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स्वास्थ्य

गर्भावस्था में शराब पीने से बच्चे को हो सकते हैं रोग

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गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान आप शराब पीने से पहले भी कई प्रकार के नुकसान की बात साबित हो चुकी है एक नए शोध में भी साबित हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान शराब पीने से बच्चे में 428 तरह के रोगों का खतरा हो सकता है। पत्रिका ‘द लांसेट’ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, गर्भावस्था में शराब पीने से शिशु को‘फीटल अल्कोहोल स्पेक्ट्रम डिसऑडर्स’से संबंधित बिमारियां होने का खतरा हो सकता हैं।

एफएएसडी ऐसी शारीरिक अक्षमताएं हैं जो जन्म से पूर्व अल्कोहोल के प्रभाव के कारण हो सकते हैं

टोरोंटो स्थित ‘सेंटर फॉर एडिक्शन एंड मेंटल हेल्थ’के शोधकर्ता लाना पोपोवा के मुताबिक, “हमने एफएएसडी के साथ होने वाली कई बिमारियों का पता लगाया है। शोध से साबित हुआ है कि गर्भावस्था के किसी भी चरण में, मात्रा या प्रकार के शराब का सेवन सुरक्षित नहीं है यह विकसित होते भ्रूण के किसी भी अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकता है.

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एफएएसडी की गंभीरता और लक्षण कई बातों पर निर्भर करती है, शराब का सेवन कितना और कब किया गया, मां के जीवन में तनाव का स्तर, पोषण और पर्यावरणीय प्रभाव किस प्रकार का रहा?

साथ ही मां और शिशु के शरीर में शराब के रसायनिक विभाजन की क्षमता पर भी निर्भर करता है।

127 अध्ययनों के बाद 428 रोगों की पहचान की गईं और पाया गया कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क), ²ष्टि, श्रवण, हृदय, रक्त, पाचन और श्वसन प्रणाली समेत शरीर की लगभग हर प्रणाली को प्रभावित हो सकता हैं।

पोपोवा ने कहा कि स्वस्थ शिशु चाहते हैं तो गर्भाधान की योजना बनाने की अवधि से लेकर संपूर्ण गर्भावस्था में शराब से बिल्कुल दूर रहें.

wefornews bureau

राष्ट्रीय

भारत में कोविड मामलों की संख्या 93 लाख के करीब

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India Coronavirus

नई दिल्ली, 26 नवंबर । भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 44,489 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल मामलों की संख्या 92,66,705 पहुंच गई। लगातार 19वें दिन वायरस के दैनिक मामले 50 हजार से कम पाए गए। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को ये जानकारी दी।

अंतिम बार 50 हजार से ज्यादा दैनिक मामले 7 नवंबर को दर्ज किए गए थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इसी दौरान कोविड-19 से 524 मौतें हुई, जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा 1,35,223 तक पहुंच गया।

देश में फिलहाल 4,52,344 वायरस के सक्रिय मरीज हैं। अब तक 86,79,138 मरीजों को रिकवर होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है। पिछले 24 घंटों में 36,367 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई।

देश में रिकवरी रेट 93.66 प्रतिशत है। जबकि मृत्यु दर 1.46 फीसदी है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 84,464 सक्रिय मरीज हैं और यहां अब तक कोविड-19 से 46,748 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। महाराष्ट्र के बाद स्थान आता है आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मामले में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

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स्वास्थ्य

अपोलो अस्पताल समूह हर दिन 10 लाख लोगों को लगाएगा कोरोना वैक्सीन

कोरोनावायरस वैक्सीन अगले 60-120 दिनों में आने के आसार हैं।

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Corona Vaccine

नई दिल्ली, 25 नवंबर। अपोलो ग्रुप कोरोनावायरस वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद अपने अस्पतालों, क्लीनिकों, स्वास्थ्य केंद्रों, फार्मेसियों और अपोलो 24 इंटू 7 के माध्यम से पूरे भारत में एक दिन में 10 लाख कोरोना वैक्सीन लगाने की तैयारी कर रहा है।

कोरोना वैक्सीन 2-4 महीनों में आने की संभावना है। इसके मद्देनजर अपोलो 24/7 सर्वे के माध्यम से कोरोना वैक्सीन लगवाने के इच्छुक लोगों का नाम व पता दर्ज कर रहा है।

अपोलो 24 इंटू 7 ने कहा, हमारी सूची में शामिल हों और अपने प्रियजनों, खासतौर से वो, जिन्हें इसकी सबसे ज्याद जरूरत है, जो बीमार हैं। आप वैक्सीन के बारे में जानने वाले पहले व्यक्ति होंगे, जबकि अपोलो बैटल ग्राउंड के लिए पूरी तरह से तैयार है।

कोरोनावायरस वैक्सीन अगले 60-120 दिनों में आने के आसार हैं।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

वैक्सीन से कोविड-19 के खत्म होने की उम्मीद बढ़ी : डब्ल्यूएचओ प्रमुख

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WHO Tedros Adhanom Ghebreyesus

कोविड-19 महामारी को खत्म करने के लिए वैक्सीन की उम्मीद अब बढ़ गई है। यह कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के महानिदेशक ट्रेडोस एडहोम घेब्रेयसिस का। उन्होंने कहा कि हालांकि वैक्सीन के साथ वो स्वास्थ्य उपाय भी अपनाने होंगे, जिनके कारगर साबित होने की पुष्टि हो चुकी है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्लूएचओ प्रमुख की यह टिप्पणी ड्रग बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका के सोमवार को यह कहने के बाद आई है कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ विकसित की जा रही इसकी कोविड-19 वैक्सीन 90 प्रतिशत तक प्रभावी है। फाइजर और मॉडर्ना के बाद यह तीसरी प्रमुख कंपनी है जिसने आखिरी स्टेज के आंकड़े बताए हैं।

ट्रेडोस ने कहा, इस वैज्ञानिक उपलब्धि के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता है क्योंकि इतिहास में कोई भी वैक्सीन इतनी तेजी से विकसित नहीं हुई है। वैज्ञानिकों की बिरादरी ने वैक्सीन के विकास के लिए एक नया मानक निर्धारित कर दिया है। अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इसकी हर वर्ग तक पहुंच के लिए एक नया मानक निर्धारित करना चाहिए, क्योंकि जिस तेजी के साथ टीके विकसित किए गए हैं, उनका वितरण भी इतनी ही तत्परता के साथ होना चाहिए।

उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि सबसे गरीब और सबसे कमजोर देशों को वैक्सीन पाने की दौड़ में कहीं रौंद न दिया जाए। डब्ल्यूएचओ ने वैक्सीन तक पहुंच बनाने के लिए कोविड-19 टूल एक्सेलेरेटर स्थापित किया है। अभी तक कोवैक्स फैसिलिटी में 187 देश वैक्सीन की खरीदी के लिए किफायती मूल्य, मात्रा और समय सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करने के लिए जुड़ चुके हैं।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख के अनुसार, वैक्सीन, परीक्षणों और उपचार के लिए बड़े पैमाने पर खरीदी और वितरण करने के लिए 4.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तत्काल आवश्यकता है, जबकि अगले वर्ष 23.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि यदि चिकित्सा समाधानों को तेजी से और व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाता है, तो इससे 2025 के अंत तक लगभग 9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की वैश्विक आय होगी।

आईएएनएस

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