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नारियल तेल कैसे करे इस्तेमाल जानें इस खबर से

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आप ने नारियल तेल के कई फायदे सुने होंगे लेकिन आज हम आपको नारियल तेल के कई ऐसे इस्तेमाल बताएगें हैं जिसे शायद ही आपने पहले कभी सुना होगें.

नारियल तेल से सुबह कुल्ला करने से सांसों से बदबू नहीं आती.नारियल तेल से कुल्ला करने के बाद नमक के पानी से गरारे करने से दिनभर आप ताजा महसूस करेंगे. इस फंडे को उपयोंग करने से पहले डॉक्टर से एक बार सलाह लेना ना भूलें. नारियल तेल में समुद्री नमक और किसी अन्य तेल की कुछ ड्रॉप्स डालकर बॉडी स्क्रब कर सकते हैं.

त्वचा को नरम बनाएं रखने के लिए शेविंग या वैक्सिंग के बाद नारियल तेल लगाना फायदेमंद रहता है.आपके बाल बहुत ज्यादा रूखे हो गए हैं तो बतौर कंडीशनर बालों में नारियल तेल लगाइए.

नारियल तेल

नारियल तेल

आप कॉफी पीने के बेहद शौकीन हैं तो कॉफी में दूध के बदले एक चम्मच नारियल तेल और शहद डाल दें. खाली पेट कॉकोनट कॉफी पीने से काफी फायदा होगा. चेहरे को साफ करने और नमी बनाएं रखने के लिए चेहरे पर नारियल का तेल लगाएं.

सेक्स के दौरान आप लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करते हैं तो कैमिकल युक्त लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करने से बेहतर नैचुरल नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.खाना बनाने के लिए भी नारियल तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. त्वचा में मॉश्चराइजर बरकरार रखने के लिए नारियल तेल से मालिश करें. किसी चीज से स्टीकर हटाते हुए उसके बाद लगने वाले पैच और दाग को नारियल तेल से मिटाया जा सकता है.

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बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्या

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 कोरोना महामारी के चलते स्कूल वगैरह बंद हैं, ऐसे में पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज और बाहर ज्यादा न निकलने की अवस्था में गेमिंग में बच्चे अपना अधिक समय बिता रहे हैं और इन सारी चीजों का प्रभाव उनकी आंखों पर पड़ रहा है।

मोटे तौर पर, हाल के सप्ताहों में करीब 40 प्रतिशत बच्चों में आंखों व देखने की तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ अनिल रस्तोगी के मुताबिक, इनमें से अधिकतर बच्चों में अभिसरण अपर्याप्तता की समस्या देखी गई – यह एक ऐसी अवस्था है, जहां निकट स्थित किसी चीज को देखने के दौरान आंखें एक साथ काम करने में असक्षम रहती हैं। इस स्थिति के चलते एक आंख के अंदर रहने के दौरान दूसरी बाहर की ओर निकल आती है, जिससे चीजें या तो दो या धुंधली लगती हैं।

उन्होंने आगे कहा, बच्चे कंप्यूटर के आगे लंबे समय तक बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं जिससे आंखों में खुजली और जलन की समस्या पैदा हो जाती है, ध्यान लगाने में परेशानी होती है, सिर दुखता है, आंखों में दर्द होता है।

नेत्र विशेषज्ञ शिखा गुप्ता भी यही कहती हैं कि लॉकडाउन के चलते बच्चे आठ से दस घंटे तक का समय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में बिताते हैं। वे या तो ऑनलाइन क्लासेज कर रहे हैं या कार्टून देख रहे हैं या वीडियो गेम्स खेल रहे हैं। माता-पिता को लगता है कि यह उन्हें व्यस्त रखने का सबसे बेहतर तरीका है, लेकिन इतना ज्यादा वक्त इलेक्ट्रॉनिकडिवाइस में बिताने से आंखों को नुकसान पहुंचता है।

इनसे बचने के लिए डॉक्टर्स का सुझाव है कि आंखों की एक्सरसाइज पर ध्यान दें, टीवी/कंप्यूटर/मोबाइल फोन के स्क्रीन से कुछ-कुछ देर का ब्रेक लेते रहें, ताकि आंखों की अच्छी सेहत बरकरार रखी जा सकें।

आईएएनएस

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बच्चों का तनाव दूर करने में आयुर्वेद कारगर

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नई दिल्ली, आजकल छात्रों को काफी कम उम्र में ही चिंता करते हुए देखा जा सकता है, जिससे छात्रों की सोचने की क्षमता में बाधा उत्पन्न होती है। यदि बच्चा बहुत अधिक दबाव में है, तो वह अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाता।

कोरोनावायरस महामारी के बीच छात्र ने विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में बैठना शुरू कर दिया है, उन्हें ऐसी स्थितियों से निपटने के दौरान शांत रहने की जरूरत है। छात्रों को अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ परीक्षाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

जीवा आयुर्वेदा के निदेशक प्रताप चौहान ने कहा, छात्रों को अपने परिवार और दोस्तों से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है, जो इन दिनों के दौरान प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ अन्य परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे हैं। कोरोनावायरस से पहले छात्रों को केवल अपनी पढ़ाई पर फोकस करना होता था, लेकिन अब इस वक्त उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षित रहने की भी जरूरत है। आयुर्वेद ऐसे समय में तनाव को दूर रखने और मानसिक स्वास्थ्य को कम करने में मदद कर सकता है।

आयुर्वेद कुछ तरीकों का सुझाव देता है, जिससे परीक्षा के कारण छात्रों में होने वाले तनाव को मैनेज करने में मदद करता है।

इस दौरान छात्रों को दूध, बादाम, किशमिश, पनीर, हरी सब्जियां और मौसमी फल जैसे भोजन का सेवन बढ़ा देना चाहिए, क्योंकि ये पाचन तंत्र को मजबूत रखने में मदद करते हैं, वहीं इस दौरान छात्रों को जंक फूड का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह पाचन तंत्र के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

अश्वगंधा जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है, जो स्वाभाविक रूप से चिंता को कम करने में मदद करती है।

छात्रों के लिए घर पर एक सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए, लैवेंडर और नींबू जैसी सुगंधित तेलों/अगरबत्ती को घर में जलाए, जिससे मन को शांति मिले।

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अब पटरी पर लौट रहा होटल व पर्यटन कारोबार

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कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा प्रभावित पर्यटन एवं आतिथ्य (टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी) के क्षेत्र में अब कारोबार पटरी पर लौटने लगा है और अनलॉक-4.0 में दी गई ढील से इस क्षेत्र में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

होटल, रिसॉर्ट और हिल स्टेशनों में घरेलू पर्यटकों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि जानकारों कहा कहना है कि इस कारोबार के पूरी तरह पटरी पर लौटने में ढाई से तीन साल लगेंगे।

आईटीसी के पूर्व सीईओ और उद्योग संगठन सीआईआई के टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी नेशनल कमेटी के सलाहकार दीपक हक्सर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि घरेलू पर्यटक अब सैर-सपाटे के लिए जाने लगे हैं। इससे टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में ग्रीन सुट्स यानी सुधार दिखने लगे हैं।

उन्होंने कहा, डोमेस्टिक लीजर ट्रेवल यानी फुर्सत के क्षण में सैर-सपाटे पर जाने वाले पर्यटकों की मांग बढ़ी है और वे होटल व रिसॉर्ट जाने लगे हैं। हिमाचल, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी पर्यटक स्थलों के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान व अन्य राज्यों के पर्यटक स्थलों को लोग जाने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि फिलहाल घरेलू पर्यटकों से ही टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में सुधार की उम्मीद है, विदेशी पर्यटकोंे के आने के बारे में अभी सोच भी नहीं सकते।

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