लालू ने मोदी पर साधा निशाना, कहा- आपातकाल जैसे बन रहे हैं हालात | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

राष्ट्रीय

लालू ने मोदी पर साधा निशाना, कहा- आपातकाल जैसे बन रहे हैं हालात

Published

on

lalu yadav
फाइल फोटो

लालू प्रसाद ने एक बार फिर पीएम मोदी पर साधा निशाना है।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने आरोप लगाया हुए कहा कि देश में आपातकाल जैसे हालात है जहां राजग सरकार नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही है।

लालू ने राजग शासन की तुलना 1970 दशक के मध्य से करते हुए लोगों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलकर संविधान को नष्ट करने के जरिये लोकतंत्र की एक नयी परिभाषा गढ़ने का प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया।

लालू प्रसाद ने ट्वीट कर कहा कि मोदीजी आप किस तरह का लोकतंत्र दे रहे हैं। प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों से चलता है। लोकतंत्र में लोगों की चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। देश में आपातकाल जैसे हालात व्याप्त हैं।

उन्होंने कहा कि फासीवाद देश के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में है। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को गिरफ्तार और प्रतिबंधित किया जा रहा है।

राजद प्रमुख ने खेद जताया कि लोग संविधान को कमतर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि त्रासदियों का शिकार हुए लोगों से मिलने वाले राज्यों के निर्वाचित प्रमुखों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
keywords: bihar news,Emergency,Lalu Prasad,PATNA NEWS,tweet

राष्ट्रीय

किसान आंदोलनः 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान, कल देशभर में पीएम मोदी का फूंकेंगे पुतला

5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाएंगे। इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे।

Published

on

Farmers Protest Ghazipur Border

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन दिल्ली के विभिन्न बार्डर पर चल रहा है। अब किसान आंदोलन को तेज करने की तैयारी में हैं। 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे तथा आठ दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया गया है।

शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए किसानों ने कहा कि एमएसपी पर सरकार से बात चल रही है लेकिन हम तीनों कानून वापस करवा कर रहेंगे । भारतीय किसान यूनियन के महासचिव, एचएस लाखोवाल ने कहा कि कल, हमने सरकार से कहा कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाएंगे। इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा, के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हम आंदोलन को तेज करेगे। सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि नए कानून “किसान विरोधी” हैं, और वे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे वे बड़े निगमों की “दया” पर चले जाएंगे।

कल फिर होगी सरकार से बातचीत

किसानों का आंदोलन 9वें दिन भी जारी है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल की कल हुई बैठक भी बेनतीजा रही। करीब आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े रहे। सरकार की ओर से कहा गया कि बैठक सकारात्मक रही। अब किसान और सरकार के बीच 5 दिसंबर को फिर पांचवें दौर की बातचीत होगी।

सुप्रीम कोर्ट दायर की गई है याचिका

वहीं, किसान आंदोलन के चलते बंद दिल्ली सीमा खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि शाहीन बाग फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन प्रशासन की तरफ से तय जगह पर होना चाहिए, सड़क बाधित नहीं की जा सकती इसलिए लोगों को तय जगह पर भेजा जाए। कोविड से जुड़े निर्देशों का पालन भी करवाया जाए।

Continue Reading

राष्ट्रीय

मांगें पूरी न होने पर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन तेज करेंगे किसान

Published

on

By

Farmers and Traffic

नई दिल्ली, 4 दिसंबर । दिल्ली-गाजीपुर सीमा पर तीन कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर शनिवार को होने वाले एक और दौर की चर्चा अनिर्णायक होती है, तो वे राष्ट्रीय राजधानी में अधिक सड़कें और खाद्य उत्पादों की आपूर्ति ठप करके विरोध प्रदर्शन को तेज करेंगे।

गौरतलब है कि विज्ञान भवन में गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच चौथे दौर की वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची, लेकिन सरकार ने किसानों की कुछ मांगों पर अपना रुख नरम कर लिया है। हालांकि, किसानों ने तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तक विरोध प्रदर्शन को रोकने से इनकार कर दिया। चर्चा का एक और दौर शनिवार दोपहर 2 बजे के लिए रखा गया है।

सीमा बिंदु पर विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारत किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आईएएनएस से कहा, किसान चाहते हैं कि सरकार कानूनों को वापस ले और एक नया मसौदा तैयार करे। वर्तमान में इसमें कॉपोर्रेट्स के हितों का ध्यान रखा गया है। कानून किसानों के लिए होना चाहिए और उनसे सलाह ली जानी चाहिए। या तो सरकार कल हमारे अनुरोधों पर सहमत होगी या हम विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। अधिक किसान यहां आने के लिए तैयार हैं।

संघ के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान 26 जनवरी की परेड के साक्षी बने रहेंगे और राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर अपने ट्रैक्टर चलाएंगे।

तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह विर्क ने कहा, अगर सरकार कल हमारी मांगों को नहीं मानती है, तो हम राष्ट्रीय राजधानी में जाने वाले दूध, सब्जियों और फलों की आपूर्ति को रोक देंगे। सड़कों को अवरुद्ध करना सिर्फ पहला कदम था। हम कल अगले कदम के बारे में फैसला करेंगे।

दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर किसान पिछले नौ दिनों से धरने पर बैठे हैं। सिंघु सीमा पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जबकि कई अन्य समूहों ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर दिल्ली-यूपी गाजीपुर सीमा और दिल्ली-यूपी चिल्ला सीमा पर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है।

आंदोलन कर रहे किसान इस साल के शुरू में संसद द्वारा पारित तीन कृषि बिलों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली के निराकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे वे बड़े कॉपोर्रेट घरानों की दया पर जिएंगे।

ये तीन नए कृषि विधेयक कानून हैं – कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण); कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता; और फार्म सेवा और आवश्यक वस्तु (संशोधन)।

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नए कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र ने किसानों को गुमराह किया है।

Continue Reading

राष्ट्रीय

बिहार: कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर भाकपा (माले) का शनिवार को चक्का जाम

भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी ने कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं और सरकार तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती है, तब अनिश्चितकालीन सत्याग्रह व चक्का जाम होगा।

Published

on

By

Farmers on Protest

पटना, 4 दिसंबर । केंद्र सरकार के हाल के बनाए गए तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर भाकपा-माले ने पांच दिसंबर को पूरे बिहार में चक्का जाम आंदोलन का निर्णय लिया है। यह चक्का जाम आंदोलन भाकपा-माले, अखिल भारतीय किसान महासभा व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के संयुक्त बैनर तले आयोजित किया जाएगा।

पटना में आयोजित भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी की बैठक में किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन पर हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। बैठक में पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सहित देश के विभिन्न इलाकों से पार्टी के नेता भाग ले रहे हैं।

पार्टी के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने बताया कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 को वापस लेने की मांगों के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिहार में धान खरीद की अविलंब गारंटी करने, 400 प्रति क्विंटल गन्ना खरीद की गारंटी सहित कई मांगें भी हमारे आंदोलन में प्रमुखता से शामिल होंगी।

अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह ने बताया कि सरकार व किसान प्रतिनिधियों से चलने वाली वार्ता के लिए बनी कमेटी में हमारे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूल्दू सिंह भी शामिल हैं और हमारा संगठन मजबूती से इस आंदोलन में उतरा हुआ है।

भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी ने कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं और सरकार तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती है, तब अनिश्चितकालीन सत्याग्रह व चक्का जाम होगा।

Continue Reading

Most Popular