ब्लॉगराजनीतिदिग्विजय के खिलाफ कांग्रेस में होने लगी है लामबंदी

IANSJuly 15, 202111691 min
Congress Senior leader and former Madhya Pradesh Chief Minister Digvijay Singh

भोपाल 15 जुलाई | मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह के खिलाफ कांग्रेस के भीतर ही लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे हैं तो वही कई नेता उनके बयानों से नाराज हैं मगर खुलकर बोलने का साहस कम ही लोग जुटा पा रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदूवादी संगठनों के सबसे बड़े विरोधियों के तौर पर दिग्विजय सिंह को पहचाना जाता है। जो अकेले कांग्रेस में ऐसे नेता हैं जो संघ, भाजपा और हिंदूवादी संगठनों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के साथ हमला करने से नहीं चूकते। यही कारण है कि उनकी पहचान अल्पसंख्यक परस्त नेता के तौर पर बनती जा रही है।

अभी हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू और मुसलमानों के डीएनए को लेकर बयान क्या दिया उस पर दिग्विजय सिंह ने लगातार प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनकी इन प्रतिक्रियाओं को कांग्रेस के किसी भी नेता का साथ नहीं मिला, मगर विरोध में जरूर बातें सामने आने लगी। महाराष्ट्र के नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य विश्व बंधु राय ने तो दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा ही खोल लिया है ।

राय ने पार्टी की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भी लिखा है और मांग की है कि दिग्विजय सिंह की जुबान पर रोक लगाई जाए। दिग्विजय सिंह पर यहां तक आरोप लगाया गया है कि कमलनाथ सरकार गिराने में भी उनकी भूमिका रही है , इसलिए उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए क्योंकि जहां-जहां वे रहे हैं पार्टी को नुकसान हुआ है और अभी जिस राज्य में है वहां भी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का तो यहां तक कहना है कि, दिग्विजय सिंह ऐसे बयान देते हैं जिससे कांग्रेस को नुकसान होता है और पार्टी की छवि हिंदू विरोधी की बनती है । इतना ही नहीं वे पार्टी के तमाम ताकतवर नेताओं को किनारे लगाने में भी पीछे नहीं रहते। बात 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान की है, जब उन्होंने समन्वय के नाम पर बुंदेलखंड के कद्दावर नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी को अपने साथ लिया और पुराने गिले-शिकवे दूर करने का भरोसा भी दिलाया, मगर बाद में चतुवेर्दी के साथ सोची-समझी रणनीति के तहत छल किया गया। परिणाम स्वरूप चतुर्वेदी ने राजनीति से ही नाता तोड़ लिया है। यह तो एक घटना मात्र है। मध्यप्रदेश में तमाम जनाधार वाले नेताओं को किनारे लगाने के साथ पार्टी को नुकसान पहुंचाने में दिग्विजय सिंह कभी भी पीछे नहीं रहे हैं। सिर्फ उन्हें अपने हित, स्वार्थ और अपने करीबियों का लाभ ही देखता रहा है। पार्टी को चाहे जितना भी नुकसान क्यों न हो जाए।

दिग्विजय सिंह के बयानों को लेकर मध्य प्रदेश के नेताओं में भी नाराजगी है मगर कोई भी नेता खुलकर नहीं बोल रहा। नाम न छापने की शर्त पर एक नेता का कहना है कि पार्टी की ओर से जब अधिकृत बयान कोई नहीं आता तो दिग्विजय सिंह ऐसे बयान क्यों देते हैं, जिससे पार्टी को नुकसान होता है, इसलिए जरूरी है कि कांग्रेस में भी भाजपा की तरह दिशा निर्देश जारी किए जाएं और किसी भी नेता को मनमर्जी से बयान देने की आजादी नहीं रहे। समय रहते पार्टी ने दिग्विजय िंसंह जैसे नेताओं पर लगाम नहीं लगाई तो आगामी समय में उत्तर प्रदेष के विधानसभा चुनाव सहित अन्य चुनाव में कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ भी दिग्विजय सिंह के बयानों से खुश नहीं है, यही कारण है कि दिग्विजय सिंह से उन्होंने दूरी बना ली है। आने वाले दिनों में राज्य में तीन विधानसभा और एक लोकसभा क्षेत्र में उप-चुनाव है, इन चुनावों पर भी दिग्विजय िंसंह के बयान असर डाल सकते हैं, इसीलिए कमल नाथ भी दिग्विजय सिंह के साथ सक्रिय होने को तैयार नहीं है।

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