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माल्या की तरह जेपी ग्रुप ने भी डकार लिए 4,460 करोड़ रुपए

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किगं ऑफ बेड टाइम्स विजय माल्या पर बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की वापसी को लेकर जारी मशक्कत के बीच एक दूसरे समूह पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे जेपी समूह की कंपनियों ने करीब 4,460 करोड़ रुपये के कर्ज और बाकी भुगतान में चूक या डिफॉल्ट किया है। एकीकृत आधार पर जेपी समूह बैंकों को 2,905.6 करोड़ रुपये की मूल राशि तथा बाकी 1,558.93 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान करने में नाकाम रहा है।

समूह द्वारा किए गए ताजा खुलासे के मुताबिक 31 मार्च, 2016 तक कर्ज के भुगतान में एक से लेकर 269 दिन की देरी हो रही थी। इसमें से जयप्रकाश एसोसिएट्स पर 2,183.17 करोड़ रुपये, जयप्रकाश पावर वेंचर्स पर 688.48 करोड़ रुपए तथा जेपी सीमेंट पर 33.95 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया था।

शेयर बाजारों को सोपी गई सूचना में समूह ने कहा है कि इस दौरान जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कर्ज के ब्याज का 837.45 करोड़ रुपये, जयप्रकाश पावर वेंचर्स पर 152.18 करोड़ रुपये तथा जेपी सीमेंट कॉरपोरेशन पर 63.13 करोड़ रुपये का ब्याज बकाया था।

साथ ही जेपी इन्फ्राटेक पर 193.08 करोड़ रुपये, जेपी आगरा विकास पर 3.01 करोड़ रुपये, प्रयागराज पावर जेनरेशन पर 308.66 करोड़ रुपए तथा मध्य प्रदेश जेपी मिनरल्स पर 75 हजार रुपये तथा भिलाई जेपी सीमेंट पर 67 हजार रुपये का ब्याज बकाया था।

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दिल्ली में कोरोना के 1984 नए केस, 37 की मौत

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दिल्ली में कोरोना का कहर थोड़ा कम होता द‍िख रहा है। पिछले यहां सक्रि‍य मामलों की संख्या अब 10 फीसदी से भी कम हो गई है।

पिछले 24 घंटे में यहां 1984 नए मरीज सामने आए जिसके बाद संक्रमितों का कुल आंकड़ा बढ़कर 2,73,098 हो गया। वहीं 37 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5272 हो गई। पिछले 24 घंटे में 4052 लोग ठीक भी हुए जिन्हें मिलाकर अब तक कुल 2,40,703 लोग ठीक हो चुके हैं।

बता दें  देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 60,74,702 हो गए है। वहीं संक्रमण से 1,039 और मरीजों की मौत होने से देश में मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 95,542 हुई। भारत में कोविड-19 के 9,62,640 मरीजों का इलाज रहा है। अब तक 50,16,520 लोग ठीक हो चुके हैं।

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CAPF के दिव्यांग जवानों और शहीदों के आश्रितों को ‘सैन्य कर्मियों’ की तर्ज पर केरल सरकार देगी पक्की नौकरी

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Jammu and Kashmir Shopian Indian Army

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के दिव्यांग जवानों या किसी ऑपरेशन में शहीद हुए कर्मियों के आश्रितों को केरल सरकार ‘सैन्य कर्मियों’ की तर्ज पर सरकारी नौकरी देगी। अभी तक केरल में डिफेंस पर्सनल और बीआरओ की जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (ग्रीफ) के लिए ही सरकारी नौकरी दिए जाने का प्रावधान रखा गया था। केरल सरकार के आदेशों के अनुसार, अब सीएपीएफ ‘बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी और असम राइफल’ को भी सरकारी नौकरी वाली योजना का हिस्सा बनाया गया है।

दिव्यांग या शहीदों के परिजनों को जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के पास नौकरी का आवेदन देना होगा। दस्तावेजों की सूची में मेडिकल प्रमाण पत्र के अलावा संबंधित फोर्स के डीजी का सहमति पत्र और वह डॉक्यूमेंट भी अटैच करना होगा, जिसमें उसके दिव्यांग होने का कारण लिखा रहेगा।

यानी इसमें ऑपरेशन जैसे घात, एनकाउंटर व गन बैटल आदि की जानकारी से संबंधित कागजात लगाए जाएंगे। इस योजना को सात जून 2019 से लागू माना जाएगा। इस तिथि को या उसके बाद जो भी दिव्यांग या शहीद का आश्रित सभी औपचारिकताएं पूरी कर नौकरी का आवेदन देगा, उसे सरकारी नौकरी दे दी जाएगी।

केरल सरकार के आदेशों के अनुसार, राज्य में अभी तक डिफेंस और जीआरइएफ वालों को ही सरकारी नौकरी मिलती थी। इसमें बीएसएफ को भी शामिल किया गया था, लेकिन उसके लिए सैन्य ड्यूटी जैसी कई शर्तें लागू की गई थीं। योजना में यह प्रावधान किया गया था कि सेना या जीआरइएफ का कोई भी कर्मी यदि सैन्यू ड्यूटी के दौरान मारा जाता है, दिव्यांग हो जाता है या वह लापता होता है तो उस स्थिति में सरकारी मदद की जाती है।

अब वे सभी प्रावधान सीएपीएफ के लिए भी लागू कर दिए गए हैं। संबंधित कर्मी को अपने दिव्यांग होने या शहीद के आश्रितों को बल के डीजी द्वारा हस्ताक्षरित डिक्लेयर प्रमाण पत्र अपने आवेदन के साथ लगाना होगा। अन्य औपचारिकताओं में कर्मी का 50 फीसदी से अधिक दिव्यांग वाली स्थिति का मेडिकल प्रमाण पत्र देना जरूरी होगा।

साथ ही दस्तावेजों में मेडिकल बोर्ड का वह प्रमाण पत्र, जिसमें उसे सिविल जॉब के लिए अयोग्य दिखाया गया हो, शामिल रहेगा। अगर जॉब के लिए दिव्यांग ने आवेदन दिया है, तो उसे स्वयं मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना पड़ेगा। दिव्यांग पेंशन के दस्तावेज भी जमा कराने होंगे।

केरल सरकार द्वारा यह नौकरी, उन्हें दी जाएगी, जिनके पास केरल का जन्म प्रमाण पत्र और डोमिसाइल प्रमाण पत्र होगा। नौकरी के लिए योग्यताएं वही रहेंगी, जो सेना के कर्मियों के लिए तय की गई हैं। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के पास आवेदन देना होगा। वहां से आवेदन को निदेशक के पास भेजा जाएगा। निदेशक उसे सरकार के पास भेजेगा। अन्य दस्तावेजों में पीपीओ, आयु व शैक्षणिक योग्यता वाले प्रमाण पत्र, ऑपरेशन केजुअल्टी प्रमाण पत्र, आवेदक के स्थानीय निवासी होने का तहसीलदार से जारी प्रमाण पत्र और यदि आश्रित किसी अन्य को नौकरी दिलाना चाहता है तो उसके लिए सहमति पत्र देना होगा।

सरकारी नौकरी केवल एक ही व्यक्ति को मिलेगी। नौकरी मिलने के बाद अगर किसी आवेदक को उसकी पसंद का जिला नहीं मिलता है तो यह प्रयास किया जाएगा कि जल्द से जल्द उसका तबादला संबंधित जिले में कर दिया जाए। आवेदन के साथ अटैच दस्तावेजों में कोई गलती मिली तो नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।

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मोइन कुरैशी मामले में 3 पूर्व प्रमुखों से पूछताछ न करने पर सीबीआई की खिंचाई

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नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ कथित रिश्वत मामले के सिलसिले में पूर्व सीबीआई निदेशकों रंजीत सिन्हा, ए.पी. सिंह और आलोक वर्मा से पूछताछ नहीं किए जाने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की खिंचाई की।

अक्टूबर, 2018 में तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता, सतीश बाबू सना ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मोइन कुरैशी मामले की जांच में किसी भी कार्रवाई को नहीं करने के लिए अस्थाना को 2 करोड़ रुपये रिश्वत दी थी।

एक चार्जशीट के अनुसार, कुरैशी सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में था। उसने विभिन्न व्यक्तियों से या तो सीधे या अपने एजेंटों के माध्यम से, जैसे कि सतीश बाबू सना के रूप में, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामलों को प्रभावित करने के लिए धन एकत्र किया।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने एजेंसी के सामने छह सवाल रखे। एक सवाल में, उन्होंने पूछा कि वह उसने अपने पूर्व-निर्देशकों में से दो की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ क्यों नहीं की। इससे लगता है कि एजेंसी उनके खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने के प्रति बहुत उत्सुक नहीं है।

अदालत ने कहा, “यह स्पष्ट है कि इस मामले में, इसके पूर्व-निदेशकों में से दो की भूमिका जांच के तहत है, जो कथित बिचौलिए मोइन अख्तर कुरैशी के साथ एपी सिंह और रंजीत सिन्हा हैं, मामले को खुले, ईमानदारी के साथ जांच की जाचने की जरूरत है।”

विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने सीबीआई से कहा कि भारत की प्रमुख जांच एजेंसी के रूप में इसकी प्रतिष्ठित छवि है। हालांकि, साथ ही इसे प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए अपने दो शीर्ष पूर्व-माननीयों के खिलाफ आरोपों की जांच को बढ़ाना होगा।

एक अन्य सवाल में, अदालत ने पूछा कि क्या मोइन कुरैशी मामले से जुड़े सीबीआई के एक अन्य पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

इसने यह भी पूछा कि सीबीआई ने संभावित संदिग्धों की खोज और हिरासत में पूछताछ जैसे जांच के तरीकों का इस्तेमाल करके जांच को तार्किक अंत तक क्यों नहीं लाया।

कोर्ट ने पूछा कि ए.पी. सिंह की इस मामले में जांच क्यों नहीं हुई? यदि कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी जा सकती है, तो क्या इसका मतलब यह है कि जांच अनिश्चितकाल के लिए चलेगी, ताकि एफआईआर खुद ही खत्म हो जाए?

अदालत ने 27 अक्टूबर, 2020 तक इन सवालों पर सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जब इस मामले पर आगे सुनवाई होगी।

इसके अलावा, सीबीआई ने उन 9 सवालों के जवाब भी दिए, जो न्यायाधीश ने पहले पूछे थे। एजेंसी ने अदालत को अवगत कराया कि मामले के संबंध में अब तक 544 दस्तावेज एकत्र किए गए हैं और 63 गवाहों की जांच की गई है।

यह पूछे जाने पर कि लोक सेवकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, जिनके लिए कुरैशी कथित रूप से एक बिचौलिया के रूप में काम कर रहा था तो एजेंसी ने कहा कि जांच की जा रही है और ऐसे लोक सेवकों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी ने अदालत को आगे बताया कि इस मामले के संबंध में कई सीबीआई अधिकारियों की जांच की गई है, जिसमें आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के कुछ लोक सेवक भी शामिल हैं।

–आईएएनएस

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