लोक सभा में सोमवार को केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले को लेकर सांसदों को मिले कोटे का मुद्दा जोर-शोर से उठा। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगर सदन चाहे तो सांसदों को मिले 10 एडमिशन के कोटे को खत्म किया जा सकता है, ताकि केंद्रीय विद्यालय में दाखिले को लेकर सभी को समान अवसर मिल सके।

 

दरअसल, सोमवार को कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सांसदों को 10 बच्चों के दाखिले को लेकर मिले कोटे को अपर्याप्त बताते हुए सरकार से मांग की कि या तो इस कोटे को बढ़ाकर 50 कर दिया जाए या फिर पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक सांसद के संसदीय क्षेत्र में 35-40 लाख लोग रहते हैं और एक सांसद 15-20 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है । ऐसे में सिर्फ 10 दाखिले के कोटे से सांसद क्षेत्र के लोगों को तो छोड़िए अपने विधायकों तक को संतुष्ट नहीं कर पाता है। इसलिए सरकार को इस कोटे को बढ़ाकर 50 कर देना चाहिए और अगर ऐसा करना संभव नहीं हो तो फिर इसे खत्म ही कर देना चाहिए।

 

सरकार की तरफ से मनीष तिवारी की मांग का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों के क्षेत्र के ही बच्चे पढ़ते हैं और सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय पर सांसदों का कोटा शून्य हुआ करता था, जिसे बढ़ाकर पहले 2 फिर 5 और बाद में 10 कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सांसदों को 10 एडमिशन का कोटा मिला हुआ लेकिन यह अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सदन सहमत हो और इस बात के लिए तैयार हो जाए तो सांसदों को मिले इस कोटे को खत्म किया जा सकता है।

 

इसके बाद लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में बैठे सभी सांसदों से इसे खत्म करने को लेकर सवाल पूछा। सांसदों द्वारा जवाब देने के बाद लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस मसले पर सभी दलों के नेताओं से बातचीत कर अंतिम फैसला लिया जाएगा और सरकार को इस बारे में अवगत करा दिया जाएगा।

 

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