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भारतीय सेनाओं की बढ़ेगी ताकत, 83 तेजस, T-90 टैंक्स, ड्रोन

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फाइल फोटो

नई दिल्‍ली: सैन्य तैयारियों को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 82 हजार करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी प्रदान की है। इसमें लड़ाकू विमान, टैंक, रॉकेट और ड्रोन की खरीद शामिल है।

इस बार ज्यादातर खरीद परियोजनाएं देश में निर्मित सामग्री की हैं। इसके साथ ही रक्षा सौदों में गड़बड़ी करने वाली कंपनियों को काली सूची में डाले जाने की नीति में बदलाव किया गया है। नई नीति में कंपनियों पर पूर्ण रूप से रोक लगाने के प्रावधान को हटाया गया है।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता में 7 नवंबर को हुई डीएसी की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।

परिषद ने वायुसेना के लिए देश में ही बनने वाले नई पीढ़ी के 83 तेजस विमानों की खरीद को सैद्धान्तिक मंजूरी दी है। इन विमानों की कुल कीमत 50025 करोड़ होगी। इसके अलावा सेना और वायुसेना के लिए 15 हल्के लड़ाकू विमानों की खरीद को स्वीकार किया है। इनका निर्माण भी देश में ही एचएएल की ओर से किया जाएगा, जिसकी लागत 2911 करोड़ रुपये होगी।

परिषद ने मूल रूप से रूस में विकसित हुए टी-90 टैंकों के अधिग्रहण को भी मंजूरी दी है। लेकिन इस बार टैंक रूस से नहीं खरीदे जाएंगे बल्कि, भारत में ही आर्डिर्नेस फैक्टरियों में इनका निर्माण किया जाएगा। इन पर 13448 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

परिषद ने सैन्य बलों के लिए 598 करोड़ रुपये के छोटे यूएवी खरीदने को मंजूरी दी है। इसकी कीमत करीब 1100 करोड़ रुपये होगी। ये खरीद देशी-विदेशी दोनों कंपनियों से किए जाने की उम्मीद है।

नौसेना के लिए जापान से 12 एंफीबियस विमानों की खरीद पर बैठक में चर्चा हुई लेकिन फैसला नहीं हो सका। लंबे वक्त से इन विमानों की खरीद का केस टलता आ रहा है। लेकिन 11-12 नवंबर को पीएम की जापान यात्र के दौरान इस बारे में आगे बातचीत हो सकती है।

परिषद ने रक्षा कंपनियों को काली सूची में डालने की नई नीति तैयार की है। नीति के मुताबिक यदि कोई रक्षा कंपनी भ्रष्टाचार आदि में लिप्त पाई जाती है या फिर उसके उपकरण खराब निकलते हैं तो उसे काली सूची में डाल दिया जाता था। उस कंपनी से कोई खरीद नहीं होती थी। नई नीति को लेकर अभी रक्षा मंत्रलय ने खुलासा नहीं किया है लेकिन इसमें ऐसे मामलों में कंपनियों पर जुर्माना लगाकर छोड़ने, एक खास अवधि के लिए ही काली सूची में डालने, कंपनी के पूरे समूह को काली सूची में नहीं डालने, किसी खास रक्षा सामग्री के खरीद के लिए ही काली सूची में डालने जैसे प्रावधान रखे गए हैं।

दरअसल, सरकार की दिक्कत यह है कि उच्च दर्जे के रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियां सीमित हैं। काली सूची में डाले जाने से कई क्षेत्रों में तो एक-एक ही कंपनी रह गई है।

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दिल्ली सरकार के आधे कर्मचारी 30 दिसंबर तक घर से करेंगे काम

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कोरोना संक्रमण से बचने के लिए दिल्ली सरकार का 50 फीसदी स्टाफ अब सरकारी दफ्तरों में मौजूद रहेगा। बचा आधा स्टाफ वर्क फ्रॉम होम पर रहेगा।

दिल्ली सरकार के इससे जुड़े एक प्रस्ताव को उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार देर शाम मंजूरी दे दी। साथ ही कॉरपोरेट समेत निजी नियोक्ताओं से अपील की गई है कि वह भी इस नियम का पालन करें।

हालांकि, यह नियम स्वास्थ्य, स्वच्छता, पुलिस, जलापूर्ति सरीखी बेहद जरूरी सेवाओं पर लागू नहीं होगा।

इससे पहले कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया था कि सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखने के लिए 50 फीसदी स्टाफ को ही दफ्तर बुलाया जाए। बाकी 50 फीसदी कर्मचारी घर से काम करें जबकि अभी तक सरकार के सारा स्टाफ दफ्तर आ रहा था। प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 25 नवंबर को जारी किए गए दिशा-निर्देश पर आधारित था, जिसके तहत सरकारी दफ्तरों में सीमित स्टाफ के साथ काम करने को कहा गया था। सरकार के इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल ने शनिवार देर शाम मंजूरी दे दी। सोमवार से सरकारी दफ्तरों में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।

नए नियमों के तहत दिल्ली सरकार के ग्रेड-एक और उच्च अधिकारियों को छोड़कर बाकी स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है। विभाग प्रमुख सुनिश्चित करेंगे कि 50 फीसदी स्टाफ को ही ऑफिस बुलाया जाए। हालांकि, इसके दायरे से जरूरी सेवाओं में लगे कर्मचारियों को बाहर रखा गया है।

इसके तहत स्वास्थ्य, स्वच्छता, जलापूर्ति,  पुलिस, बिजली, आपदा प्रबंधन सिविल डिफेंस, होम गार्ड जैसी जरूरी सेवाओं को नए नियमों में कोई छूट नहीं मिलेगी जबकि सरकारी दफ्तरों, स्वायत्त संस्थानों, पीएसयूए, निगमों, स्थानीय निकायों में यह नियम लागू होगा। नई व्यवस्था 31 दिसंबर तक लागू रहेगी। अगर स्थिति में कुछ बदलाव होता है तो सरकार नया आदेश जारी करेगी।

वर्क फ्रॉम होम की सलाह
दिल्ली सरकार ने निजी नियोक्ताओं को सलाह दी है कि वह दफ्तरों में शारीरिक दूरी को ध्यान में रखते हुए अपने स्टाफ को बुलाएं। इसके लिए वह वर्क फ्रॉम होम की कार्य संस्कृति को बढ़ावा दे सकते हैं। जहां तक संभव हो कर्मचारियों को घर से काम करने की इजाजत दी जाए। दिल्ली सरकार का मानना है कि हर हालत में निजी दफ्तरों में सोशल डिस्टेंसिंग लागू होनी चाहिए।

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राजनीति

मोदी प्रचार के बजाय कोरोना वैक्सीन आवंटन की रणनीति पर ध्यान दें : कांग्रेस

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कांग्रेस ने शनिवार को कोविड-19 वैक्सीन के विकास और निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा करने के लिए तीन शहरों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

कांग्रेस ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें हर बार प्रचार करने के बजाय इस बात के लिए बैठकें आयोजित करनी चाहिए कि वैक्सीन आखिर कैसे आवंटित की जाएगी?

यहां दिल्ली कांग्रेस कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, प्रधानमंत्री को रणनीतिक बैठकें करनी चाहिए और तय करना चाहिए कि टीके (वैक्सीन) कैसे आवंटित किए जाएंगे, यह कैसे काम करेगा और उन्हें पहले कौन प्राप्त करेगा।

खेड़ा ने कहा कि उन्हें हर समय अपना प्रचार करने के बजाय ऐसी चीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनकी टिप्पणी कोविड-19 को मात देने के लिए तैयार हो रही वैक्सीन विकास और विनिर्माण प्रक्रिया की समीक्षा के लिए मोदी की तीन शहरों की यात्रा के बीच एक सवाल के जवाब में सामने आई।

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार सुबह सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचे। यहां वह जायडस बायोटेक पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन जाइकोव-डी की तैयारियों का जायजा लिया। इसके बाद प्रधानमंत्री पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का दौरा करेंगे।

कांग्रेस नेता ने अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार को 11 महीने में स्वास्थ्य सेवा के लिए कुल फंड का केवल 25 प्रतिशत खर्च करने पर भी निशाना साधा।

खेड़ा ने कहा, दिल्ली सरकार ने इस साल 11 महीनों में स्वास्थ्य सेवा के लिए कुल निधि का केवल 25 प्रतिशत खर्च किया है। यह ऐसे समय में है जब हम महामारी से लड़ रहे हैं।

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बहुप्रचारित मुहल्ला क्लीनिकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, हमें दिखाओ कि कितने मोहल्ला क्लीनिक काम कर रहे हैं?

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के परीक्षण केंद्र के रूप में केवल छह मोहल्ला क्लीनिक का उपयोग किया जा रहा है। खेड़ा ने कहा, यह इसलिए हो रहा है, क्योंकि आपने अपने वर्कर्स के कागजात पर उनके घरों और दुकानों पर फर्जी मोहल्ला क्लीनिक बनाए हैं।

आईएएनएस

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चार दिनों के लिए रेल भवन सील, कोरोना संक्रमितों के 100 मामले आए सामने

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प्रतीकात्मक तस्वीर

देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं रेल भवन में कोविड-19 संक्रमितों के 100 मामले आने के बाद इस चार दिन के लिए सील कर दिया गया है। मंत्रालय को पूरी तरह सैनिटाइज करने के बाद ही खोला जाएगा। बता दें कि 25 मार्च के बाद कोविड-19 संक्रमण के कारण रेल भवन कई बार सील हुआ था।

राजधानी में कोरोना संक्रमण के लगातार कम हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बीते 24 घंटे में संक्रमण के 5842 नए केस सामने आए, जबकि 98 लोगों की मौत हो गई। एक दिन में 5937 मरीज स्वस्थ हुए। इस सप्ताह दूसरी बार संक्रमितों से ज्यादा संख्या ठीक होने वाले मरीजों की रही।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कुल संक्रमितों की संख्या 5,56,744 हो गई है। इनमें से 5,09,654 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। रिकवरी दर करीब 92 फीसदी हो गई है। अब तक 8909 लोगों की मौत हो चुकी है। कुल मृत्युदर 1.60 % है। शुक्रवार को कुल 64455 सैंपल की जांच की गई हैं।

इसमें 28100 आरटी-पीसीआर और 36355 एंटीजन जांच रही। ज्यादा जांच होने पर भी संक्रमितों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे इस दिन की संक्रमण दर घटकर 8.15 % रही। दिल्ली में अब तक 61,04,158 जांच की जा चुकी हैं।

प्रति 10 लाख की आबादी पर 3,21,271 टेस्ट किए जा रहे हैं है। कोरोना के फिलहाल 38,181 सक्रिय मरीज हैं। इनमें से 23,134 मरीज घर पर उपचाराधीन हैं। वहीं, अस्पतालों में 8,915 मरीजों का इलाज चल रहा है।

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