मुंबई, 23 सितंबर | भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि समावेशी और सतत विकास के लिए श्रम और उत्पाद बाजार में सुधार जारी रखने की जरूरत है।

अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के 48वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन में अपने संबोधन में उन्होंने महामारी की विरासत से निपटने और भविष्य के विकास के लिए स्थितियां बनाने की जरूरत का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, “संकट से हुए नुकसान को सीमित करना सिर्फ पहला कदम था, हमारा प्रयास महामारी के बाद के भविष्य में टिकाऊ और सतत विकास सुनिश्चित करना होना चाहिए।”

दास ने कहा, “निजी खपत के स्थायित्व को बहाल करना, जो ऐतिहासिक रूप से समग्र मांग का मुख्य आधार रहा है, आगे चलकर महत्वपूर्ण होगा।”

उन्होंने कहा, “इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सतत विकास को मध्यम अवधि के निवेश, मजबूत वित्तीय प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से मैक्रो फंडामेंटल पर निर्माण करना चाहिए।”

दास ने स्वास्थ्य, शिक्षा, नवाचार, और भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए ‘बड़े धक्के’ की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “हमें प्रतिस्पर्धा और गतिशीलता को प्रोत्साहित करने और महामारी प्रेरित अवसरों से लाभ उठाने के लिए श्रम और उत्पाद बाजारों में और सुधार जारी रखना चाहिए।”

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

गवर्नर ने कहा, “यह आवश्यक है कि इस योजना से लाभान्वित होने वाले क्षेत्र और कंपनियां इस अवसर का उपयोग अपनी दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता में और सुधार करने के लिए करें। दूसरे शब्दों में, योजना से लाभ टिकाऊ होना चाहिए और एकमुश्त नहीं होना चाहिए।”

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