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लाइफस्टाइल

इन सात अदाओं से बनाएं लड़कों को दीवाना

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लड़कों

लड़कों को अट्रैक्ट करना लड़कियों के लिए कोई बड़ी बात नहीं हैं ऐसी बहुत सारी चीजें होती हैं, जिनसे महिलाएं आसानी से पुरुषों को अपना दीवाना बना सकती हैं। अगर आप भी किसी के साथ रिलेशनशिप की शुरुआत करने के बहाने ढूंढ रही हैं, इन टिप्स को अपनाएं। पुरुष खुद-ब-खुद आपसे बातचीत की शुरुआत करेंगे।

सादगी

पुरुष भले ही महिलाओं के आंखों के काजल से होंठों की लिपस्टिक तक और वैक्सड हेयर से लेकर नेलपेंट लगाए हुए नेल्स को नोटिस करते हैं। लेकिन असलियत में उन्हें सादगी पसंद महिलाएं ही भाती हैं। वेल ड्रेस और मेकअप काफी हद तक उन्हें आपकी पर्सनैलिटी के बारे में आइडिया दिता है। लेकिन दूसरी ओर पुरुषों की नजरों में ये सारी चीजें फेक पर्सनैलिटी को डिफाइन करती हैं।

स्टाइलिश

पुरुषों को अट्रैक्ट करने का तरीका थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन उन्हें बहुत ही अच्छा लगता है कि महिलाओं के वेल मेंटेन ड्रेस में उनकी थोड़ी-सी बॉडी दिखती रहे। जीन्स और टॉप के बीच की फाइन लाइन, ब्रॉड नेक टॉप, स्कर्ट्स वाली महिलाएं हमेशा से पुरुषों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रही हैं।

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नॉलेज होना

ज्यादा पुरुषों को पॉलिटिक्स, टेक और ऐसे किसी सब्जेक्ट पर डिस्कशन करना पसंद हैं, जिससे कुछ नॉलेज मिलती हैं। वहीं, महिलाओं को शॉपिंग और गॉसिप्स पसंद होती है। अगर आपको पुरुषों की गुड लिस्ट में शामिल होना है, तो थोड़ा नॉलेजेबल बनना होगा।

अच्छी आवाज
महिलाएं पुरुषों को अपनी आवाज से भी अपना दीवाना बना सकती हैं। सिडक्टिव आवाज वाली महिलाएं पुरुषों की टॉप लिस्ट में शामिल होती हैं। बहुत तेज और कर्कश आवाज वाली महिलाओं को दोस्ती तक ही झेल सकते हैं उनके साथ रिलेशनशिप में पड़ने से वो कतराते हैं। साथ ही, बातों को कहने का अलग तरीका, उनका एक्सेंट भी पुरुषों को बहुत भाता है।

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मटीरियल गिफ्ट

फ्लर्ट नेचर

महिलाएं फ्लर्ट करना कम ही पसंद करती हैं ये जिम्मेदारी पुरुषों के ऊपर ही होती है। लेकिन आप किसी पुरुष के साथ रिलेशनशिप की शुरुआत करना चाहती हैं तो थोड़ा-सा फ्लर्टी बनना पड़ेगा। महिलाओं का फ्लर्टी नेचर बहुत पसंद आता है इससे वो आसानी से आपकी ओर अट्रैक्ट हो जाएंगे।

मदद मांगना

महिलाएं पुरुषों को अपनी ओर अट्रैक्ट करने के लिए हेल्प ले सकती हैं। ये हेल्प एक पेन मांगने से लेकर लिफ्ट मांगने तक कुछ भी हो सकती है। दरअसल पुरुषों को हीमैन बनना बहुत अच्छा लगता है खासतौर से महिलाओं के सामने। तो आप किसी पुरुष को अट्रैक्ट करना चाहती हैं, तो किसी संकोच के उनसे हेल्प मांगें।

 

फीलिंग्स समझना

पुरुषों को अपना दीवाना बनाने के लिए जरूरी कदम उनकी फिलिंग्स को समझना भी है। संकोची स्वभाव होने के कारण पुरुष बहुत ही बातों को जाहिर नहीं कर पाते। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों के इशारे आपसे बहुत कुछ कहना चाहते हैं, जिसे खामोशी से समझने की जरूरत है।

ब्लॉग

लौंगी भुइंया से दशरथ मांझी बनने की पूरी कहानी

लौंगी भुइंया के साथ के लोग शायद अब उनके साथ न हों पर आने वाली उस गाँव की पीढ़ी “लौंगी भुइंया” का हमेशा शुक्रगुज़ार रहेगी।

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Longi Bhuiyan

अभी हाल ही में महामारी के दौरान आप सभी को पता लगा… की लोग शहर छोड़ अपने-अपने गाँव लौट रहे है। और उनमें जो मजदूर थे वो ज़्यादातर बिहार से ताल्लुक रखते थे। ख़ैर ये तो बात थी उनके लौटने की।उनके अपने गाँव छोड़ शहर जाने की कहानी भी बहुत लम्बी है …पर उसके बारे में बात फिर कभी।

फिलहाल उन्हीं लम्बी कहानियों में से एक कहानी हैं, बिहार के “गया” ज़िले की राजधानी पटना से 200 किमी दूर बांकेबाज़ार प्रखंड की कहानी हैं।

यहाँ पर रहने वाले लोगों की ज़िन्दगी खेती पर ही निर्भर हैं और खेती निर्भर है पानी पर… यानी सिंचाई पर। और यहीं से शुरू होती है यहाँ पर रहने वाले लोगों के संघर्ष की कहानी।

यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। मगर धान और गेहूं की खेती के लिए जो पानी उन्हें चाहिए था उस पानी और वहाँ रहने वालों के बीच जो सबसे बड़ा रोड़ा था वो था एक “पहाड़” ।

और यहीं से शुरू होती है देश के दूसरे दशरथ मांझी लौंगी भुइंया की कहानी।

पानी की किल्लत की वजह से वहां से लोगों का पलायन शुरू हुआ, और पलायन का असर उनके घर तक आ पहुंचा।

यहाँ तक की उनके खुद के बेटों ने भी वो गाँव छोड़ दिया। फिर एक दिन हुआ यूँ की लौंगी भुइंया उसी पहाड़ पर बकरी चरा रहे थे की अचानक उनको ख्याल आया की अगर ये पहाड़ तोड़ दिया जाए तो पलायन रुक सकता है।

उस दिन उस ख्याल ने उन्हें ढंग से सोने नहीं दिया। उनकी पत्नी ने भी उनसे कहा की…. ये तुमसे नहीं हो पायेगा । पर लौंगी भुइंया को अपनी ज़िद्द के आगे कुछ समझ नहीं आया।
फिर क्या था…. फावड़ा उठाया और चल दिया पहाड़ तोड़ने।

30 साल अकेले फावड़े और दूसरे औज़ारों से उन्होंने आज 3 किमी लम्बी नहर खोद डाली और पानी गाँव तक पहुंचा दिया। इस साल पहली बार उनके गाँव तक बारिश का पानी पहुंचा और इसी वजह से आसपास के तीन गाँव के किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा हैं। लोगों ने इस बार धान की फसल भी उगाई है। पर अफ़सोस की अब तक गाँव के कई लोग दूसरे शहरों में पलायन कर चुके हैं।

लौंगी भुइंया के साथ के लोग शायद अब उनके साथ न हों पर आने वाली उस गाँव की पीढ़ी “लौंगी भुइंया” का हमेशा शुक्रगुज़ार रहेगी।

लौंगी भुइंया कहते हैं “हम एक बार मन बना लेते हैं तो पीछे नहीं हटते। अपने काम से जब फुर्सत मिलता हम नहर काटने में लग जाते।

हमारी पत्नी कहती थी की तुमसे नहीं हो पायेगा…. लेकिन मुझे लगता था की हो जायेगा।

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राष्ट्रीय

कोरोना मामलों में वृद्धि के बीच 188 दिन बाद खुला ताजमहल

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Taj mahal

महामारी के कारण 188 दिनों तक बंद रहने के बाद प्रेम का प्रतीक, 17वीं सदी का स्मारक ताजमहल आगंतुकों के लिए फिर से खोल दिया गया। हालांकि आगरा में कोविड-19 के 144 नए मामले सामने आए हैं, जिसने जिला प्रशासन के लिए परेशानी बढ़ा दी है।

एएसआई के अधिकारियों ने सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों के साथ स्मारक के परिसर की सामाजिक दूरी, मास्क पहनने और स्वच्छता से संबंधित दिशानिदेशरें का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया। एक गाइड ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बिक्री ने आगंतुकों की उचित स्क्रीनिंग सुनिश्चित की है।

स्मारक के खुलने से स्थानीय पर्यटन उद्योग के लोग उत्साहित हैं और आने वाले महीनों में इस क्षेत्र के पुनरुद्धार की उम्मीद कर रहे हैं।

जिला मजिस्ट्रेट पी. एन. सिंह ने कहा कि सभी सावधानियां बरती गई हैं और कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

हालांकि अभी तक एडवांस में होटल बुकिंग को लेकर प्रतिक्रिया इतनी उत्साहजनक नहीं हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा और अगर सारी चीजें बिना किसी परेशानी के चलती रहेंगी, तो आगरा में दर्शकों की संख्या बढ़ सकती है। होटल व्यवसायियों को उम्मीद है कि आगरा को प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली कुछ नई उड़ानें पर्यटकों को यहां आने के लिए प्रेरित करेंगी।

पिछले 24 घंटों में यहां कोरोनावायरस के 144 नए मामलों का पता चला, जिसके साथ संक्रमण की कुल संख्या 4,850 हो गई। अब तक 3,852 लोग इससे उबर चुके हैं। मरने वालों की संख्या 118 है, जबकि सक्रिय रोगियों की संख्या 880 है।

जिला अधिकारियों ने कोविड रोगियों को एडमिट करने के लिए निजी क्षेत्र में नौ एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) अप्रूव्ड अस्पतालों को अनुमति दी है, क्योंकि विशेषज्ञों को डर है कि आने वाले दिनों में 1000 बेड की आवश्यकता हो सकती है। वहीं भारतीय रेलवे के विशेष रूप से डिजाइन किए गए कोविड कोच बिना उपयोग के यार्ड में पड़े हुए हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि 26 आइसोलेशन कोच तैयार हैं और अगर प्रशासन चाहे तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस बीच पिछले कुछ दिनों में मांग बढ़ने के बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति काफी हद तक बहाल कर दी गई है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि मरीजों को सलाह दी गई है कि वे एक ऐप के माध्यम से अपना टेस्ट रिपोर्ट ऑनलाइन एकत्र करें।

वहीं आगरा में विशेषज्ञों ने कहा कि, कुछ दिनों में आईसीएमआर द्वारा देशभर में किए गए सीरो सर्वे के निष्कर्षों के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

एस.एन.मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने कहा, “सामाजिक संपर्क के अधिक अवसर और सख्ती में दिए गए ढील के साथ लोगों को दिशानिदेशरें का पालन करने में बहुत सावधानी बरतनी थी।”

एक अधिकारी ने संकेत दिया कि मंदिर और स्कूल 1 अक्टूबर से पहले नहीं खुलेंगे।

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लाइफस्टाइल

बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्या

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Children

 कोरोना महामारी के चलते स्कूल वगैरह बंद हैं, ऐसे में पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज और बाहर ज्यादा न निकलने की अवस्था में गेमिंग में बच्चे अपना अधिक समय बिता रहे हैं और इन सारी चीजों का प्रभाव उनकी आंखों पर पड़ रहा है।

मोटे तौर पर, हाल के सप्ताहों में करीब 40 प्रतिशत बच्चों में आंखों व देखने की तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ अनिल रस्तोगी के मुताबिक, इनमें से अधिकतर बच्चों में अभिसरण अपर्याप्तता की समस्या देखी गई – यह एक ऐसी अवस्था है, जहां निकट स्थित किसी चीज को देखने के दौरान आंखें एक साथ काम करने में असक्षम रहती हैं। इस स्थिति के चलते एक आंख के अंदर रहने के दौरान दूसरी बाहर की ओर निकल आती है, जिससे चीजें या तो दो या धुंधली लगती हैं।

उन्होंने आगे कहा, बच्चे कंप्यूटर के आगे लंबे समय तक बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं जिससे आंखों में खुजली और जलन की समस्या पैदा हो जाती है, ध्यान लगाने में परेशानी होती है, सिर दुखता है, आंखों में दर्द होता है।

नेत्र विशेषज्ञ शिखा गुप्ता भी यही कहती हैं कि लॉकडाउन के चलते बच्चे आठ से दस घंटे तक का समय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में बिताते हैं। वे या तो ऑनलाइन क्लासेज कर रहे हैं या कार्टून देख रहे हैं या वीडियो गेम्स खेल रहे हैं। माता-पिता को लगता है कि यह उन्हें व्यस्त रखने का सबसे बेहतर तरीका है, लेकिन इतना ज्यादा वक्त इलेक्ट्रॉनिकडिवाइस में बिताने से आंखों को नुकसान पहुंचता है।

इनसे बचने के लिए डॉक्टर्स का सुझाव है कि आंखों की एक्सरसाइज पर ध्यान दें, टीवी/कंप्यूटर/मोबाइल फोन के स्क्रीन से कुछ-कुछ देर का ब्रेक लेते रहें, ताकि आंखों की अच्छी सेहत बरकरार रखी जा सकें।

आईएएनएस

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