भारतीय मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) ने यूक्रेन से भारत लौट रहे छात्रों के लिए केंद्र की मोदी सरकार से शिक्षा ऋणों का उदारतापूर्वक पुनर्गठन करने की मांग की है। पार्टी के अनुसार यूक्रेन में लगभग 20,000 भारतीय छात्रों में से एक तिहाई छात्रों ने शिक्षा ऋण लिया था और अब वे ब्याज व पुनर्भुगतान के बोझ से दबे हैं। सीपीआईएम नेता व पूर्व सांसद सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन में लगभग 20,000 भारतीय छात्रों में से कई ने शिक्षा ऋण लिया था और अब वे ब्याज व पुनर्भुगतान के बोझ से दबे हैं। पिछले 7 वर्षों में मोदी सरकार ने अपने साथियों द्वारा लिए गए 10.72 लाख करोड़ ऋण को बट्टे खाते में डाल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी को इन शिक्षा ऋणों का उदारतापूर्वक पुनर्गठन करना चाहिए या उन्हें माफ करना चाहिए।

 

यूक्रेन से निकल कर भारत आ रहे छात्र जनवरी तक 263,057 करोड़ के ऋण चुकाने को लेकर चिंतित हैं, जोकि पिछले वर्ष से 24 फीसदी कम है। देश में डॉक्टर बनने वाले छात्र मुख्य रूप से यूक्रेन को चुनते हैं क्योंकि ये पाठ्यक्रम भारत में एक निजी कॉलेज की तुलना में काफी सस्ते हैं। खासतौर पर एमबीबीएस डिग्री के लिए शुल्क भारत के मुकाबले बहुत कम है। अपनी पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए छात्र अभूतपूर्व वित्तीय बोझ के तले दब गए हैं, क्योंकि उनके कॉलेज फिर से खुलने की संभावना जल्द आसार नहीं दिखाई देते है, लेकिन वे अपनी पढ़ाई के लिए लिए गए महंगे ऋणों से दुखी हैं।

 

देश छात्रों को शिक्षा ऋण के खिलाफ बीमा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है लेकिन इस स्थिति में बैंकरों के अनुसार ये भविष्य में डिफॉल्ट की संभावना से ग्रस्त स्थिति है, अगर ये छात्र अपना पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाते हैं और नौकरी नहीं मिल पाई तो जिन लोगों ने ऋण लिया है, सवाल इसी पर है।

 

–आईएएनएस

 

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