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बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र, बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये देने का वादा

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फोटो- सोशल मीडिया

कांग्रेस ने बिहार के किसानों से सत्ता में आने पर मुफ्त बिजली और कर्ज माफ करने का वादा किया है। कांग्रेस ने बुधवार को पटना में पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया। पार्टी ने इसे बिहार बदलाव पत्र नाम दिया है।

कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि पार्टी सत्ता में आने पर किसानों का कर्ज माफ करेगी और बिजली बिल भी माफ करेगी। इसके अलावा किसानों को फसल का सही मूल्य दिलाने के लिए काम करेगी. उन्होंने कहा कि पंजाब की तर्ज पर केंद्र के कानून को खारिज किया जाएगा। किसान अगर ट्रैक्टर खरीदते हैं तो उसका रजिस्ट्रेशन मुफ्त किया जाएगा।

कांग्रेस नेता राजबब्बर ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो नौकरी मिलने तक बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये देगी।

उन्होंने कहा कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में 10 लाख नौकरी देने का फैसला लिया जाएगा। राजबब्बर ने कहा कि सरकार ने युवाओं के साथ छल किया है और युवा उसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि नई सरकार रोजगार के लिए सर्वे करवाएगी और कैंप लगाकर रोजगार दिया जाएगा।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि विधवा महिलाओं को ₹1000 का पेंशन दिया जाएगा. राज्य सरकार लड़कियों को पीजी से केजी तक शिक्षा मुफ्त मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में मेडल लाने वाले को सीधे नौकरी की जाएगी।

कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि आज शिक्षा के लिए बिहार के छात्र बाहर जाने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का अनुरोध किया लेकिन प्रधानमंत्री ने नहीं सुनी।

ये मुख्यमंत्री की हैसियत है प्रधानमंत्री के सामने। उन्होंने कहा कि बारहवीं कक्षा में 90% से ज्यादा नंबर लाने वाली छात्राओं को सरकार को स्कूटी देगी।

पर्यटन के क्षेत्र में कांग्रेस ने कई तीर्थाटन योजना शुरू करने की घोषणा की है। इनमें बिहार देवालय यात्रा योजना, सियाराम तीर्थाटन योजना, सूफी विकास योजना, बौद्ध अध्यात्म योजना, जैन शक्ति केंद्र योजना शामिल है।

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यूपी के हर गांव में बनेगा दलित कार्यकर्ताओं का समूह: प्रियंका

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priyanka gandhi

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए प्रत्येक गांव में पार्टी कार्यकर्ताओं का दलित संगठन तैयार किया जाएगा।

प्रियंका वाड्रा ने यह घोषणा उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के कार्यकर्ता सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए की। उनका कहना था कि दलितों के साथ राज्य में होने वाले भेदभाव का करारा जवाब दिया जाएगा और हर स्थिति में उनके सम्मान की रक्षा की जाएगी।

यह सम्मेलन प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष आलोक प्रसाद की रिहाई के बाद आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का मक़सद दलितों को अपने अधिकारों की रक्षा के करने और उनकी आवाज को बुलंद करना है।

उन्होंने कहा, “आने वाले समय में सामाजिक न्याय, संविधान और दलित छात्रों की छात्रवृत्ति बचाने तथा दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए प्रत्येक गांव में अनुसूचित जाति विभाग के कार्यकर्ताओं को एकत्र कर ग्राम संगठन बनाना है।”

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कृषि कानून किसान विरोधी, राजद गांधी मैदान में देगी धरना : तेजस्वी

बिहार में जहां मंडियों का सवाल है वह 2006 में ही बंद कर दिया गया। हालत ये हो गई है कि बिहार के किसान खेती छोड़ मजदूरी करने लगे हैं। जब मंडी खत्म हो गई तो किसान कमजोर होते गए।

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Tejashwi Yadav

पटना, 4 दिसंबर । बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नए कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए बिहार के किसानों को भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

राजद के नेता तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शनिवार को पटना के गांधी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठेंगे।

बिहार विधनसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि कानून काला कानून है और ये देश के खिलाफ है। उन्होंने बिहार के किसानों और किसान संगठनों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान, आने वाली पीढ़ियों और भविष्य को देखते हुए वे इस कानून के विरोध में सड़कों पर आएं और आंदोलन को मजबूत करें।

उन्होंने कहा, पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों में आक्रोश है। यह वही सरकार है जो किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करनी की बात करती है। लेकिन एमएसपी को खत्म कर रही है। कृषि को भी प्राइवेट हाथ को सौंप रही है, जिससे प्राइवेट कंपनियों से किसान खरीद बिक्री करेंगे।

उन्होंने कृषि कानूनों को किसान विरोधी कानून बताते हुए कहा कि किसानों को सही मूल्य मिलना चाहिए। कई जगहों पर कर्ज में डूबने से किसान आत्महत्या कर रहे हैं। जो अन्नदाता हैं उनके लिए इस तरह का कानून बनाना देश के खिलाफ है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी बड़ी समस्या सामने है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन हैंै। कोई भी फैसला जनता का होना चाहिए ना कि किसी व्यक्ति का। उन्होंने कहा कि कृषि कानून बनाने के पहले किसानों से राय नहीं ली गई और अब उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर एमएसपी समाप्त नहीं होना है, तो सरकार लिखकर क्यों नहीं दे रही है।

उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर कृषि कानून के इतने ही फायदे हैं तो देश भर में किसान इसके खिलाफ क्यों है, भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल ने किनारा क्यों किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और अभिनेता भी किसान के समर्थन में आगे आएं हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री कृषि रोड मैप की बात करते हैं लेकिन धान के एमएसपी की बात नहीं करते। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि बिहार में अब तक किसी जिले में धान की खरीदी प्रारंभ नहीं की गई है।

बिहार में जहां मंडियों का सवाल है वह 2006 में ही बंद कर दिया गया। हालत ये हो गई है कि बिहार के किसान खेती छोड़ मजदूरी करने लगे हैं। जब मंडी खत्म हो गई तो किसान कमजोर होते गए।

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किसानों के मुद्दे पर भाजपा, जेजेपी में राजनीतिक दरार बढ़ी

जेजेपी के 10 विधायकों के अलावा, सात निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा को समर्थन दिया था, जिससे वह 90 सदस्यीय विधानसभा में 57 सीटों पर पहुंच गई थी।

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JJP and BJP

चंडीगढ़, 4 दिसम्बर । केंद्र सरकार और किसानों के बीच चौथे दौर की वार्ता बेनतीजा रही और इसके साथ ही हरियाणा में भाजपा और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच राजनीतिक खाई चौड़ी होती जा रही है।

अब, मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सिर्फ एक साल की पुरानी सरकार में विवाद का मुद्दा किसानों के खिलाफ हिंसा, बैरिकेड्स तोड़ने और सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य निर्वहन में व्यवधान पैदा करने के सैकड़ों मामले दर्ज करने को लेकर है।

जेजेपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी बनाए हुए हैं, उनके फायरब्रांड छोटे भाई दिग्विजय चौटाला सरकार को लगभग हर दिन आड़े हाथों ले रहे हैं।

उन्होंने मांग की है कि किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए।

दिग्विजय चौटाला ने गुरुवार को मीडिया से कहा, हम मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से बात करेंगे कि वे किसानों के खिलाफ मामलों को वापस लेने के लिए कहें ताकि स्थिति खराब न हो और किसी भी तरह का अविश्वास पैदा न हो।

उन्होंने कहा, शांतिपूर्वक विरोध करना किसानों का मौलिक अधिकार है।

जेजेपी की युवा शाखा के प्रमुख दिग्विजय ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता सरकार के साथ किसानों की बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पार्टी बैठक के बाद अपने भविष्य के कदम पर चर्चा करेगी।

जेजेपी मुख्य रूप से एक ग्रामीण जाट केंद्रित पार्टी है, जिसके किसान वोटबैंक हैं। जाट, जो एक प्रमुख कृषक समुदाय है, राज्य में इसकी आबादी 28 प्रतिशत है।

प्रदर्शनकारी किसानों के साथ पहली बार खुलकर सामने आते हुए, जेजेपी के राष्ट्रीय प्रमुख और पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला ने 2 दिसंबर को कहा कि केंद्र को लिखित रूप में, प्रदर्शनकारी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक आश्वासन देना चाहिए।

अजय चौटाला ने मीडिया से कहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि एमएसपी जारी रहेगा, तो उस लाइन को जोड़ने में क्या हर्ज है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस लेने के लिए पार्टी के भीतर जेजेपी पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व किसानों के साथ अब तक चार दौर की वार्ता के बाद भी तीन नए कृषि कानूनों को लेकर कड़ा रुख दिखा रहा है।

किसान काले कृषि कानूनों को पूरी तरह से खत्म करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने को तैयार है।

जेजेपी के एक पदाधिकारी ने शुक्रवार को आईएएनएस से कहा, पिछले नौ दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर जमा हुए किसानों को बड़ी संख्या में किसान और कर्मचारी संगठनों और यहां तक कि स्थानीय लोगों का समर्थन मिलने के बीच सरकार छोड़ने की मांग जोरशोर से उठ रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए 130 खाप पंचायतों (सामुदायिक न्यायालयों) का निर्णय पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

अजय चौटाला चार बार के मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे हैं।

पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि जब तक पार्टी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री हैं, वे एमएसपी को बंद नहीं होने देंगे।

पार्ची ने कहा कि अगर किसानों को एमएसपी के कारण नुकसान उठाना पड़ा, तो चौटाला अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

जेजेपी के 10 विधायकों के अलावा, सात निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा को समर्थन दिया था, जिससे वह 90 सदस्यीय विधानसभा में 57 सीटों पर पहुंच गई थी।

हालांकि, निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान पहले ही किसानों के आंदोलन के कारण राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस ले चुके हैं।

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