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महाराष्ट्र में बीफ खाना जुर्म नहीं, लेकिन गौहत्या पर बैन जारी

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महाराष्ट्र में बीफ खाना जुर्म नहीं

महाराष्ट्र में गोमांस यानी बीफ पर लगा बैन आगे भी जारी रहेगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के बीफ बैन करने के फैसले को कायम रखा है। हालांकि हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट के उस सेक्शन को रद्द कर दिया है जिसमें राज्य के बाहर से गोमांस आयात करने पर भी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान था।

आपको बता दें कि कोर्ट के फैसले के मुताबिक राज्य में गाय और बैल को काटने पर लगाई गई राज्य सरकार की पाबंदी जारी रहेगी लेकिन बीफ का व्यापार (अगर महाराष्ट्र से बाहर से लाया जाता है, जिन राज्यों में इसकी इजाजत है) तो वो अपराध की श्रेणी में नहीं होगा। हालांकि दूसरे राज्यों से आनेवाले व्यापारियों के पास बीफ के पूरे लीगल दस्तावेज होने चाहिए।

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बीते साल लगाया गया था बैन

बीते साल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महाराष्ट्र एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट को अपनी मंजूरी दी थी। जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने फरवरी 2015 में राज्य में गोमांस पर बैन लगाया था। हालांकि राज्य में 1976 से ही गौहत्या पर रोक लगाया है, लेकिन एक्ट में संशोधन कर के राज्य में गोमांस खाने और रखने पर भी बैन लगाया गया था।

गौहत्या के आरोपी 5 साल की सजा

नए संशोधन के मुताबिक अगर किसी को गौहत्या का आरोपी पाया जाता है तो उसे पांच साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने के तौर पर भरने होंगे। वहीं गोमांस रखने के आरोपी पाए जाने पर 1 साल की सजा और 2 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा। गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले से बुचर एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है और हाईकोर्ट में अपील भी की थी क्योंकि इससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा था।

wefornews bureau 

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पंजाब के मुख्यमंत्री ने शहरी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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Amarinder Singh

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को राज्य के सभी 167 कस्बों और शहरों में 700 करोड़ रुपये के खर्च के साथ विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लंबित वैट आकलन के लिए एकमुश्त निपटान योजना की घोषणा के साथ 11,000 करोड़ रुपये के शहरी पर्यावरण सुधार कार्यक्रम (यूईआईपी) का चरण दो शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं को वर्चुअल तरीके से लॉन्च करते हुए कहा कि आबकारी और कराधान विभाग जल्द ही इस योजना को अधिसूचित करेगा, जिसे उनकी सरकार ने उन व्यवसायों की चिंताओं के मद्देनजर शुरू करने का फैसला किया है, जो उनके मूल्य वर्धित कर (वैट) आकलन और शिकायतों से संबंधित मुद्दों का तेजी से निवारण नहीं हो पाया।

यह देखते हुए कि शहर आर्थिक गतिविधि के केंद्र भी हैं, इसलिए व्यापार और उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाना आवश्यक है, उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने उद्योगों और कराधान विभागों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उपयोगकर्ता, उद्योग और व्यापारियों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में जाने की जरूरत न पड़े।

अमरिंदर सिंह ने शहरों की सफाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया और सभी शहरों से घरेलू ठोस कचरे को अलग करने का आग्रह किया।

उन्होंने भारत सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए नवांशहर की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यूईआईपी योजनाएं, जिनके तहत पहले चरण में 3,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं, राज्य को शहरों के बुनियादी ढांचे और इसके निवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार करने में मदद करेंगी।

940 स्थानों पर 45,000 से अधिक लोगों से डिजिटल रूप से जुड़े मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुए वित्तीय संकट के बावजूद इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने में कामयाबी मिली है।

यह देखते हुए कि पंजाब की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है, जिन्हें आमतौर पर विकास के इंजन के रूप में माना जाता है, अमरिंदर सिंह ने कहा कि परियोजनाएं शहरों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के अनुरूप हैं।

आईएएनएस

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31 दिसंबर तक बढ़ी आयकर रिटर्न भरने की तारीख

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कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं को राहत देते हुए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया है। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए वित्त वर्ष 2019-20 का आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा बढ़कर 31 दिसंबर 2020 हो गई है। वित्त मंत्रालय ने इसकी घोषणा की।

इस संदर्भ में मंत्रालय ने कहा कि जिन करदाताओं के खाताओं की ऑडिट करने की जरूरत है, उनके लिए आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा दो महीने बढ़ाकर 31 जनवरी 2021 कर दी गई है।

सरकार ने इससे पहले मई में भी करदाताओं को अनुपालन में राहत देते हुए वित्त वर्ष 2019-20 के आईटीआर भरने की समयसीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी थी।

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गुपकर नेताओं संग बैठक के बाद बोले अब्दुल्ला, राज्य के लोगों की अधिकार बहाली हमारा लक्ष्य

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जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर स्थित महबूबा मुफ्ती के आवास पर शनिवार को एक बार फिर पीपुल्स एलायंस के सदस्यों ने मिलकर गुपकार समझौते पर बैठक की। इस बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के घर पर गुपकर घोषणा में शामिल नेताओं की बैठक के बाद फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि यह कोई राष्ट्र-विरोधी जमात नहीं है।

हमारा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के अधिकारों को बहाल कराना है। हमें धर्म के नाम पर विभाजित करने के प्रयास विफल होंगे। यह कोई धार्मिक लड़ाई नहीं है।

पिपुल्स एलायंस गुपकार समझौते की बैठक के बाद नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम भाजपा के विरोध में हैं, देश के नहीं।

‘पिपुल्स एलायंस गुपकार समझौते’ की बैठक के बाद सज्जाद लोन ने बताया कि फारूक अब्दुल्ला इस समिति के अध्यक्ष होंगे और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती उपाध्यक्ष होंगी। इस संबंध में अगले एक महीने के अंदर दस्तावेज भी तैयार कर लिए जाएंगे। इनके माध्यम से हम उन तथ्यों को सामने लाएंगे जिनका झूठा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इससे पहले 15 अक्तूबर को भी नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूख अब्दुल्ला के घर पर प्रदेश के कई दलों के नेताओं ने बैठक की थी। इसमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस एवं अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे।

करीब दो घंटे तक चली उस बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि सभी पार्टियों ने इस समझौते का नाम गुपकार से बदलकर ‘पीपुल एलायंस गुपकार समझौता’ करने पर आम सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान राजनीतिक है। आगे की रणनीति के लिए हम फिर बैठक करेंगे।

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