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अनाज बचाने वाली दवा से हो सकता है कैंसर सावधान!

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कैंसर

अनाजों कीड़ों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा कैंसर और घातक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया से रोगों की चिकित्सा में कारगर हो सकती है. एक नए शोध में बात सामने आई है. कि शोधार्थियों ने इसके लिए ‘नाइसिन’के कैंसर रोधी गुणों पर अपना शोध केंद्रित किया था. नाइसिन का एक रंगहीन, स्वादहीन चूर्ण है, जोकि व्यापक रूप से अनाजों को संरक्षित के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

मिशिगन यूनिवर्सिटी प्रोफेसर योवन कपिला के अनुसार, “नाइसिन का खाद्य संरक्षण अलावा भी बेजा उपयोग किया जा सकता है.

शोध में वैज्ञानिकों ने चूहों को नाइसिन युक्त आहार दिया. चूहों को प्रत्येक चरण में नाइसिन की अलग मात्राएं दी गईं. शोधार्थियों ने देखा कि नौ सप्ताह के अंतराल पर नाइसिन युक्त मिल्कशेक का सेवन करने से दिमाग  70-80 प्रतिशत ट्यूमर कोशिकाएं मर गईं.

शोधार्थियों का कहा है कि नाइसिन युक्त आहार खासकर 800 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम  हिसाब नाइसिन का सेवन से कैंसर कोशिकाओं मारने में सक्षम है.

नाइसिन घातक बैक्टीरिया, एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट, ‘एमआरएसए’से लड़ता है. कपिला कहा हैं, कि “यह निष्कर्ष अपर्याप्त हैं चूहों पर ही आधारित हैं. मानवों पर इसके इस्तेमाल के बारे में सोचना बहुत जल्दबाजी होगी. यह शोध पत्रिका ‘एंटीमाइक्रोबॉयल कीमोथेरेपी’ के आगामी अंक में प्रकाशित किया जाएगा.

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स्वास्थ्य

डॉ. रेड्डीज को 10 करोड़ ‘स्पुतनिक 5’ वैक्सीन देगा रूस

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वैश्विक दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैब, जिसका मुख्यालय भारत में स्थित है, उसने कोरोनावायरस की वैक्सीन स्पुतनिक 5 के क्लीनिकल ट्रायल और वितरण के लिए रूसी निर्माता रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) से करार किया है। रूस के सॉवरेन वेल्थ फंड ने बुधवार को एक बयान में यह जानकारी दी।

स्पुतनिक 5 को गैमेलिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने रशियन डायरेक्ट इवनेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ मिलकर तैयार किया है। इसे 11 अगस्त को पंजीकृत किया गया था।

फंड से एक बयान में कहा गया है, भारत में विनियामक अनुमोदन के साथ आरडीआईएफ डॉ. रेड्डी को वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति करेगा। स्पुतनिक 5 वैक्सीन, जो पूर्ण एवं सिद्ध सुरक्षा के साथ अच्छी तरह से अध्ययन किए गए मानव एडेनोवायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म पर आधारित है, कोरोनावायरस महामारी के लिए क्लीनिकल (नैदानिक) परीक्षणों से गुजर रही है।

रूसी फंड ने कहा कि डिलीवरी संभवत 2020 के अंत में शुरू हो सकती है, जो भारत में नियामक अधिकारियों द्वारा सफल परीक्षणों एवं वैक्सीन के पंजीकरण के पूरा होने के अधीन है।

आरडीआईएफ ने कहा, आरडीआईएफ और डॉ. रेड्डी के बीच समझौता देशों और संगठनों की बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है कि उनकी आबादी की रक्षा के लिए एक विविध एंटी-कोविड वैक्सीन पोर्टफोलियो है।

इस महीने की शुरूआत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा था कि रूसी सरकार ने स्पुतनिक 5 वैक्सीन के निर्माण में भारत की मदद मांगी है और देश में तीसरे चरण के परीक्षण की मांग की है।

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा था, रूस के पास वैक्सीन निर्माण का अच्छा इतिहास है, इसलिए हम मानते हैं कि यह वैक्सीन भी अच्छी है। भारत और रूस सरकार की उच्च-स्तरीय समितियों के बीच बातचीत चल रही है। हम इसके तंत्र पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दिमित्रीव ने कहा था कि रूस विकसित की गई कोविड-19 वैक्सीन के उत्पादन के लिए भारत के साथ साझेदारी करना चाहता है। इस बीच, भारत में भी तीन वैक्सीन परीक्षण के उन्नत चरणों में हैं।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

कोविड-19 मामलों में 20 से कम उम्र के लोगों की भागीदारी 10 फीसदी से कम: डब्ल्यूएचओ

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WHO

वैश्विक स्तर पर दर्ज किए गए कोविड-19 के कुल मामलों में 20 साल से कम उम्र के मरीजों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है, वहीं संक्रमण से हुई मौतों में उनकी हिस्सेदारी 0.2 प्रतिशत से कम है।

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने कहा कि बच्चों और किशोरों के बीच इस गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम पर अभी भी अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस अधानोम घेब्रेयेसस ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, हम जानते हैं कि यह वायरस बच्चों को मार सकता है, लेकिन बच्चों में संक्रमण का मामूली असर होता है और बच्चों और किशोरों में कोविड-19 से बहुत कम गंभीर मामले और मौतें सामने आई हैं।

हालांकि संक्रमित बच्चों और किशोरों पर संक्रमण के संभावित दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में अभी सटीक जानकारी नहीं मिली हैं।

हालांकि बच्चे बड़े पैमाने पर वायरस के कई गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों से बचे रहे हैं, लेकिन ट्रेडोस ने बताया दी कि उन्हें अन्य तरीकों से नुकसान उठाना पड़ा है। उदाहरण के लिए, कई देशों में आवश्यक पोषण और टीकाकरण सेवाएं बाधित हो गई हैं, और लाखों बच्चे स्कूली शिक्षा से महीनों से दूर हैं।

इस बीच, जैसा कि कई देशों में स्कूल फिर से खुल रहे हैं, डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने न सिर्फ सरकारों और परिवारों को, बल्कि समुदायों में भी सभी एहतियातों का पालन करने के साथ स्कूल में बच्चों को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन देशों में स्कूल बंद हैं, वहां दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से शिक्षा की निरंतरता की गारंटी दी जानी चाहिए।

आईएएनएस

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स्वास्थ्य

DCGI ने दी ऑक्सफोर्ड के कोरोना टीके का परीक्षण दोबारा शुरू करने की अनुमति

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भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ.वीजी सोमानी ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके का उम्मीदवारों पर क्लीनिकल ट्रायल (चिकित्सकीय परीक्षण) फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी। 

डीसीजीआई ने दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण के लिए किसी भी उम्मीदवर को चुनने को रोकने वाले अपने पहले के आदेश को रद्द कर दिया ।

हालांकि डीसीजीआई ने इसके लिए जांच के दौरान अतिरिक्त ध्यान देने समेत अन्य कई शर्तें रखी हैं। एसआईआई से डीजीसीआई ने विपरित परिस्थतियों से निपटने में नियम के अनुसार तय इलाज की भी जानकारी जमा करने को कहा है।

इससे पहले 11 सितंबर को डीसीजीआई ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को निर्देश दिया था कि कोविड-19 के संभावित टीके के चिकित्सकीय परीक्षण पर रोक लगाई जाए क्योंकि दिग्गज दवा कंपनी एस्ट्राजेनिका ने अध्ययन में शामिल हुए एक व्यक्ति के तबीयत खराब होने के बाद अन्य देशों में परीक्षण रोक दिया था।

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