मनोरंजनFilm REVIEW: रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘वीरप्पन’ का रिव्यू

Payal ChauhanMay 27, 2016941 min
वीरप्पन

सत्य घटनाओं और रियलिस्टिक किरदारों को लेकर फिल्म बनाने के प्रति निर्देशक रामगोपाल वर्मा की दिलचस्पी और प्रेम जगजाहिर है। उनकी नई फिल्म विरप्पन भी इससे अछूती नहीं है।

यह कहानी है उस तस्कर विरप्पन (संदीप भारद्वाज) की है जो पुलिस से बचने के लिए तमिलनाडु से आंध्रप्रदेश के बीच सीमा पार करके पुलिस को चकमा देता रहता था। पुलिस और आर्मी उसको पकड़ने के लिए एक जॉइन्ट ऑपरेशन चलाती है, जिसके तेहत उसकी पत्नी लक्ष्मी (ऊषा जाधव) से सुराग जुटाने की कोशिश की जाती है।

आर्मी ऑफिसर (सचिन जोशी) की लीडरशिप में चल रहे इस ऑपरेशन में श्रुति (लिसा रे) भी शामिल हैं, जिसके पति को विरप्पन ने बड़ी बेरहमी से मार डाला था। एक दिन पुलिस को पता चलता है कि विरप्पन को LTTE चीफ प्रभाकरण से मिलने की इच्छा है। पुलिस फिर एक जाल बिछाती है, लेकिन कोई है जो इस मिशन को विफल करना चाहता है।

रामू की फिल्म उनकी पिछली कुछ फिल्मों से काफी बेहतर है। विरप्पन का लुक उत्सुकता पैदा करता है। पुलिस के मिशन और विरप्पन की चालाकियों की वजह से फिल्म बांधे रखती है। फिल्म का निर्देशन काफी अच्छा है।

wefornews bureau

Related Posts