राष्ट्रीयमुख्य सचिव को बंगाल में वापस बुलाना चाहती हैं ममता, केंद्र से किया अनुरोध

IANSMay 30, 202162 min

कोलकाता | केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (सेंट्रल डेपुटेशन) पर वापस बुलाए जाने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि यह निर्णय केंद्र के राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है।

बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्र वापस लेने और खासकर बंगाल में चल रहे कोविड संकट और चक्रवात के बाद की स्थिति के मद्देनजर बंदोपाध्याय को राज्य के लिए काम करना जारी रखने की अनुमति देने का भी आग्रह किया।

बनर्जी ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, उनकी (अलपन बंदोपाध्याय) क्या गलती है? मुख्य सचिव होने के नाते, मेरी सहायता करना उनका कर्तव्य है। उन्हें मेरे खिलाफ बहुत सारी शिकायतें हो सकती हैं और वे अलग-अलग तरीकों से मेरा अपमान कर रहे हैं। मैंने इसे स्वीकार कर लिया है, लेकिन उन्हें (बंदोपाध्याय) क्यों पीड़ित किया जा रहा है? वह ईमानदार हैं और चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री से पत्र वापस लेने और उन्हें काम करने की अनुमति देने का आग्रह करती हूं।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री के साथ बैठक की घटना का जिक्र कर रहीं थीं और इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बदले की भावना से प्रतिक्रिया कर रही है।

प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान और बाद की घटनाओं का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा, मुझे गुरुवार की देर शाम प्रधानमंत्री के साथ अपनी बैठक के बारे में पता चला, लेकिन उस समय तक मैंने अपना कार्यक्रम तय कर लिया था। फिर भी जब प्रधानमंत्री आ रहे थे, उनसे मिलना मेरा शिष्टाचार था और इसलिए मैंने प्रधानमंत्री से कुछ समय मांगा और मुझे अनुमति दी गई।

बनर्जी ने कहा, मुझे कलाईकुंडा पहुंचने के लिए अपना कार्यक्रम छोटा करना पड़ा, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण मुझे 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। फिर हमें बताया गया कि समीक्षा बैठक शुरू हो गई है और मुझे एक घंटे तक इंतजार करना होगा, लेकिन हमने उनसे अनुरोध किया कि हमें केवल एक मिनट का समय दें, ताकि हम अपना अनुमानित नुकसान (चक्रवात के कारण) प्रधानमंत्री को सौंप सकें, लेकिन वे अनिच्छुक थे। इसलिए मैंने बैठक कक्ष में प्रवेश किया और अनुमान प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दीघा के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुमति मांगी थी।

उन्होंने कहा, हमारी गलती कहां है और मुख्य सचिव को इसका शिकार क्यों होना चाहिए? निर्णय लेने से पहले राज्य से सलाह तक नहीं ली गई। वे हमेशा हमारे लिए समस्याएं पैदा करते रहे हैं। यह सही नहीं है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस समय मुख्य सचिव को कार्यमुक्त करने की संभावना कम ही है।

यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य अदालत का रुख करेगा, बनर्जी ने कहा, उन्होंने अदालत और सीएटी (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) में एक कैविएट दायर किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि वे अदालत का रुख करेंगे। हम बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान करना चाहते हैं और इसलिए मुझे लगता है कि केंद्र समझेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार हमेशा टकराव के मूड में रहती है, क्योंकि वह हार को पचा नहीं पा रही है।

यह आरोप लगाते हुए कि वह (केंद्र) हर चीज में राजनीति कर रहा है, बनर्जी ने कहा, शुरूआत में, यह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच एक बैठक थी, लेकिन फिर इसे संशोधित किया गया। प्रधानमंत्री गुजरात और ओडिशा गए, लेकिन वहां विपक्षी नेता आमंत्रित नहीं थे।

उन्होंने कहा, यहां तक कि जब वह पिछले साल अम्फान के दौरान एक सर्वेक्षण करने आए थे, तब भी विपक्ष के नेता को आमंत्रित नहीं किया गया था। तो इस बार क्यों? समीक्षा बैठक एक तरह से भाजपा नेताओं की बैठक बन गई है, जहां मैं अकेला रहती हूं।

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार हर कदम पर उनका अपमान करने के लिए सब कुछ कर रही है।

ममता ने कहा, मैं राज्य के लोगों के लिए कुछ भी कर सकती हूं और अगर प्रधानमंत्री चाहते हैं कि मैं उनके पैर छूने को भी तैयार हूं। मैं लोगों के लाभ के लिए ऐसा करने के लिए भी तैयार हूं। ममता ने केंद्र पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि वह लगातार विभिन्न समाचार चैनलों और मीडिया हाउस के माध्यम से गलत जानकारी और प्रचार कर रहे हैं।

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