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भारत के पहले मिस्टर यूनिवर्स मनोहर ऐच का 102 साल की उम्र में हुआ निधन

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पहले मिस्टर यूनिवर्स मनोहर ऐच

भारत के पहले मिस्टर यूनिवर्स बने 102 साल के बॉडी बिल्डर मनोहर ऐच का रविवार को कोलकाता में उनके निवास पर निधन हो गया।

Manohar Aich

एशियाई खेलों में तीन बार स्वर्ण पदक हांसिल कर चुके ऐच 1952 में मिस्टर यूनिवर्स चुने गए थे। वह ‘पॉकेट हरक्यूलिस’ के नाम से पहचाने जाते थे।

उनके सेहमंद रहने का एकमात्र मंत्र था उनका उचित आहारऔर एक्सरसाइज करना। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मनोहर ऐच के निधन पर शोक जताया है।

भारत के कोमिल्ला जिले (अब बांग्लादेश में) जन्मे मनोहर ने अपना करियर एक स्टंटमैन के रूप में महान जादूगर पीसी सोरकर के साथ आरंभ किया था। वह दर्शकों को दांत से स्टील को मोड़ने जैसे स्टंट दिखाकर लोगों का दिल जीता करते थे। मनोहर के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं।

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कंगना केस में BMC को फटकार, जज ने कहा- पहले की लिस्ट पर क्यों नहीं तोड़े निर्माण?

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कंगना रनौत के दफ्तर पर भी तोड़फोड़ मामले की मुंबई हाई कोर्ट में आज एक बार फिर सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान बीएमसी को कोर्ट को बताना होगा कि उन्होंने जितनी तेजी से कंगना के दफ्तर पर कथित अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की क्या बाकी मामलों में भी उतनी तेजी से ही की। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान बीएमसी से आज तक जवाब देने को कहा था।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में कंगना के वकील ने संजय राउत के नाम का भी ज़िक्र किया था. कंगना के वकील ने दलील देते हुए कहा क्योंकि कंगना ने सत्ता में बैठे हुए लोगों को लेकर कुछ ऐसी बातें कही थी जो उनको नागवार गुजरी इस वजह से कंगना के दफ्तर पर यह कार्रवाई की गई जबकि कंगना के दफ्तर पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण नहीं चल रहा था।

हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि मानसून में जिस तरह ऑफिस तोड़ा गया है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बुधवार को भारी बारिश की वजह से हाईकोर्ट बंद हो जाने के कारण सुनवाई गुरुवार के लिए टल गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में बीएमसी से 18 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा था।

कुछ और वक्त दिए जाने की मांग पर जज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब कार्रवाई करने की बात थी तो आपने बहुत तेजी दिखाई। जब जवाब देने की बात आई तो सुस्ती दिखाई जा रही है। किसी का घर तोड़ दिया गया है. अदालत बरसात के मौसम में उस ढांचे को इस तरह से रहने नहीं दे सकती।

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क्या मोरेटोरियम अवधि के दौरान ऋण के ब्याज पर लगेगा ब्याज? पांच अक्तूबर को होगी सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोरेटोरियम अवधि के दौरान ऋण के ब्याज पर ब्याज लेने के खिलाफ दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई पांच अक्तूबर यानी सोमवार के लिए स्थगित कर दी है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ एडवोकेट राजीव दत्ता ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं ले पाई है। इसलिए सरकार को और समय चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अक्तूबर तक हलफनामा देने को कहा है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मोरेटोरियम की अवधि में स्थगित कर्ज की किस्तों के ब्याज पर ब्याज वसूलने का कोई तुक नहीं है। ग्राहकों को कुल छह महीने तक किस्त टालने का विकल्प मिला था।

इस बीच ईएमआई के भुगतान को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। ऋण स्थगन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, ‘हमारी चिंता केवल यह है कि क्या स्थगित किए गए ब्याज को बाद में देय शुल्कों में जोड़ा जाएगा या ब्याज पर ब्याज लगेगा।’

न्यायालय ने इससे पहले 12 जून को वित्त मंत्रालय और आरबीआई से तीन दिन के भीतर एक बैठक करने को कहा था जिसमें रोक अवधि के दौरान स्थगित कर्ज किस्त के भुगतान पर ब्याज पर ब्याज वसूली से छूट दिए जाने पर फैसला करने को कहा गया। शीर्ष अदालत का मानना है कि यह पूरी रोक अवधि के दौरान ब्याज को पूरी तरह से छूट का सवाल नहीं है, बल्कि यह मामला बैंकों की ओर से ब्याज के ऊपर ब्याज वसूले जाने तक सीमित है।

बिगड़ सकती है बैंकों की वित्तीय स्थिति
इससे पहले आरबीआई ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर वह कर्ज किस्त के भुगतान में राहत के हर संभव उपाय कर रहा है। लेकिन जबरदस्ती ब्याज माफ करवाना उसे सही निर्णय नहीं लगता है क्योंकि इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है। इसका खामियाजा बैंक के जमाधारकों को भी भुगतना पड़ सकता है। 

रिजर्व बैंक ने किस्त भुगतान पर रोक के दौरान ब्याज लगाने को चुनौती देने वाली याचिका का जवाब देते हुए कहा था कि उसका नियामकीय पैकेज, एक स्थगन, रोक की प्रकृति का है, इसे माफी अथवा इससे छूट के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।  

केंद्र सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले कहा था, ‘बैंकिंग क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, हम ऐसा कोई भी निर्णय नहीं ले सकते हैं जो अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है। हमने ब्याज माफ नहीं करने का फैसला लिया है लेकिन भुगतान के दबाव को कम किया जाएगा।’

बैंकों को हो सकता है दो लाख करोड़ का नुकसान
रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के बंद रहने के दौरान पहले तीन माह और उसके बाद फिर तीन माह और कर्जदारों को उनकी बैंक किस्त के भुगतान से राहत दी थी। इस दौरान किस्त नहीं चुकाने पर बैंक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरबीआई ने कहा कि इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया, तो बैंकों को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

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भोपाल में पुलिस अफसर द्वारा पत्नी की पिटाई का वीडियो वायरल

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा पत्नी की पिटाई किए जाने का वीडियो वायरल हो रहा है।

राज्य में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी अपनी पत्नी की पिटाई कर रहा है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि पुलिस अधिकारी पत्नी को जमीन पर गिरा देता है और उसकी बेरहमी से पिटाई कर रहा है। इस दौरान घर में मौजूद कर्मचारी बीच बचाव करने की कोशिश करते हैं।

सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल वीडियो से एक बात साफ हो रही है कि विवाद की वजह पुलिस अधिकारी का किसी दूसरी महिला से संबंध होना है। इसी को लेकर पति-पत्नी के बीच अरसे से विवाद चल रहा है।

आईएएनएस

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