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मथुरा: अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम पर हमला, sp और SHO समेत 14 लोगों की मौत

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मथुरा के जवाहर बाग की बागवानी विभाग की नजदीक 100 एकड़ जमीन पर अवैध कब्‍जे को हटाने पहुंची पुलिस और कब्‍जेधारियों के लिए बीच हुई भिड़ंत में 14 लोगों की मौत हो गई।

इस विवाद में एसपी (सिटी) मुकुल द्विवेदी और थाना प्रभारी संतोष कुमार की भी मौत हो गई। इस हिंसा में कुल 12 अतिक्रमणकारी मारे गए हैं। इस भयानक हिंसक झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए है। शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को 20-20 लाख का रुपए का मुआवजे देने की घोषणा की गई है।

एसपी मुकुल द्वेदी की मां का कहना है कि सीएम उन्हें उनका बेटा वापिस लाकर दें, उन्हें पैसे नहीं चाहिए।

आपको बता दें कि जवाहर बाग इलाके में ये दंगे तब शुरू हुए जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में पुलिस कर्मी, जवाहर बाग में अतिक्रमणकारियों को हटाने की कोशिश कर रहे थे। मिली जानकारी के मुताबिक पथराव आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही संगठन के कार्यकर्ताओं ने किया जिन्होंने अतिक्रमण किया था।

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आईजी (कानून एवं व्यवस्था) एच आर शर्मा ने पीटीआई भाषा को बताया कि करीब 3000 अतिक्रमणकारियों ने पुलिस दल के मौके पर पहुंचने पर उस पर पथराव किया और फिर गोली चलाई। उन्होंने बताया कि जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर गोली चलाई।

अतिक्रमणकारियों की गोलीबारी में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और फाराह पुलिस थाने के प्रभारी संतोष कुमार की मौत हो गई गई।

शहर के नयति अस्पताल के सीईओ एवं क्रिटिकल केयर विभाग के निदेशक डॉ. आरके मणि ने बताया कि द्वेदी की अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। जवाहर बाग में कार्रवाई जारी है। हालांकि आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही गुट के कार्यकर्ताओं को पुलिस, पीएसी और आरएएफ के संयुक्त अभियान द्वारा वहां से खदेड़ दिया गया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए, मृत पुलिस कर्मियों के परिजनों को 20-20 लाख रूपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश भी दिया है। डीएम राजेश कुमार ने बताया कि कार्यकर्ताओं के नेता राम वृक्ष यादव और समूह के सुरक्षा अधिकारी चंदन गौर वहां से अपने हजारों समर्थकों के साथ भाग गए। उन्होंने बताया कि अतिक्रमणकारी पिछले ढाई साल से सरकारी बाग पर अवैध कब्जा किए बैठे थे। उन्हें कई बार नोटिस भी दिया गया है। पिछले दो महीने से उनको वहां से हटाने की पूरी कोशिश की जा रही थी।

wefornews bureau 

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खाने की बुरी आदतों के खिलाफ कोविड-19 दुनिया के लिए एक चेतावनी है: जावडेकर

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Prakash Javadekar

भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कोविड-19 महामारी को दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की घटती उपलब्धता और प्रकृति के अनियमित दोहन के खिलाफ एक चेतावनी बताया है।

संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधिता सम्मेलन में अपने भाषण में जावडेकर ने कहा, कोविड-19 महामारी ने इस तथ्य पर जोर दिया है कि खाने की बुरी आदतें उस प्रणाली को बर्बाद कर रही हैं जिसके दम पर इंसान जिंदा है।

चीन के जंगली जानवरों को भोजन के रूप में बेचने वाले बाजार से कोविड-19 की उत्पत्ति मानी जा रही है।

वैदिक शास्त्र के एक कोट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति रक्षती रक्षिता, यानि कि यदि आप प्रकृति की रक्षा करते हैं, तो प्रकृति आपकी रक्षा करेगी। भारत में अनादिकाल से प्रकृति के संरक्षण के साथ तालमेल बिठाकर जीने की संस्कृति रही है।

जावडेकर ने महात्मा गांधी की अहिंसा और जानवरों की सुरक्षा के लोकाचार को संविधान में शामिल करने के कानूनों का हवाला देते हुए कहा, इन्हीं के चलते धरती के 2.4 प्रतिशत भूभाग वाले भारत में दुनिया की 8 फीसदी प्रजातियां हैं।

मंत्री ने आगे कहा कि पिछले दशक में भारत ने देश के भौगोलिक क्षेत्र में वन क्षेत्र को 25 प्रतिशत तक बढ़ाया है। भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर भूमि की उर्वराशक्ति और वनों की कटाई को बहाल किया जाए। इतना ही नहीं 2022 की समय सीमा से पहले ही बाघों की संख्या दोगुनी हो गई है।

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हाथरस की घटना पर एनएचआरसी ने योगी सरकार को दिया नोटिस

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 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हाथरस में 19 साल की दलित लड़की से हुए सामूहिक दुष्कर्म और बेहरमी से हत्या करने की घटना का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मामला दो समुदायों के बीच का है इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतका के परिवार और गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा दे। सरकार को 4 हफ्तों के अंदर नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है।

डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखने के लिए कहा गया है ताकि शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जा सके और दोषियों को बिना देरी के अदालत द्वारा दंडित किया जा सके।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए मृतका के परिवार के साथ-साथ गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों को भी उचित सुरक्षा दी जाए।

बता दें कि 14 सितंबर को अनुसूचित जाति की 19 वर्षीय लड़की के साथ कथित रूप से दुष्कर्म कर क्रूरता बरती गई थी। पहले उसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और फिर सोमवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसने मंगलवार को दम तोड़ दिया।

महानिरीक्षक पीयूष मोर्डिया ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दुष्कर्म की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने युवती का गला घोंटा था।

उन्होंने कहा कि पीड़िता ने जिन 4 आरोपियों के नाम लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने कथित तौर पर देर रात अंतिम संस्कार कर दिया और इससे राष्ट्रीय आक्रोश फैल गया।

परिवार ने दावा किया कि उन्हें आखिरी बार लड़की का चेहरा देखने और विधि-विधान से दाह संस्कार करने की अनुमति नहीं दी गई। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी ने पीड़िता के पिता से बात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

साथ ही परिवार के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे और एक सदस्य के लिए नौकरी की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है।

आईएएनएस

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अवमानना केस : एक रुपये जुर्माने को प्रशांत भूषण ने SC में दी चुनौती

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Prashant Bhushan

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है। इस याचिका में अदालत की अवमानना को लेकर 31 अगस्त को सुनाए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उन्हें एक रुपये का जुर्माना लगाने के निर्णय पर समीक्षा करने की मांग की गई है। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने अपने फैसले में प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना का दोषी करार दिया था। प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायधीश एस ए बोबडे की आलोचना करते हुए दो ट्वीट किए। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 31 अगस्त को सजा के रुप में एक रुपये का जुर्माने लगाया था। 

बता दें कि, 22 जून को वरिष्ठ वकील ने अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे और चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद 27 जून के ट्वीट में प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के छह साल के कामकाज को लेकर टिप्पणी की थी। इन ट्वीट्स पर स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।

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