जिले भर में कई लेयर की सुरक्षा के तैनात करने के बावजूद, हरियाणा के कई किसान करनाल में किसान महापंचायत में भाग लेने के लिए नई अनाज मंडी में जमा हुए हैं। बाइक, ट्रैक्टर और परिवहन के अन्य साधनों पर कई लोगों के आने से मौके पर किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। किसानों ने कहा कि उन्हें रोकने के लिए कितनी भी भारी सुरक्षा तैनात की जाए, वे किसी भी कीमत पर करनाल पहुंचेंगे।

करनाल के एक किसान ने कहा, “हरियाणा के किसान चीन की दीवार भी तोड़ सकते हैं। चार बार हरियाणा के किसानों को पुलिस ने पीटा, लेकिन राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्हें किसानों की बात सुननी है।”

28 अगस्त को हुई लाठीचार्ज की घटना को लेकर किसानों ने हरियाणा के मिनी सचिवालय का घेराव करने की योजना बनाई है, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे। मंडी पहुंचे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बैठक में मिनी सचिवालय के घेराव पर फैसला लिया जाएगा।

टिकैत ने आईएएनएस से कहा, “सचिवालय के घेराव पर किसानों की सभा तय करेगी। अभी हमारे लिए यह अनाज मंडी सचिवालय है। हम इस मुद्दे पर आगे का फैसला महापंचायत में लेंगे।”

अन्य किसान नेता भी अलग-अलग समूहों में मौके पर पहुंचने लगे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य ने कुछ नहीं किया है, लेकिन पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज करने की अनुमति दी है।

करनाल की किसान महापंचायत की दो मुख्य मांगें हैं- किसानों पर लाठीचार्ज करने का आदेश देने वाले आईएएस अधिकारी को निलंबित करना और जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है।

किसान यूनियनों ने घरुंडा के किसान सुशील काजल के परिजनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है।

–आईएएनएस

 

 

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