जम्मू-कश्मीरः मेरा बेटा 16 साल का है, मुझे उसका शव दे दो जिससे उसे दफना सकूं | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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जम्मू-कश्मीरः मेरा बेटा 16 साल का है, मुझे उसका शव दे दो जिससे उसे दफना सकूं

“ मैंने अपना सब कुछ खो दिया है। मेरे जीवन में अब कुछ भी नहीं है। मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। मेरे बच्चे का शरीर लौटा दो या मुझे भी बच्चे के साथ दफना दो।”

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श्रीनगर में 30 दिसंबर को सेना की कथित मुठभेड़ में तीन युवक मारे गए थे। अब उनके परिवार वालों ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया है और इसकी जांच की मांग को लेकर सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में रिशतेदार, पडोसी और माता-पिता शामिल हुए।

उन्होंने मांग की कि उनके परिजनों के शवों को दफनाने के लिए उन्हें वापस कर दिया जाए। मुश्ताक अहमद का 16 वर्षीय बेटा अतहर मुश्ताक भी इस मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने कहा, “ मैंने अपना सब कुछ खो दिया है। मेरे जीवन में अब कुछ भी नहीं है। मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। मेरे बच्चे का शरीर लौटा दो या मुझे भी बच्चे के साथ दफना दो।”

दफनाने के अधिकार से वंचित पिता मुश्ताक ने ने शनिवार को अपने गाँव में एक कब्र खोद ली, इस उम्मीद में कि वह किसी दिन शव लाकर उसे वहां दफना सकेगा। पिता ने कहा कि मेरे बच्चे को वापस करो या मुझे बच्चे के साथ दफनाओ। मुझे पैसे की आवश्यकता नहीं है मुझे केवल अपने बच्चे के शरीर की जरूरत है। उन्होंने कहा, “मुझे भी मुठभेड़ भी मार दो और आपको इसका इनाम मिलेगा।”

बुधवार को श्रीनगर में कथित गोलीबारी में मारे गए तीन युवकों में ग्यारहवीं कक्षा का छात्र अतहर मुश्ताक था। अन्य में एक पुलिस हेड कांस्टेबल का बेटा 20 वर्षीय एजाज अहमद गनाई और दो पुलिसकर्मियोंका भाई शोपियां का रहने वाला जुबैर अहमद लोन था।

मुठभेड़ के तुरंत बाद, परिजनों ने शवों की मांग को लेकर श्रीनगर में पुलिस नियंत्रण कक्ष के बाहर एक विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें शव नहीं सौंपे, इसके बजाय उन्हें उत्तरी कश्मीर में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर सोनमर्ग ले गए और उन्हें वहां दफन कर दिया। अतहर और ज़ुबैर अहमद लोन के परिवारों ने श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में इकट्ठा होकर न्याय और शवों की वापसी का आह्वान किया।

जुबैर के बड़े भाई मोहम्मद शफी लोन ने कहा कि पुलिस और सेना द्वारा जारी बयानों में बहुत विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हमें हमारे बच्चों के शव वापस दिए जाएं।” उन्होंने कहा कि मेरा भाई उस दिन दोपहर 2 बजे घर पर था। उसके खिलाफ किसी भी सुरक्षा एजेंसी के पास कोई रिकॉर्ड नहीं था। वह दो घंटे के भीतर आतंकवादी कैसे बन सकता है? हमें मुठभेड़ स्थल पर बुलाया जाना चाहिए था। उन्होंने हमें सूचित भी नहीं किया।

लोन खुद पुलिसकर्मी हैं। उन्होने कहा. “हम एक जांच चाहते हैं। इससे पहले शोपियां में भी यही हुआ था। शोपियां मामले में भी उन्होंने कहा कि उन्होंने मारे गए आतंकवादियों से हथियार बरामद किए। “ उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों का न्याय और शरीर चाहते हैं।”

पिछले बुधवार को एक प्रेस वार्ता में कथित “मुठभेड़” के बाद, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) किलो फोर्स एच.एस. साही ने कहा, “हमें राष्ट्रीय राजमार्ग पर आतंकवादी गतिविधि के बारे में जानकारी मिली थी। यह आपरेशन कल शाम को इनपुट्स के बाद शुरू किया गया था कि आतंकवादी राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब एक घर के अंदर थे। हालांकि, उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने गोलीबारी का जवाब दिया, और ऑपरेशन रात के लिए स्थगित कर दिया गया।”

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गुजरात हाईकोर्ट ने अंतर-धर्म दंपति को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया

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गुजरात उच्च न्यायालय ने एक महिला के परिवार की शिकायत पर बनासकांठा जिले के पालनपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए एक अंतर-धर्म में विवाहित जोड़े की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। पालनपुर के 30 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति ने पिछले साल दिसंबर में कस्बे की 29 वर्षीय एक हिंदू युवती से शादी की थी।

9 जनवरी को, युवती के पिता की शिकायत के बाद कि उसकी बेटी ने 82,000 रुपये चुराए और पहले से शादीशुदा मुस्लिम व्यक्ति के साथ भाग गई, पालनपुर पुलिस ने सूरत में रहने वाले दंपति को हिरासत में ले लिया। एक स्थानीय अदालत ने बाद में उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया, जैसा कि पुलिस ने मांग की थी।

गिरफ्तारी के बाद, इस शख्स के भाई ने 18 जनवरी को हैबियस कॉर्पस पेटीशन के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उसने हाल ही में विवाहित अपने भाई की गिरफ्तारी को अवैध बताया। याचिका पर विचार करते हुए, उच्च न्यायालय ने स्थानीय मजिस्ट्रेट द्वारा जारी रिमांड आदेश को रद्द कर दिया और पालनपुर पुलिस को युगल को तुरंत रिहा करने के लिए कहा।

जस्टिस सोनिया गोकानी और संगीता विसेन की खंडपीठ ने मंगलवार को अपने आदेश के साथ घटनाओं पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तथ्य काफी चौंकाने वाले हैं।

यह भी देखा गया कि पालनपुर पुलिस ने ‘अंतर-धर्म विवाह’ के इस मामले से निपटने के दौरान ‘अनुचित व्यवहार’ दिखाया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में, पुलिस महानिरीक्षक, बनासकांठा को निर्देश दिया कि वह पालनपुर पूर्व और पालनपुर पश्चिम पुलिस स्टेशनों के पुलिस निरीक्षकों के आचरण की जांच करें, जिनकी हिरासत में इन्हें कई दिनों तक रखा गया।

यह दंपति सूरत में रहता है। युवती का पति वहीं काम करता है। सरकारी वकील ने अदालत को आश्वासन दिया है कि सूरत के पुलिस आयुक्त को इस दंपति की सुरक्षा शुरुआती चार सप्ताह की अवधि के लिए सुनिश्चित करने के लिए कहा जाएगा।

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संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव को नकारा, कहा- नए कृषि कानून पूरी तरह हो खत्म

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किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सरकार के प्रस्ताव पर आज संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई जिसमें यह फैसला लिया गया। किसानों का कहना है कि तीन नए कृषि कानून पूरी तरह खत्म होने चाहिए।

आमसभा में तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक एमएसपी के लिए एक कानून बनाने की बात किसान आंदोलन की मुख्य मांगों के रूप में दोहराई गई है। सयुंक्त किसान मोर्चा ने यह जानकारी प्रेस नोट के जरिए दी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त पैनल कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों से बातचीत कर रही है. आठ राज्यों (कर्नाटक, केरल, एमपी, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु और यूपी के के 10 अलग-अलग किसान संगठन बातचीत में शामिल होंगे।

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लम्ब्रेटा और विजय सुपर जैसे मशहूर स्कूटर बनाने वाली स्कूटर्स इंडिया पर लगेगा ताला

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लम्ब्रेटा और विजय सुपर जैसे लोकप्रिय स्कूटरों को बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की ऑटोमोबाइल कंपनी स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड जल्द बंद होने जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने हुई बैठक में लखनऊ की कंपनी स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने की मंजूरी दे दी है। 

एक अधिकारी ने बताया कि स्कूटर्स इंडिया के ब्रांड नाम को अलग से बेचा जाएगा, क्योंकि कंपनी के पास लम्ब्रेटा , विजय सुपर , विक्रम और लैम्ब्रो जैसे मशहूर ब्रांड हैं। कंपनी विक्रम ब्रांड के तहत कई प्रकार के तीन पहिया वाहनों को बनाती है। कंपनी को बंद करने के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के बाद भारी उद्योग मंत्रालय इसको बंद करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। 

सूत्रों ने बताया कि स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड को बंद करने के लिए 65.12 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। यह राशि सरकार से ऋण के रूप में ली जाएगी। प्रस्ताव के तहत यह कोष उपलब्ध होने के बाद कंपनी के नियमित कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना/स्वैच्छिक पृथकीकरण योजना (वीआरएस/वीएसएस) की पेशकश की जाएगी। लखनऊ मुख्यालय वाली कंपनी के करीब 100 कर्मचारी हैं। 

अधिकारी ने बताया कि वीआरएस/वीएसएस का विकल्प नहीं चुनने वाली कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद कानून, 1947 के तहत हटाया जाएगा। कंपनी की 147.49 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को आपसी सहमति वाली दरों पर लौटाई जाएगी। हालांकि, इस प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है।

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