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क्या दिल्ली के लिए केजरीवाल के विज्ञापन ‘अमानत में ख़यानत’ नहीं हैं…?

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By:मुकेश कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार

11 महीने पहले दिल्ली ने अपनी अमानत (धरोहर) अरविन्द केजरीवाल को सौंपी. सोचा था कि अब केजरीवाल ही दिल्ली को पिछली सरकारों और पार्टियों के ‘भ्रष्टाचार’ से उबारेंगे. क्योंकि ‘भ्रष्टाचार’ ही केजरीवाल का सबसे बड़ा मुद्दा था. लेकिन ‘भ्रष्टाचार’ शब्द की महिमा बड़ी निराली है. ‘हरि अनन्त, हरि कथा अनन्ता’ की तरह. ये ‘भ्रष्ट’ यानी अनैतिक और ‘आचार’ यानी आचरण की सन्धि से बना शब्द-युग्म है. ‘अनैतिक’, सिर्फ़ रिश्वतख़ोरी नहीं है. ऐसा हरेक व्यवहार ‘अनैतिक’ है, जो नीति-सम्मत नहीं है. ‘नीति’ का अर्थ है ‘जन-कल्याणकारी’. यानी, हरेक ऐसा काम जो जनता का कल्याण नहीं करे, वो अनीति है, भ्रष्ट है. इसका एक और मतलब है कि यदि आचरण ऐसा है जो नीति के मुताबिक ‘अनापेक्षित’ है, तो वो भी भ्रष्ट ही है. मसलन, यदि अध्यापक, विद्यालय में नहीं पढ़ाये तो ये उसका भ्रष्टाचार ही है.

अब बात, केजरीवाल के जगज़ाहिर भ्रष्टाचार की. केजरीवाल ने सत्ता के अहंकार में अपनी सरकार के प्रचार बजट को सालाना 24 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 526 करोड़ रुपये पर पहुँचा दिया. ये जनता का पैसा है. जनता ने उन्हें अपना भाग्य-विधाता बनाकर दिल्ली की गद्दी सौंपी थी. जनता ने ऐसा उस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अविश्वास करके किया था, जिस पर उसने महज नौ महीने पहले ही अपना पूर्ण विश्वास लुटाया था. दिल्ली की सातों सीटें बीजेपी की झोली में डालकर मोदी की राष्ट्रीय ताजपोशी में अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया था. लेकिन नौ महीने में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें केजरीवाल के हवाले करके जनता ने मोदी को दिये शत-प्रतिशत समर्थन का तक़रीबन सफ़ाया ही कर दिया था.

ऐसे ऐतिहासिक जनादेश की बदौलत सत्तासीन होते ही अरविन्द केजरीवाल पर अहंकार हावी हो गया. हालाँकि, जनादेश पाते ही उन्होंने सबसे पहली दुआ यही माँगी थी कि भगवान मुझे अहंकार से दूर रखना. अभी तक उनकी दुआ क़बूल नहीं हुई है. क्योंकि दुआ सिर्फ़ माँगने से पूरी नहीं होती. उसके लिए माकूल व्यवहार भी करना पड़ता है. जनता के 526 करोड़ रुपये को अपने ‘सगुण प्रचार’ के लिए इस्तेमाल करना किसी भी तरह से माकूल व्यवहार नहीं माना जा सकता. उनके विज्ञापनों को सुनकर दिल्ली वालों के कान पक चुके हैं. उनकी अच्छी बातें भी झुँझलाहट पैदा करती हैं. विज्ञापनों की ‘बमबारी’ से उनके प्रशंसकों में भी चिड़चिड़ापन काफ़ी बढ़ गया है. एक ही बात का धड़ाधड़ होने वाला री-प्ले सुनते ही लोगों के मुँह से उनकी तारीफ़ नहीं बल्कि अपशब्द निकलते हैं.

मुख्यमंत्री का ऐसा आचरण क्या किसी भ्रष्टाचार से कम है? इस भ्रष्टाचार में भी तो दिल्ली की जनता की वही ख़ून-पसीने की कमाई स्वाहा की जाती है, जिसे काँग्रेस और बीजेपी के घोटालों के रूप में दिल्लीवासी झेलते रहे हैं. साफ़ है कि सरकार के प्रचार बजट को सालाना 24 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 526 करोड़ रुपये पर पहुँचाना भी किसी घोटाले से कम नहीं है. दिल्ली भूली नहीं है कि शीला दीक्षित सरकार पर भी अपना प्रचार करने के लिए जनता के पैसों की चपत लगाने का बहुत संगीन आरोप लगा था. अदालत से उन्हें इसके लिए फ़टकार और सज़ा भी मिली थी. लेकिन क्या वैसा ही काम अब केजरीवाल सरकार नहीं कर रही है? क्या पोशाक बदल लेने से व्यक्तित्व भी बदल सकता है? दुनिया से सवाल पूछने वाले युग-पुरुष केजरीवाल से सवाल भला कौन कर सकता है?

केजरीवाल के सरकारी विज्ञापनों की बदौलत धड़ल्ले से आम आदमी पार्टी की चहेती प्रचार कम्पनियों को मलाई ख़िलायी जा रही है. ये केजरीवाल सरकार का जीता-जागता घोटाला है. जनता इसे टीवी पर दिन-रात देख रही है. एफ़एम रेडियो पर हर वक़्त सुन रही है. केजरीवाल ने ‘अति-विज्ञापनबाज़ी’ के इस खेल को जिस अन्दाज़ से खेला है, उसने सिर्फ़ यही साबित किया है कि ‘समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाईं.’ इसे ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली अदा भी कह सकते हैं. यही केजरीवाल का विशुद्ध अहंकार भी है. केजरीवाल ने सरकारी ख़ज़ाने पर कम से कम 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला है. इसका भी सीएजी (नियंत्रक और महालेखाकार परीक्षक) से ऑडिट होना चाहिए. क्योंकि सरकारी रक़म के जायज़-नाजायज़ ख़र्च की समीक्षा (Performance Audit) करने का अधिकार सिर्फ़ सीएजी के पास है, जो एक संवैधानिक संस्था है.

सरकारी विज्ञापनों की सुनामी लाने वाले अरविन्द केजरीवाल के कुतर्क भी बड़े शानदार हैं. उनका कहना है कि दिल्ली के कुल बजट यानी 41,129 करोड़ रुपये में से वो महज डेढ़ फ़ीसदी रक़म ही तो सरकार के कामकाज और उसकी नीतियों के प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. एक नज़र से डेढ़ फ़ीसदी का अनुपात मामूली लग सकता है. लेकिन जब 526 करोड़ रुपये की तुलना सरकार की उन योजनाओं से की जाती है, जिनकी जन-कल्याण में कहीं बड़ी भागीदारी है, तो तस्वीर का दूसरा रूप ही नज़र आता है. मसलन, केजरीवाल ने अपने बजट में दलित और कमज़ोर तबक़ों के कल्याण के लिए 338 करोड़ रुपये, कुपोषण का मुक़ाबला करने के लिए 350 करोड़ रुपये, मज़दूरों के कल्याण के लिए 208 करोड़ रुपये और झुग्गी बस्तियों के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये रखे थे.

क्या इन आँकड़ों से ये साबित नहीं होता कि केजरीवाल सरकार की प्राथमिकताओं में ‘विज्ञापन और प्रचार’ का कितना ऊँचा स्थान है? हर विज्ञापन जो जनता को दिखाया, सुनाया और पढ़ाया जाता है, उसके पीछे जनता के ही करोड़ों रुपये की बलि चढ़ायी जाती है. विज्ञापनों के बजट से ही तरह-तरह के अभियानों में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ‘वॉलिन्टियर्स’ के नाम पर सींचा जाता है. 526 करोड़ रुपये की अहमियत इसलिए भी बहुत है, क्योंकि इसने दिल्ली के विकास पर ख़र्च होने वाली रक़म का पेट काटा है. रोज़ाना के हिसाब से देखें तो ये रक़म 1.44 करोड़ रुपये बैठती है. मतदाताओं के हिसाब से देखें तो दिल्ली का हरेक शख़्स अपने मुख्यमंत्री के प्रचार पर हर रोज़ एक रुपये खर्च करता है. क्या ये फ़िजूलखर्ज़ी नहीं है? क्या ये किसी आम आदमी के लिए विलासिता का नया शौक़ नहीं है?

कल्पना कीजिए कि 526 करोड़ रुपये की जगह यदि ये बजट पिछले वर्षों के अनुपात में होता तो उसका क्या असर पड़ता? दिल्ली में सरकारी प्रचार के लिए शीला दीक्षित सरकार ने 2014-15 के लिए 23.7 करोड़ रुपये रखे थे. जबकि 2013-14 के लिए 25 करोड़ रुपये, 2012-13 के लिए 24.9 करोड़ रुपये और 2011-12 के लिए 27.6 करोड़ रुपये रखे गये थे. साफ़ है कि पिछले वर्षों के अनुपात में यदि सरकार ने 500 करोड़ रुपये कम रखे होते तो उससे दिल्ली में एक फ्लाई ओवर बनाया जा सकता था. या, कितने ही स्कूल की तस्वीर बदली जा सकती थी. या, कितनी बसें ख़रीदकर दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को सुधारा जा सकता था. यही ‘ख़यानत’ यानी बेईमानी है, धोखा है, छलावा है.

मज़े की बात ये है कि ‘ख़यानत’ के लिए बड़े ही शातिर तरीक़े से सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों की भी धज़्ज़ियाँ उड़ायी जा रही हैं, जिसमें नेताओं को सरकारी ख़र्चे पर अपनी तस्वीरें नहीं दिखाने के लिए कहा गया है. इत्तेफ़ाक से आवाज़ को लेकर कोई कोर्ट ने ऐसी कोई बन्दिश नहीं लगायी. लिहाज़ा, केजरीवाल सरकार अपनी सहूलियत से क़ानून के शब्दों से खेल रही है. वो बेहद बेईमानीपूर्वक और जानबूझकर क़ानून की भावना की खिल्ली उड़ा रहे हैं. क्योंकि ‘दिल्ली के लोग बहुत अच्छे हैं.’ उन्हें अपने से भी अच्छा मुख्यमंत्री जो मिला है. अद्भुत और विलक्षण. दिल्ली वाले नहीं जानते कि वो किस मिट्टी का बना है. ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि आख़िर क्यों केजरीवाल ऐसा कर रहे हैं? इससे उन्हें क्या हासिल हो रहा है?

केजरीवाल, बहुत सयाने हैं. हर तरह की तिकड़म के महारथी हैं. अपनी शर्मनाक विज्ञापन नीति की बदौलत ही आज उन्हें और उनकी आवाज़ को देश का बच्चा-बच्चा भी पहचानने लगा है. ये उनकी ब्रॉन्डिंग का क़माल है जिसने उन्हें दिल्ली से उठाकर देश के राजनीतिक मंच पर एक कद्दावर हस्ती के रूप में स्थापित कर दिया है. बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ और यहाँ तक कि राजनेता भी इसके लिए करोड़ों रुपये बहाते हैं. मीडिया कुछ हस्तियों को उनके कारनामे की वजह से सुर्ख़ियों में रखती है. लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो ‘एयर टाइम’ ख़रीद लेते हैं. ये भी ‘पेड मीडिया’ का ही एक विद्रूप चेहरा है. फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि इसका बोझ दिल्लीवासियों को उठाना पड़ रहा है. कहीं ये केजरीवाल को भारी बहुमत से सत्ता में बिठाने की सज़ा तो नहीं.

ज़रा हटके

Dev Deepawali: स्नान से लेकर उपवास तक, इन बातों का रखें खास ध्यान होगा शुभ

इस बार खास बात ये है कि कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया भी लगने जा रहा है। देव दिवाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सभी देवता स्वर्गलोक से दिवाली मनाने काशी में आते हैं।

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dev deepawali

Dev Deepawali 2020: काशी में हर साल देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल देव दिवाली 30 नवंबर 2020 को मनाई जाएगी। इस बार खास बात ये है कि कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया भी लगने जा रहा है। देव दिवाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सभी देवता स्वर्गलोक से दिवाली मनाने काशी में आते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसी मान्यताएं हैं कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता हैं। आइए जानते हैं कि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

1.कार्तिक माह को बहुत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने पवित्र नदी में स्नान करने की प्राचीन परंपरा रही है। मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ महीने में, श्री हरि जल में रहते हैं। इसलिए सूर्योदय से पहले रोजाना नदी में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है, विशेषकर दीप दिवाली पर। इस दिन, लोग हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, पुष्कर और गर्गगंगा जैसे तीर्थ स्थानों में स्नान करने जाते हैं।

2.माना जाता है कि देव दीपावली के दिन सभी देव गंगा के घाट पर आते हैं और दीप जलाते हैं। इसलिए इस दिन नदी, तालाब आदि स्थानों पर दीप दान करें, ऐसा करने से आपको सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

3.देव दीपावली के त्योहार पर उपवास का बहुत महत्व है। इस दिन उपवास रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन शालिग्राम और तुलसी जी की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन तुलसी की पूजा करने वाले लोगों की मनोकामना पूरी होती है।

4.इसके अलावा आपको शराब या अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहना चाहिए। इस शुभ दिन को जमीन पर सोना शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन धरती पर सोने से सभी रोगों और विकारों से छुटकारा मिलता है।

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ज़रा हटके

Guru Nanak Jayanti: गुरु नानक देव के इन विचारों को अपनाएं, बदल जायेगा जीवन

Guru Nanak Jayanti 2020 के शुभ अवसर पर पढ़ें नानक देव के कुछ ऐसे विचार जिसे अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है।

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Guru Nanak Jayanti 2020: कल यानी 30 नवंबर को गुरु नानक जयंती कल मनाई जाएगी। गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु माने जाते हैं। गुरु नानक देव का जन्म रावी नदी के तट पर बसे एक गांव तलवंडी (अब पाकिस्तान) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था।

बचपन से ही गुरु नानक देव धार्मिक प्रवृति के थे। गुरु नानक के जन्मदिन को सिख धर्म में प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। हालांकि कई विद्वानों में इनके जन्मदिन को लेकर मतभेद भी हैं।

Guru Nanak Jayanti 2020 के शुभ अवसर पर पढ़ें नानक देव के कुछ ऐसे विचार जिसे अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है।

1.गुरु नानक देव जी का मानना था कि भगवान एक है और वह हर जगह पर है।

2.गुरु नानक देव जी कहते थे कि हमें हमेशा लोभ का त्याग करना चाहिए और मेहनत से धन कमाना चाहिए।

3.जरूरतमंदो की सहायता के लिए हमें हमेशा तैयार रहना चाहिेए।

4.पैसों को कभी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए उसका स्थान हमेशा जेब में ही होना चाहिए।

5.गुरु नानक देव जी पुरुष और स्त्री में कोई फर्क नहीं करते थे, उनके अनुसार कभी भी महिलाओं का अनादर नहीं करना चाहिए।

6.तनाव मुक्त रहकर हमें अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए।

7.सबसे पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करनी चाहिए।

8.हमें हमेशा अच्छे और विनम्र सेवाभाव से अपना जीवन गुजारना चाहिए क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है इसलिए कभी भी मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए।

9.भी मनुष्यों को प्रेम, एकता, समानता और भाईचारा का संदेश देना चाहिए। जब मन पाप और लज्जा से अपवित्र हो जा़ए तब ईश्वर का नाम लेने से वह स्वच्छ हो जाता है।

10.इक ओंकार का नारा गुरु नानक देव जी ने ही दिया था और वो कहते थे कि सबका पिता एक है इसलिए सभी लोगों को एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

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राम लीला मैदान की ओर कूच कर रहे किसान, पुलिस ने निरंकारी मैदान में लाकर छोड़ा

दरअसल निरंकारी मैदान पर किसानों के लिए बेसिक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके तहत सबसे पहले यहां किसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था करवाई जा रही है।

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farmers at Sindhu border

नई दिल्ली, 27 नवंबर । कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर अपना डेरा बनाया हुआ है। हालांकि पंजाब से दिल्ली आए किसानों को बुराड़ी के निरंकारी मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई है। लेकिन फिलहाल किसान अभी बॉर्डर पर जमे हुए हैं। जो किसान दिल्ली में घुस गए थे और रामलीला मैदान पहुंचने की कोशिश कर रहे थे उन्हें पुलिस ने हिरासत में लेकर बुराड़ी के निरंकारी मैदान में लाकर छोड़ दिया है।

पंजाब से दिल्ली अपना विरोध जताने आई सुनीता रानी और उनके साथी आज दिल्ली के राम लीला मैदान की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उनके मुताबिक पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बुराड़ी के निरंकारी मैदान छोड़ दिया है। उनके साथ और भी महिलाएं मौजूद है।

सुनीता रानी ने आईएएनएस को बताया, 2 दिन पहले हम पंजाब से चले थे। हमारे और भी साथी सिंघु बॉर्डर पर मौजूद है। दो दिन के सफर के बाद हम राम लीला मैदान पहुचने वाले थे मुश्किल से 1 किलोमीटर रह गए थे। वहीं हम सबको इकठ्ठा होना था वहाँ हमें करीब 2 बजे पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने हमें पूरे दिन घुमाया और अब हमें यहां बुराड़ी मैदान में छोड़ दिया है।

सुनीता के साथ आए अन्य लोग भी फिलहाल बुराड़ी के निरंकारी मैदान में बैठे हुए हैं। हालांकि इन लोगों का कहना है कि हम सभी को सिंघु बॉर्डर जाना है। लेकिन अब फिलहाल पुलिस इन्हें वापस बॉर्डर जाने देगी या नहीं ये अभी तक साफ नहीं हो सका है।

इन सभी की गाड़ियों पर ऑल इंडिया किसान सभा का झंडा लगा हुआ है। वहीं एक बस और 2 अन्य 4 पहिया गाडियां साथ मे मौजूद है। फिलहाल सभी ने बुराड़ी के निरंकारी मैदान में की गई लंगर की व्यवस्था से इन लोगों ने खाने का इंतजाम किया है।

दरअसल निरंकारी मैदान पर किसानों के लिए बेसिक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इसके तहत सबसे पहले यहां किसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था करवाई जा रही है।

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा खुद बुराड़ी पहुंचकर स्वयं व्यवस्था का जायजा लिया था। किसानों के लिए टेंट, शेल्टर, चलते-फिरते टॉइलट उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है।

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