दिल्ली- अधिकारियों के सस्‍पेंशन को गृह मंत्रालय ने ठहराया गलत | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर ठन गई है. दिल्ली सरकार ने जैसे ही दो विशेष सचिव स्‍तरीय अधिकारियों को सस्पेंड किया तो गृह मंत्रालय ने इसे गलत ठहराया. केंद्र अब इस मामले में दिल्‍ली सरकार को अपना रुख बताएगा.

इससे पहले अधिकारियों के सस्‍पेंशन और दानिक्स अधिकारियों के सामूहिक छुट्टी पर जाने के मामले में दिल्ली सरकार ने सख्त रूख अपनाते हुए कहा है कि वो इन अफसरों के बगैर काम कर सकती है. गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने निलंबित अफसरों पर उपराज्यपाल के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है.

सत्येंद्र जैन ने कहा है कि भ्रष्ट अधिकारी नहीं चाहिए और लोगों के काम को आसान करने के लिए वो सभी सेवाओं को ऑन लाइन कर देंगे. दरअसल, ये पूरा विवाद गृह विभाग में विशेष सचिव यशपाल गर्ग और सुभाष चंद्रा के निलंबन से जुड़ा है.

दोनों अधिकारियों को कैबिनेट का फैसला न मानने पर सस्पेंड किया गया है. इसी कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली अंडमान निकोबार आइलैंड सिविल सर्विसेज यानी दानिक्स के अफसर आज एक दिन की सामूहिक छुट्टी पर हैं.

दानिक्स एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पास कर इस सस्पेंशन को गैरकानूनी बताया है. एसोसिएशन ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सत्येंद्र जैन की शिकायत में एक चिट्ठी लिखी है और इस निलंबन को खत्म करने की मांग की है.

दरअसल, चिट्ठी में गृह विभाग में विशेष सचिव यशपाल गर्ग और सुभाष चंद्रा के निलंबन को गलत बताया गया है और उसे रद्द करने की मांग की गई है. दानिक्स एसोसिएशन का कहना है कि सत्येंद्र जैन ने दोनों अधिकारियों पर एक कैबिनेट नोट पर साइन करने के लिए दबाव बनाया, जो नियमों के खिलाफ है.

wefornews Bureau

राष्ट्रीय

हर पार्टी तय करे कि वह किसानों के साथ है या भाजपा के साथ: चिदंबरम

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नयी दिल्ली, 19 सितंबर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कृषि संबंधी विधेयकों के खिलाफ सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि हर पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसानों के साथ है या फिर ‘कृषकों की जीविका को खतरे में डाल रही भारतीय जनता पार्टी के साथ है ।

उन्होंने यह दावा भी किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े कांग्रेस के घोषणापत्र में किसानों के साथ किए गए वादों को भाजपा तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है, जबकि इस सरकार ने काॉरपोरेट जगत के समक्ष समर्पण कर दिया है।

पूर्व वित्त मंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘भाजपा अपने खुद के बनाए हुए जाल में फंस गई है। दशकों से यह व्यापारियों के वर्चस्व वाली पार्टी रही है। इसने वस्तुओं और सेवाओं के अभाव वाली अर्थव्यवस्था का दाोहन किया गया। इंदिरा गांधी द्वारा हरित क्रांति लाने और पीवी नरसिंह राव एवं मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए उदारीकरण के बाद हालात बदलने लगे।’’

चिदंबरम के मुताबिक, आज हमारे यहां गेहूं और चावल जैसी उपज अधिक मात्रा में पैदा हाो रही हैं। उन्हाोंने कहा ‘‘किसानों की ताकत की बुनियाद पर कांग्रेस की सरकारों ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाई जिसके बाद 2013 में खाद्य सुरक्षा कानून बना। हमारी खाद्य सुरक्षा प्रणाली के तीन स्तंभ- न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था हैं।’’

उन्होंने कहा , ‘‘कांग्रेस ने 2019 में इन्हीं सिद्धांत के आधार पर घोषणापत्र तैयार किया था। प्रधानमंत्री और भाजपा के प्रवक्ता ने कांग्रेस के घोषणापत्र को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया है।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘हमने वादा किया था कि कृषि उत्पादक कंपनियों/संगठनों को प्रोत्साहित करेंगे ताकि किसानों की पहुंच लागत, प्रौद्योगिकी और बाजार तक हो सके। हमने यह भी कहा था कि उचित बुनियादी ढांचे तथा बड़े गांवों एवं छोटे कस्बों में सहयोग से कृषि बाजार स्थापित किए जाएंगे ताकि किसान अपनी उपज वहां ला कर बेच सकें।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ लेकिन दूसरी ओर मोदी सरकार ने कारपोरेट और व्यापारियों के समक्ष समर्पण कर दिया है।’’

चिदंबरम ने कहा, ‘‘कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को हर मंच पर इन विधेयकों का विरोध करने के लिए हाथ मिलाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मौजूदा स्वरूप में ये विधेयक कानून नहीं बनें। हर पार्टी को यह तय करना होगा कि वह किसानों के साथ है या फिर किसानों की जीविका को खतरे में डाल रही भाजपा के साथ है।’’

गौरतलब है कि लोकसभा ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी है।

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राष्ट्रीय

ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गरीब छात्रों को सरकार दे वित्तीय मदद : अहमद पटेल

पटेल ने कहा ”2014 में सरकार ने ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडने का वादा किया था। लेकिन यह वादा केवल वादा ही रहा।

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Ahmed Patel Rajya Sabha Online Education

राज्यसभा में शनिवार को कांग्रेस के सदस्य अहमद पटेल ने मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को वित्तीय मदद दी जाए ताकि वे कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद होने की वजह से चल रहीं ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ ले सकें।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान अहमद पटेल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद होने की वजह से ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं के पीछे स्कूलों का मकसद फीस वसूलना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के पास इन कक्षाओं में हिस्सा लेने के लिए पर्सनल कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्ट फोन आदि की सुविधा नहीं है।

पटेल ने कहा ” संसाधनों के अभाव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र इन ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कोविड-19 महामारी की वजह से पहले ही परेशान अभिभावकों पर अब उनके लिए यह संसाधन जुटाने का दबाव बन रहा है। कुछ राज्यों से तो छात्रों द्वारा आत्महत्या करने तक की खबरें आई हैं।”

उन्होंने कहा कि 75वें नेशनल सर्वे के अनुसार, केवल 24 फीसदी घरों में ही इंटरनेट का उपयोग हो रहा है और इनमें से नौ फीसदी छात्र ही इसका उपयोग कर पा रहे हैं। पटेल ने कहा ”2014 में सरकार ने ढाई लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडने का वादा किया था। लेकिन यह वादा केवल वादा ही रहा। स्थिति यह है कि अब तक केवल 23000 ग्राम पंचायतें ही ब्रॉडबैंड से जुड़ पाई हैं। ”

उन्होंने सरकार से मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को वित्तीय मदद दी जाए ताकि वे कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल बंद होने की वजह से चल रहीं ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ ले सकें और अपनी पढाई जारी रखें। उन्होंने यह भी कहा कि एक कार्यबल बनाया जाना चाहिए जो पूरी स्थिति को देखें। इसके अलावा राज्य सरकारों से परामर्श कर ऑनलाइन कक्षाओं के लिए दिशा-निर्देश बनाए जाएं।

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राष्ट्रीय

पाक की घुसपैठ को रोकने के लिए एलओसी पर तैनात किए गए तीन हजार और जवानः भारतीय सेना

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JAMMU AND KASHMIR

भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर लगातार तनाव जारी है। ऐसे में पाकिस्तान अपनी नापाक हरकत से एलओसी पर घुसपैठ करने की फिराक में है। पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत भेजने की हर तरह की कोशिश में लगा है लेकिन भारत पाक के इस मंसूबे पर पानी फेर दिया है।

दरअसल भारतीय सेना ने पाकिस्तान के घुसपैठ को रोकने के लिए एलओसी पर तीन हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी है।

सूत्र के अनुसार भारतीय जवानों की तैनाती से पाकिस्तान की हर चालबाजी को रोकने में मदद मिलेगी और घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों द्वारा बॉर्डर पार करने की हर कोशिश को नाकाम की जाएगी।

सूत्र ने आगे बताया कि इस साल पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों  को भारत भेजने की तमाम कोशिशों को विफल किया गया। हालांकि पाकिस्तान ने अक्तूबर और नवंबर में  भारी वर्फबारी के बीच घुसपैठ करने की लगातार कोशिश कर रही थी लेकिन भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया।

सूत्र के अनुसार भारतीय सेना एलओसी पर काफी चौकन्नी है और पाकिस्तान के हर कदम पर निगाह बनाके रख रही है। सूत्र ने बताया कि भारतीय सेना हर विकट स्थिति से निपटने को तैयार है। कुछ दिन पहले सेना प्रमुख ने एलओसी का मुआयना किया था और इसके बाद उन्होंने जानकारी दी कि सीमा पर पाकिस्तान ने कई बार सीजफायर उल्लंघन किया। 

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