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छत्तीसगढ़: पुल से नीचे गिरी बस, 13 की मौत, 53 घायल

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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में बीती रात एक यात्रियों से भरी बस पुल से नीचे गिर गई।

बस में सवार 13 लोगों की मौत हो गई जबकि 53 अन्य लोगों के घायल होने की बात कहीं जा रही हैं। बलरामपुर जिले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दलधोवा घाट के करीब यात्री बस एक सूखे नाले पर बने पुल से नीचे गिर गई।

यह बस झारखंड के गढ़वा से रायपुर जा रही थी। जब बस बलरामपुर जिला मुख्यालय से निकल कर रायपुर की ओर आ रही थी, तभी अचानक दलधोवा घाट के नजदीक बस के सामने एक एक युवक मोटरसाइकिल लेकर आ गया। मोटरसाइकल के आते ही ड्राईवर अंकंट्रोल हो गया और बस पुल से नीचे जा गिरी।

इस हादसे की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य शुरू किया। फिलहाल, मिली जानकारी के मुताबिक 13 लोगों की मौत हो गई है जबकि 16 और की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को बलरामपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस घटना पर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने गहरा शोक जताया है। साथ ही जिला प्रशासन को सभी घायलों को उचित ट्रीटमेंट देने की सुविधा देने के आदेश भी जारी किए हैं।

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यूपी के मेरठ में दिल दहला देने वाली वारदात, बोरी में 15 टुकड़ों में खून से सनी मिली महिला की लाश

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उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध का सिलसिला जारी है। मेरठ में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।

बताया जा रहा है कि लिसाड़ी गेट थाना इलाके के श्मशान घाट के पास बोरी में एक महिला की 15 टुकड़ों में लाश मिली है। बोरी में महिला की खून से सनी लाश मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।

खबरों के मुताबिक, फातिमा गार्डन कॉलोनी के पास श्मशान घाट के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान बच्चों ने कुत्तों को खून से सनी प्लास्टिक की बोरी को खींचते हुए देखा। इसके बाद बच्चों ने इसकी सूचना परिजनों को दी। जैसे ही लोगों को लाश की सूचना मिली बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

घटना की जानकारी मिलने पर एसपी सिटी अखिलेश नारायण पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बोरी खोलकर देखा तो सभी के होश उड़ गए। बोरी के अंदर एक महिला की लाश के करीब 15 टुकड़े मिले। पुलिस शव के टुकड़ों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह के मुताबिक, महिला की उम्र करीब 35 साल रही होगी। पुलिस का मानना है कि करीबी व्यक्ति ने पहले हत्या की वारदात को किसी घर में अंजाम दिया।

इसके बाद लाश को कई टुकड़े कर बोरी में भरकर श्मशान घाट के पास फेंकर फरार हो गया। लाश पर कपड़े भी नहीं थे। ऐसे में रेप के बाद हत्या की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

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‘बहुत खराब’ लेवल पर दिल्ली की हवा

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सर्दियां जैसे-जैसे करीब आ रही हैं दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही है। शुक्रवार को भी दिल्ली-एनसीआर जहरीले धुंध की चादर में लिपटा हुआ है। आज तो कई इलाकों में धुंध इतनी ज्यादा थी कि पास की चीजें भी नजर नहीं आ रही थीं। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो दिल्ली के कई इलाकोें में यह शुक्रवार सुबह 400 के पार और अधिकतर इलाकों में 300 के पार दर्ज किया गया। 

दिल्ली के अलीपुर में आज सुबह छह बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 436 दर्ज किया गया जो गंभीर श्रेणी में आता है। वहीं आनंद विहार आदि इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार ही रहा।
इंडिया और आसपास सैर करने वालों ने तो ये भी कहा कि आज तो उन्हें इंडिया गेट दिखाई ही नहीं दे रहा जबकि रोज इसी जगह से इंडिया गेट आसानी से दिखता था।

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दिल्ली हिंसा : ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने सरगना बताया

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Tahir-Hussain

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर । दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा तीन मामलों में दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली के दंगों में उनकी सक्रिय भूमिका के सबूत के आधार पर याचिकाओं को खारिज कर दिया और यह भी कहा कि उन्होंने धन और अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए ‘सरगना’ की तरह हिंसा की योजना बनाई।

पूर्व राजनीतिक नेता ने दिल्ली दंगों के मामले से संबंधित तीन मामलों में जमानत की मांग की थी। इन तीनों के अलावा हुसैन सांप्रदायिक दंगों के आठ अन्य मामलों में भी अभियुक्त माने गए हैं।

गौरतलब है कि फरवरी में हुई हिंसा में सीएए समर्थकों और सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी। हिंसा में 53 लोग मारे गए और 748 लोग घायल हुए थे।

उनकी तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए एडिशनल सेशंस न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा, “यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपने धन और राजनीतिक दबदबे का इस्तेमाल सांप्रदायिक संघर्ष की योजना बनाने, उकसाने और उन्हें भड़काने में सरगना के रूप में काम किया। मुझे लगता है कि रिकॉर्ड में पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं, जो साबित करते हैं कि आवेदक मौके पर मौजूद था और दंगाइयों को उकसा रहा था।

कोर्ट ने आगे कहा कि हुसैन ने दंगाइयों को ‘मानव हथियारों’ के रूप में इस्तेमाल किया, जो उनके इशारे पर किसी को भी मार सकते थे। न्यायाधीश ने आगे कहा, “दिल्ली दंगा 2020, बड़ी वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा वाले देश की अंतरात्मा में एक गहरा घाव है। आवेदक के खिलाफ आरोप अत्यंत गंभीर हैं।”

कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र गवाहों के रूप में पर्याप्त साक्ष्य हैं, जिनका यह मानना है कि आवेदक अपराध के स्थान पर मौजूद था और दंगाइयों को प्रेरित कर रहा था।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक प्रसिद्ध अंग्रेजी उद्धरण की याद आ रही है, जिसमें कहा गया है कि जब आप अंगारे से खेलना चाहते हैं, तो आप हवा को दोष नहीं दे सकते कि चिंगारी थोड़ी दूर तक ही जाए और आग फैल जाए। ऐसे में आवेदक का यह कहना कि उसने शारीरिक तौर पर दंगे में भाग नहीं लिया, इसलिए दंगों में उसकी कोई भूमिका नहीं है, यह उचित नहीं है।”

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आगे कहा, “यह रिकॉर्ड किया जाए कि इन मामलों में सार्वजनिक गवाह एक ही इलाके के निवासी हैं और यदि इस समय आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो आवेदक द्वारा उनको धमकी देने या उन्हें डराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मुझे जमानत देना उपयुक्त नहीं लग रहा।”

वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. मेनन और अधिवक्ता उदित बाली ने हुसैन का प्रतिनिधित्व करते हुए तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल को ‘जांच एजेंसी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा कानून का दुरुपयोग करके उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से’ झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।

विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) मनोज चौधरी ने तीनों जमानत याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि हुसैन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड घटनाओं की तारीखों पर अपराध स्थल पर और उसके आसपास दर्ज हुए हैं, जो उनकी मौजूदगी की पुष्टि करते हैं।

–आईएएनएस

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