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स्वास्थ्य

हेल्प गुरु एप : कई परेशानियों का एक समाधान

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इंटरनेट के इस युग में हर सेकंड नए आयाम जुड़ते जा रहे हैं। हर दिन नए-नए एप लांच होते हैं। मगर जब आपकी परेशानी एक मोबाइल एप की मदद से सुलझ जाए तो आप उसे क्या कहेंगे? दरअसल यहां बात की जा रही है एक ऐसे एप की, जिसकी मदद से आप घर बैठे किसी भी सर्विस प्रोवाइडर को ढूंढ़ सकते हैं।

यह एप है हेल्प गुरु। कंपनी ने कहा, “इस एप की हर विशेषता इसे यूनीक बनाती है। इसके सहारे आप अपना समय और ऊर्जा बचा सकते हैं।”

कंपनी का कहना है कि छोटी से छोटी परेशानी जैसे गाड़ी खराब हो, बिजली गड़बड़ हो, घर के बाग की कटाई, दीवारें पेंट करवानी हो या कोई भी आईटी संबंधित दिक्कतें हों तो हेल्प गुरु उपयोगकर्ता को उनके अपने ही इलाके के सर्विस प्रोवाइडर को ढूंढने में सहायता मुहैया करता है। इस एप की मदद से अभिभावक अपन बच्चों के लिए शिक्षक ढूंढ़ सकते हैं। यानी अब कुछ भी आपकी पहुंच से बाहर नहीं होगा।

कैसे काम करता है हेल्प गुरु :

किसी भी तरह के स्मार्टफोन पर इस एप को डाउनलोड किया जा सकता है। उपयोगकर्ता वेबसाइट पर ऑनलाइन भी अपनी समस्याएं दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा हेल्प गुरु के नंबर पर भी कॉल की जा सकती है।

एप की खासियत :

हेल्प गुरु ये सुविधा 28 वर्गो और 180 उप वर्गो में प्रदान कर रही है। विज्ञापन और इवेंट मार्केटिंग इंडस्ट्री में ख्याति पाने के बाद अनुभवी उद्यमियों के समूह की मदद से हेल्प गुरु ने आम जनता के रोजमर्रा की छोटी से छोटी परेशानियों के निपटारे के लिए इस एप को लॉन्च किया है।

सबसे प्रमुख बात ये है कि वो चाहे प्लम्बर हो, इलेक्ट्रीशियन हो, पेंटर हो या ड्राइवर, ये सारे प्रशिक्षित लोग उस खास जगह के ही होंगे, जहां आपको जरूरत होगी।

हेल्प गुरु ने 3500 से ज्यादा प्रशिक्षित पेशेवर लोगों को और उनके सर्विस कर्मचारियों को एक साथ लाने में सफल हुई है। इसे लोकल पुलिस और कोर ऑफिसियल टीम के सत्यापन के बाद एक प्लेटफार्म पर लाया गया है।

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लाइफस्टाइल

भारत में मधुमेह, कैंसर के रोगियों के लिए कोविड-19 दोहरा झटका : शोध

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 शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि कोविड-19 महामारी भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) जैसे मधुमेह, कैंसर, श्वसन संबंधी समस्याओं या हृदय संबंधी दिक्कतों वाले लोगों के लिए दोहरा आघात बनकर आई है।

फ्रंटियर इन पब्लिक हेल्थ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि एनसीडी वाले लोग कोविड-19 की चपेट में आने और इसकी वजह से जान गंवाने के लिए अधिक संवेदनशील हैं। इसके साथ ही महामारी के दौरान ऐसे रोगों से पीड़ित व्यक्ति व्यक्ति अगर स्वास्थ्य के लिए सही नहीं मानी जानी वाले आहार लेता है तो उसके लिए महामारी और भी भयावह हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने माना कि कोविड-19 की वजह से आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हुई, जिससे इस तरह के रोगों का सामना कर रहे लोगों ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाने और इसका पर्याप्त इलाज कराने में भी ढिलाई बरती है।

शोध के लिए ब्राजील, भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में एनसीडी वाले लोगों पर कोविड-19 के पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की गई।

सिडनी में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) और नेपाल, बांग्लादेश एवं भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ताओं के बीच एक सहयोग के तौर पर यह शोध किया गया।

यूएनएसडब्ल्यू के अध्ययन के प्रमुख लेखक उदय यादव ने कहा कि एनसीडी और कोविड-19 के बीच संबंध और असर पर अध्ययन करना महत्वपूर्ण था, क्योंकि वैश्विक आंकड़ों से पता चलता है कि कोविड-19 से संबंधित मौतें एनसीडी वाले लोगों में असमान रूप से अधिक पाई गई हैं।

उन्होंने कहा, वैसे लोग कोविड-19 महामारी से परिचित हैं, लेकिन हमने एनसीडी के साथ लोगों पर कोविड-19 और भविष्य की महामारी दोनों के प्रभाव को निर्धारित करने के लिए एक सिंडेमिक लेंस के माध्यम से इसका विश्लेषण किया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऐसे रोगों से लड़ रहे लोगों के लिए कोविड-19 का प्रभाव कहीं अधिक होगा।

उन्होंने कहा, एनसीडी आनुवांशिक, शारीरिक, पर्यावरण और व्यवहार संबंधी कारकों के संयोजन का परिणाम होते हैं और इसका कोई जल्द इलाज नहीं है, जैसे कि वैक्सीन या अन्य इलाज।

–आईएएनएस

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राजनीति

बिहार में कोरोना टीका पर बोली शिवसेना- बाकी राज्य पाक में हैं क्या? या पुतिन देंगे वैक्सीन

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बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मतदाताओं को लुभाने के लिए कोरोना का टीका आ जाने पर पूरे राज्य के लोगों को मुफ्त में उपलब्ध कराने का वादा किया है।

अब उसे लेकर देश में राजनीतिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। इस बाबत शिवसेना ने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर निशाना साधा है।

शिवसेना ने सामना में कहा है कि बीजेपी की असली नीति क्या है? उनका दिशा-दर्शक कौन है? इस बारे में थोड़ा भ्रम का माहौल बना दिख रहा है।

दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को आश्वासन दिया था कि सरकार प्रयास करेगी कि कोरोना का टीका आते ही उसे देश के सभी लोगों तक पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री टीके का वितरण करते समय कहीं भी जाति, धर्म, प्रांत, राजनीति बीच में नहीं लाए।

शिवसेना ने सामना में बीजेपी के घोषणा पत्र में पहले नंबर पर यह वादा होने का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री पर भी निशाना साधा है और इसे विचित्र बताया है। शिवसेना ने यह सवाल भी किया है कि जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं है, वे राज्य क्या पाकिस्तान में हैं? या इन राज्यों को कोरोना का टीका पुतिन देंगे।

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स्वास्थ्य

जून तक आ जाएगी कोविड-19 वैक्सीन, लोगों तक पहुंचाना होगी चुनौती: किरण मजूमदार

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कोरोना वायरस से पूरी दुनिया प्रभावित है। ऐसे में वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। ताकि करोड़ों लोग फिर से एक बार सामान्य जिंदगी जी सकें।

इसी बीच बंगलूरू स्थित बायोकॉन लिमिटेड की चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने उम्मीद जताई है कि भारत में जून तक कोविड-19 की वैक्सीन आ जाएगी। हालांकि इसे सभी नागरिकों तक पहुंचाना एक चुनौती होगी।

बायोकॉन ने शुक्रवार को अपनी सितंबर तिमाही की कमाई की घोषणा की, जो एक साल पहले की तिमाही में 216 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से गिरकर 169 करोड़ रुपये हो गई है। एक निजी अखबार के साथ बातचीत में उन्होंने वैक्सीन और उसकी चुनौतियों को लेकर अपने विचार साझा किए।

जब उनसे पूछा गया कि देश में कोविड-19 की वैक्सीन कब तक आएगी तो किरण मजूमदार ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक पहले एमआरएनए वैक्सीन को मंजूरी दी जाएगी। लेकिन वे भारत में उपलब्ध नहीं होंगे क्योंकि उन्हें -80 डिग्री कोल्ड चेन की आवश्यकता होती है और यह ऐसी चीज नहीं है जिसे हम यहां संभाल नहीं सकते।

मुझे उम्मीद है कि जनवरी तक, कुछ अन्य वैक्सीन जैसे- एस्ट्राजेनेका, या हमारे अपनी भारतीय वैक्सीन भारत बायोटेक को अनुमोदित किया जा सकता है।

अगर हम अगले 2-3 महीनों में क्लिनिकल ट्रायल को पूरा कर लेते हैं, तो भी उन्हें जनवरी-फरवरी तक मंजूरी मिलेगी। इसलिए मुझे लगता है कि 2021-22 तक कोरोना की वैक्सीन भारत में उपलब्ध हो जाएगी।’

आपको वैक्सीन वितरण में क्या चुनौतियां लगती हैं इस सवाल के जवाब में बायोकॉन की प्रबंध निदेशक ने कहा, ‘इतने बड़े पैमाने पर वयस्क टीकाकरण पहले कभी नहीं किया गया।

पोलियो की वैक्सीन को सालों से दिया जा रहा है। पोलियो वैक्सीन को आशा कार्यकर्ता या अन्य देते हैं लेकिन कोविड वैक्सीन इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन होगा। इस लगाने के लिए नर्स, डॉक्टर्स और एमबीबीएस छात्रों की जरूरत होगी। मानव संसाधनों के अलावा, हमें इसके लिए कोल्ड चेन के बुनियादी ढांचा की आवश्यकता होगी।’

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