मनोरंजनचार दशकों तक अपने अभिनय और पार्श्वगायन से दर्शकों को दीवाना बना वाली सुरैया

Payal ChauhanJune 15, 20161502 min
सुरैया

बॉलीवुड में सुरैया को ऐसी सिंगर-एक्ट्रेस के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय और जादुई पार्श्वगायन से सिनेमा प्रेमियों को लगभग चार दशक तक अपना दीवाना बनाए रखा। 15 जून को सुरैया के बर्थडे के मौके पर एक नजर  डालते हैं …

-15 जून 1929 को पंजाब के गुजरांवाला शहर में एक मध्यम परिवार मे जन्मी सुरैया ने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नहीं ली थी लेकिन संगीत पर उनकी अच्छी पकड़ थी।

s31465984403_big

– 1941 में स्कूल की छुटियो के दौरान एक बार सुरैया मोहन स्टूडियो मे फिल्म ‘ताजमहल’ की शूटिंग देखने गईं। वहां फिल्म के निर्देशक नानु भाई वकील ने सुरैया को फिल्म के किरदार मुमताज महल के लिए चुन।

s41465984822_big

-आकाशवाणी के एक कार्यक्रम के दौरान संगीत सम्राट नौशाद ने सुरैया को गाते सुना तब वह उनके गाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए। नौशाद के संगीत निर्देशन मे पहली बार कारदार साहब की फिल्म ‘शारदा’ में सुरैया को गाने का मौका मिला। सुरैया 1946 मे महबूब खान की ‘अनमोल घड़ी’ के एक गाने ‘सोचा था क्या क्या हो गया’ से बतौर पार्श्वगायिका अपनी पहचान बनाने में सफल रही।

SURAIYA-2-A1465984359_big

– 1949-50 मे सुरैया अपनी प्रतिद्वंदी एक्ट्रेस नरगिस और कामिनी कौशल से भी आगे निकल गई। इसकी खास वजह सुरैया की एक्टिंग के साथ गाने में भी अच्छी पकड़ होना था।

SURAIYA-dev1465984257_big

– फिल्मों में सुरैया की जोड़ी फिल्म अभिनेता देवानंद के साथ खूब जमी। 1950 में प्रदर्शित फिल्म ‘अफसर’ के निर्माण के दौरान देवानंद का झुकाव सुरैया की ओर हो गया था। एक गाने की शूटिंग के दौरान देवानंद और सुरैया की नाव पानी में पलट गई। देवानंद ने सुरैया को डूबने से बचाया।

– इसी दौरान सुरैया, देवानंद से बेइंतहा मोहब्बत करने लगी लेकिन सुरैया की नानी की इजाजत न मिलने पर यह जोड़ी नही सकी।

-1954 मे देवानंद ने उस जमाने की मशहूर एक्ट्रेस कल्पना कार्तिक से शादी कर ली। इससे सुरैया ने आजीवन कुंवारी रहने का फैसला कर लिया। सुरैया और देवानंद की जोड़ी वाली फिल्मों मे ‘विधा’, ‘जीत’, ‘शायर’, ‘अफसर’, ‘नीली’ और ‘दो सितारे’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

– 1950 से लेकर 1953 तक सुरैया के करियर के लिए बुरा वक्त साबित हुआ। 1954 मे प्रदर्शित फिल्म ‘मिर्जा गालिब’ और वारिस की सफलता ने सुरैया एक बार फिर से फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गईं।

SURAIYA1465984327_big

फिल्म ‘मिर्जा गालिब’ को राष्ट्रपति के गोल्ड मेडल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। फिल्म को देख तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इतने भावुक हो गए कि उन्होंने सुरैया को कहा, ‘तुमने मिर्जा गालिब की रूह को जिंदा कर दिया’। 1963 मे प्रदर्शित फिल्म ‘रूसतम सोहराब’ के प्रदर्शन के बाद सुरैया ने खुद को फिल्म इंडस्ट्री से अलग कर लिया।

wefornews bureau

keywords: Four decades,acting,audience crazy, Suraiya playback,movie, bollywood,चार दशकों, अभिनय,पार्श्वगायन ,दर्शकों , दीवाना सुरैया

Related Posts