राष्ट्रीयदिल्ली हिंसा: तीन आरोपियों की जामनत याचिका अदालत ने की खारिज

Payal ChauhanOctober 18, 20201161 min

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के साम्प्रदायिक दंगों के मामले में आरोपी तीन लोगों की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों पर हत्या, हत्या प्रयास व आगजनी जैसे गंभीर आरोप हैं। इन्हें जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।

कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव की अदालत ने दयालपुर इलाके में हुए दंगोंं से जुड़े तीन आरोपियों की जामनत याचिका नामंजूर करते हुए कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ कई सारे दंगे के मामले दर्ज हैं।

इनमें हत्या, हत्या प्रयास, लूट, आगजनी आदि गंभीर आरोप हैं। ये उसी इलाके के रहने वाले हैं जहां शिकायतकर्ता परिवार रहते हैं। ऐसे में गवाहों को धमकाने से लेकर उन्हें प्रभावित करने का खतरा लगातार बना रहेगा। दूसरा अभी दंगों से संबंधित मामलों में जांच जारी है। इन परिस्थितियों में भी आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं है।

वहीं बचाव पक्ष के वकीलों का कहना था कि उनके मुवक्किलों को गलत व झूठे आरोपों में फंसाया गया है। वकीलों ने जांच पर भी सवाल खड़े किए। इनका कहना था कि जांच निष्पक्ष नहीं है। जानबूझकर समुदाय विशेष के अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। जबकि वह खुद इन दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं। विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी ने आरोपी पक्ष के वकीलों की दलील का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। आरोपी को गिरफ्तार करते समय साक्ष्य देखे जा रहे हैं ना की समुदाय। इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाकर दंगों को एक नया रंग देने का प्रयास ना किया जाए।

पेश मामले में तीनों आरोपियों पर आरोप है कि 23 फरवरी को वजीराबाद रोड चांदबाग से दंगों की शुरुआत हुई। जोकि उत्तर-पूर्वी के अधिकांश हिस्सों मेंं जल्द ही फैल गए। यह दंगे 26 फरवरी तक चले। आरोपियों ने दयालपुर स्थित बृजपुरी पुलिया पर बड़ी संख्या में लोगों के साथ मारकाट की।

इनमें से कई की मौत हो गई। जबकि कई पीड़ित गंभीर रुप से जख्मी हुए। वहीं, इलाके की कई दुकाने लूटी गईं व उन्हें आग लगा दी गई। इन सभी घटनाओं में आरोपी शामिल रहे।

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