियों के बिना चिमटा का क्या भविष्य?

मोदी की सुरक्षा में चूक से भाजपा की अपनी घोषित मातृशक्तियां बहुत ही विचलित हैं, जो दुखद है। अपने, अपने ही होते हैं। कानी बिल्ली घर ही शिकार? ध्यान रखना चाहिए कि भीड़ की बेचैनी मानव को भीड़ बना देती है? पर भक्त की नजर में मोदी इससे पड़े हैं? मोदी मानव नहीं, महामानव हैं? फिरोजपुर में इन्हे कुछ भी नहीं होता। हजारों की फ़ौज और करोड़ों देवी देवता? यह अलग बात है कि मोदी के पीछे दलित शक्तियां नहीं है, पर दैवी शक्तियां तो हैं ही न? इनके पास चन्नी क्या, पूरी चंडिका है। कलकत्ते वाली काली का आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो सका कोई बात नहीं, पर कालीचरण का आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त है। जाको राखो साईयाँ…

पण्डे पुजारियों का क्या कहना? मोदी को मृत्युंजयी बनाने के लिए भक्तों का जाप जारी है। सुरक्षा की इस चूक से भक्त बेहाल हो रहे हैं। भाड़े के मुल्ले भी मजार खोज रहें हैं। दुआ की चादर लिये भाड़े के मौलवी घूम रहे हैं। कुछ मजार पर मीडिया तो पहले से ही मौजूद थी कि कोई तो मुल्ला आये और चादर चढ़ाये?

सुना है कि कुछ मीडिया हॉउस न्यूज बनाने के लिए दैनिक मजदूरी पर कुछ मुल्ले भी ले आये? इसे गोदी-मीडिया का ही चमत्कार माना जाय?इस चूक-इवेंट के बाद पैनल पर जाने वाले सभी नेता- प्रवक्ताओं की दिशा ही मोड़ दी गयी। मीडिया में जाने के बजाय सभी नेता प्रवक्ता को मंदिर जाना पड़ा। एक-एक नेता को मंदिर सम्हालने की जिम्मेवारी दी गयी।

सभी भक्त सावधान दिखे। थोड़ी सी चूक हुई कि गए बेटा? पार्टी में जिसे रहना होगा उन्हें मोदी-मोदी करना होगा। भक्त अपने ही खोदे हुए गड्ढे में गिर रहे हैं? भारत में यदि रहना तो वनडे मातरम कहना होगा। भक्तों को आज भोगना पड़ रहा है। सुरक्षा में इस थोड़ी सी चूक ने देश में धर्म-जागरण ला दिया है। चन्नी के कारण चंडिका भी धन्य हो गयी। बहाना कुछ भी हो, थोड़ी पूजा तो हुई? यह चूक-धर्म ही हिन्दू-धर्म है। जब-जब सुरक्षा में सेंध लगेगी तब-तब इसी तरह सियासी अवतार होता रहेगा?

चरणजीत सिंह चन्नी के कारण ही कृपा रुकी हुई थी। किस मंदिर का मोदी ने घंटा नहीं बजाया? कृपा केदार और काशी की कि इनकी सुरक्षा के लिए हर मंदिर के घंटे आज बज रहे हैं? मीडिया की पहुँच से दूर वाले मंदिर ही केवल बचे होंगे जहाँ पूजा नहीं हुई? थोड़ी सी चूक यहाँ भी दिख रही है। पूजा प्रबंधकों ने बिहार के पंडितों को नहीं पुकारा। अन्यथा यहाँ ऐसे-ऐसे पंडित हैं जो शाप से ही चन्नी को स्वाहा कर सकते हैं। मांझी पर इन्होने मंत्र परीक्षण भी किया। पंडितों के प्रक्षेपास्त्रों के परीक्षण की यही घड़ी है।

भाजपा में लोकतान्त्रिक मूल्य भले ही कम हों, पर तांत्रिक -मूल्य कम थोड़े ही है? तंत्रविद्या का ज्ञान रखने वालों की कमी भाजपा में नहीं है। कहाँ भीड़ होगी, कहाँ नहीं होगी इसकी सूचना तो दे ही सकते हैं। त्रिकालदर्शी पंडित ये तो बता ही सकते हैं कि किस दिशा में किसान धरना पर बैठे हैं नहीं बैठे हैं। पंडित को करना क्या चाहिए और कर क्या रहे हैं? अगर पंडित और मुल्ले सजग होते तो इतनी बड़ी चूक होती? बिलकुल ही नहीं होती। अगर ये पण्डे पुजारी ऐसा नहीं कर पाते हैं तो इसका मतलब है कि ये सब ठग हैं। गृह मंत्रालय द्वारा गठित जांच कमिटी की रिपोर्ट पर करवाई तो बाद में हो, पहले धर्म के इन ठेकेदारों पर करवाई होनी चाहिए?

वैसे यह लेखक भी बाबा बिहारी ही है। मुझे भारत से प्रेम है। इस कारण भारत के प्रधानमंत्री से भी प्रेम है। मैं असहमत हो सकता हूँ पर इनके बारे में अशुभ नहीं सोच सकता। यह बाबा भी इनके शुभ-अशुभ की जानकारी रखता है। मेरा मानना है कि यह राहुल का काल नहीं है, पर 5 जनवरी बुधवार को राहु का काल अवश्य था। 5 जनवरी, बुधवार को राहूकाल दोपहर 12:32 से 01:51 तक था। इसके अलावा यम गण्ड सुबह 08.32 से 09:52 तक, कुलिक सुबह 11:12 से दोपहर 12:32 तक, दुर्मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:53 तक था । ये सभी अशुभ काल है यानी इस दौरान मोदीजी को कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए था।

बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा भी अनुकूल नहीं होती है। लेकिन यदि मोदीजी को फिरोजपुर जाना बहुत जरूरी था तो धनिया या तिल खाकर यात्रा कर सकते थे। उत्तर पश्चिम की दिशा में सौंफ खाकर भी यात्रा की जाती है। फिरोजपुर भी उत्तर पश्चिम की दिशा में है? बस मेरी नजर में यहीं चूक हो गयी? एसपीजी के साथ स्पेशल पंडित जी (SPG) भी रहें ताकि किसी प्रकार की चूक नहीं हो?

खैर, यह राजनीति चुके हुए लोगों की ही राजनीति है? सारे छटे-छटाये ही लोग हैं। भटक गयी है सत्ता। सरोकार शून्य है। जिनको भगत सिंह और गांधी बनना है उन्हें सांसद विधायक होने की क्या जरुरत है? जीवन को समझने में भी बड़ी चूक हो रही है।

छोड़िये मोदी जी इन सब नाटकबाजी को? बिना किसी अभिनय के ही आप बेहतर अवधारणा अर्जित किये हैं और आगे भी कर सकते है। आप बहुत कुछ कर सकते हैं। आप में संभावना है। आपने भी साबरमती का पानी पीया है। साबरमती की गोद में ही पले बढे हैं। असली गांधी आपके पास ही है। क्यों नामधारी गांधी के पीछे पड़े हैं। फिरोजपुर जाईये, अवश्य जाईये। वहां के किसान मजदूर बहुत ही प्यार देंगें। किसान आतंकवादी नहीं हो सकते। इन्हे अपराधी मत बनाईये। ये पहले से टूटे हुए हैं, भरोसा और मत तोड़िये?

देश आपको धर्मात्मा ही मानता है। थोड़ा तो धर्म का परिचय दीजिये। जहाँ आप जा रहे थे, यह वही फिरोजपुर है जिसे तुगलकी सम्राट फिरोजशाह ने बसाया था। वह क्रूर और धर्मांध सुन्नी शासक था। फिरोजपुर में जिम्मी जिम्मी का कितना खेल हुआ। लाखों लोग कटे मरे इसी फिरोजपुर में?

फ़िरोज़ का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, 1351 में हुआ। सुल्तान बनने के बाद फ़िरोज़शाह तुग़लक़ ने सभी क़र्ज़े माफ कर दिए, जिसमें ‘सोंधर ऋण’ भी शामिल था, जो मुहम्मद तुग़लक़ के समय किसानों को दिया गया था। नादिरशाहों से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती पर ‘नरेंद्र और शाह’ से तो कुछ बेहतर करने की उम्मीद की ही जा सकती है।

आपने भी अपना तुगलकी फरमान वापस लिया यह स्वागतयोग्य है। एमएसपी पर कानून बना दीजिये यही किसान आपका जय जयकार करेंगें। किसान कभी भी आपकी सुरक्षा में चूक के कारण नहीं बनेंगे।

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