छत्तीसगढ़ में लगातार अभिनव प्रयोगों का दौर जारी है, इन प्रयोगों को नीति आयोग ने भी सराहा है।

नीति आयोग की टीम के सदस्य छत्तीसगढ़ पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य योजना आयोग, मुख्य सचिव और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से प्रदेश से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

छत्तीसगढ़ आए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, आयोग के वरिष्ठ सलाहकार, विषय विशेषज्ञ एवं अधिकारियों के दल ने गोधन न्याय योजना की सराहना करते हुए कहा इस तरह की योजना शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है। किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों के साथ ही यह स्वसहायता समूहों को भी सशक्त कर रहा है।

नीति आयोग की वरिष्ठ कृषि सलाहकार डॉ. नीलम पटेल ने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में राज्य में कई अनुकरणीय काम हो रहे हैं। इस मामले में यहां से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2018-19 की तुलना में 2019-20 में सरसो के उत्पादन में 22 प्रतिशत और सोयाबीन के उत्पादन में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ अच्छी तरक्की कर रहा है।डॉ. पटेल ने कहा कि मछलीपालन में भी यहां उल्लेखनीय काम हो रहा है। प्रदेश में मछली बीज की आपूर्ति के साथ ही देश के पांच अन्य राज्यों में भी इसे भेजा जा रहा है। मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ दूसरे राज्यों की भी मदद और मार्गदर्शन कर सकता है।

नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार नीरज सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज उत्खनन में भी अच्छा काम हो रहा है। यहां के स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात देश के सबसे बेहतर राज्यों में से है।उन्होंने बताया कि इज ऑफ डुइंग बिजनेस के मामले में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है।

नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिलों में शामिल यहां के दस जिले विकास योजनाओं और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्यवन में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने नीति आयोग के दल के साथ हुई बैठक में राज्य को धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दिलाने में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चावल की तुलना में धान से एथेनॉल का उत्पादन सस्ता है।

इसमें परिवहन और मिलिंग की समस्या नहीं आएगी। एथेनॉल उत्पादन के लिए राज्य में 27 एमओयू किए जा चुके हैं। हमें केवल भारत सरकार से अनुमति की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने भारत सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि अगले 10 वर्षों तक जारी रखने कहा। जीएसटी लागू होने के बाद उत्पादक राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ को राजस्व की काफी हानि हो रही है।

केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद किए जाने से राज्य को सालाना पांच हजार करोड़ रूपए राजस्व की हानि होगी।

–आईएएनएस

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