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जेएनयू छात्र मामले पर रपट मांगेंगे प्रणब : केजरीवाल

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फाइल फोटो
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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वादा किया है कि वह जेएनयू के एक छात्र के तीन हफ्ते से लापता होने की घटना पर गृह मंत्रालय से रपट मांगेंगे।

केजरीवाल ने ट्विटर पर कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, तो उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया।

केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने 15 अक्टूबर को जेएनयू से लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में दखल देने की मांग की थी। जेएनयू छात्र बीजेपी से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के साथ हुए झगड़े के बाद से लापता है।

वहीं एबीवीपी ने उसके लापता होने में किसी तरह की संलिप्तता से पूरी तरह इंकार कर दिया है। केजरीवाल ने कहा,”उन्होंने प्रणब मुखर्जी पूरे समर्थन का आश्वासन दिया है और कहा है कि वह गृह मंत्रालय से लापता छात्र पर रपट मांगेंगे।”

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रक्षामंत्री राजनाथ पहुंचे लखनऊ, विकास कार्यो का लिया जायजा

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लखनऊ, 30 नवंबर । देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ पहुंचे। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजधानी में चल रहे विकास कार्यो का निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित विभागों के अफसर भी उनके साथ रहे।

रक्षामंत्री का काफिला सबसे पहले आउटर रिंग रोड पर पहुंचा। यहां उन्होंने विकास कार्यो का निरीक्षण किया।

राजनाथ सिंह लखनऊ के चौधरी चरण सिंह हवाईअड्डे पर पहुंचे तो उनका स्वागत करने मंत्री महेंद्र सिंह, बृजेश पाठक, मेयर संयुक्ता भाटिया समेत तमाम नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इसके बाद रक्षामंत्री किसान पथ के रेल ओवरब्रिज पर रुके। यहां विधायक अविनाश त्रिवेदी ने रक्षामंत्री का स्वागत किया। रेलवे अधिकारी चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन सप्रा ने राजनाथ सिंह को रेलवे ओवरब्रिज के ऊपर से निकलने वाले ट्राई के बारे में जानकारी दी। इस दौरान रक्षामंत्री ने 11 किलोमीटर लंबे किसान पथ का निरीक्षण किया।

वह टेढ़ी पुलिया भी जाएंगे, फिर लाल कुआं होते हुए मीना बेकरी फ्लावर का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद राजनाथ सिंह अपने सरकारी आवास पर लौटेंगे। यहां पर वह नेताओं और आम लोगों से मुलाकात करेंगे। उनका देर रात तक व्यस्त कार्यक्रम है।

गौरतलब है कि रक्षामंत्री राजनाथ के दिशा-निर्देश पर ही लखनऊ में दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया था, जिसका कुछ दिनों पहले ही लोकार्पण हुआ था। उस मौके पर राजनाथ सिंह वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। राजधानी में कई विकास कार्य काफी तेजी से चल रहे हैं, जिनकी समय-समय पर मॉनिटरिंग होने से कई प्रोजेक्ट पूरे होने जा रहा है।

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उप्र के 60 हजार गांवों में झंडे फहराएगी कांग्रेस

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लखनऊ, 30 नवंबर । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 28 दिसंबर को राज्य के 60 हजार गांवों में पार्टी का झंडा फहराकर कांग्रेस का स्थापना दिवस मनाने के लिए कहा है।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के अनुसार, पार्टी की राज्य कार्यकारिणी, जिला, शहर समितियां, ब्लॉक स्तर निकाय और न्याय पंचायतें गठित की गई हैं और कांग्रेस नेतृत्व अब राज्य की 60 हजार ग्राम पंचायतों में ग्राम स्तरीय समितियों का गठन कर रहा है। प्रियंका गांधी चाहती हैं कि राज्य के हर शहर और गांव में पार्टी का झंडा फहरे।

सूत्रों ने कहा कि प्रियंका के सहयोगी, संदीप सिंह, लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं और पार्टी के विस्तार के लिए कैडर को प्रेरित करने और राज्यभर में पार्टी की उपस्थिति महसूस कराने के लिए राज्य में लगातार दौरे कर रहे हैं।

प्रियंका के एक वफादार ने कहा, कांग्रेस को एक शक्तिशाली लॉबी ने अपहृत किया हुआ था। वह लॉबी व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी का शोषण कर रही थी। उनकी सहमति के बिना कोई भी किसी भी कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर सकता था। यही वजह है कि कांग्रेस का पतन हो गया, लेकिन इन नेताओं का विकास जारी रहा। अब पार्टी में उनका एकाधिकार खत्म हो गया है। पार्टी नेतृत्व ने युवा खून को पार्टी संभालने की अनुमति दी है।

उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर के प्रतिबद्ध कैडर ही राज्य में पार्टी के वास्तविक संदेश वाहक होंगे।

दरअसल, प्रियंका उत्तर प्रदेश की प्रभारी के रूप में राज्य में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही हैं। पिछले 2 सालों से पार्टी की स्थिति खराब है। 2019 के चुनावों में पार्टी राज्य में केवल एक रायबरेली की सीट ही जीत पाई थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनावों में जीते 7 विधायकों में से 5 ही पार्टी में बचे हैं। उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेताओं का लगातार पलायन हुआ है।

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राष्ट्रीय

किसानों का प्रदर्शन जारी, मुद्दे का हल निकालने के लिए शाह ने की बैठक

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार किसी भी समय किसानों को बातचीत के लिए निमंत्रण भेज सकती है।

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नई दिल्ली, 30 नवंबर । कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं।

शाह के आवास पर सोमवार सुबह शुरू हुई बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता भी मौजूद रहे।

सूत्रों ने बताया कि यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा किसानों को उनके विरोध को समाप्त करने और राजी करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विचार-विमर्श करने के लिए की गई है। बैठक उन कदमों के बारे में फैसला करने के लिए हुई, जिनसे विवादास्पद मुद्दों को चर्चा के माध्यम से हल किया सके।

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार किसी भी समय किसानों को बातचीत के लिए निमंत्रण भेज सकती है।

इस बैठक से एक दिन पहले ही किसानों ने बुराड़ी के मैदान में जाने से मना कर दिया था। सरकार ने कहा था कि वह बातचीत के लिए तैयार है, मगर साथ ही किसानों से अपील भी की थी कि वह उत्तर-पश्चिम दिल्ली के बुराड़ी मैदान चले जाएं।

बैठक से दो दिन पहले ही गृह मंत्री ने यह घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, अगर किसान यूनियन तीन दिसंबर से पहले चर्चा करना चाहते हैं, तो मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जैसे ही आप अपना विरोध निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित करेंगे तो अगले ही दिन आपकी चिंताओं को दूर करने के लिए हमारी सरकार आपके साथ बातचीत करेगी।

सोमवार को पांचवें दिन भी किसानों का विरोध जारी रहा। कुछ किसान नेताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार उनके विरोध पर अपना रुख नरम कर सकती है।

पिछले पांच दिनों के दौरान किसानों और केंद्र सरकार ने अपने भविष्य के कार्यो को तय करने के लिए कई बैठकें आयोजित की हैं। लेकिन वे अब तक इस मुद्दे पर बातचीत के लिए आगे नहीं आए हैं।

शाह के आश्वासन के बाद यह पता चला है कि कुछ किसान नेता भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं और अगर केंद्र सरकार बिना शर्त बात करने के लिए तैयार हो जाती है तो वे केंद्र से चर्चा के लिए तैयार हो जाएंगे।

इस बीच हरियाणा के रास्ते दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गो पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली-चंडीगढ़, टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली-रोहतक और गाजीपुर की सीमा पर दिल्ली-गाजियाबाद मार्ग पर बड़ी संख्या में किसान डटे हुए हैं। भारी पुलिस उपस्थिति के बीच उन्हें अपने वर्तमान स्थानों पर रैली करने की अनुमति दी गई है।

किसान सितंबर में लागू किए गए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

कुल 31 किसान यूनियनों के प्रमुख ने 26 और 27 नवंबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। दिल्ली चलो के नारे के साथ निकले किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी का रुख किया था। इनमें अधिकतर किसान पंजाब से हैं, जबकि कुछ किसान हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी हैं। पुलिस ने एहतियात के तौर पर दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को हरियाणा-दिल्ली की सीमा पर ही रोक दिया था।

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