Browsing: ओपिनियन

Find out the views, opinions, analysis of our experts on entertainment, news, economy, science, spirituality and much more at WeForNews.

बेहतर शिक्षा और आजीवन शिक्षा – सभी के लिए सुलभ और सस्ती – डिजिटल रूप से इस दशक में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 8 ट्रिलियन डॉलर की भारी वृद्धि कर सकती है।

मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और संप्रभुता के प्रतीक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का बड़े पैमाने पर निजीकरण कर अपने देशी – विदेशी आकाओं के सामने आत्म समर्पण कर दिया है।

केन्द्र सरकार इस बात को लेकर बहुत सन्तुष्ट नज़र आती है कि ताज़ा कृषि क़ानूनों का अभी मुख्य रूप से…

मोदी युग की सबसे बड़ी पहचान यही हो गयी है कि यहाँ ‘मन की बात’ की तो भरमार है लेकिन ‘काम की बात’ को ढूँढ़ना मुहाल है। इसीलिए ‘टाइम’ और बोलिविया के अनुभवों से सीखना ज़रूरी है। देश बेचने वालों से निपटना ज़रूरी है।

दिलीप घोष ने बीते नवम्बर में रहस्योद्घाटन किया था कि ‘भारतीय नस्ल की गायों में एक खासियत होती है। इनके दूध में सोना मिला होता है और इसी वजह से उनके दूध का रंग सुनहरा होता है। उनके एक नाड़ी होती है जो सूर्य की रोशनी की मदद से सोने का उत्पादन करने में सहायक होती है। इसलिए हमें देसी गायें पालनी चाहिए।

आश्चर्य की बात तो यह भी है कि सरकार को नाख़ुश कर रहे 19 हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार तक़रीबन 90 फ़ीसदी आबादी से जुड़ा हुआ है। क्या यह माना जाए कि कोरोना संकट के आगे देश का सारा संवैधानिक ढाँचा चरमरा चुका है। हालात पूरी तरह से हाथ से निकल चुके हैं। सरकारों ने जनता को उसकी क़िस्मत के हवाले कर दिया है।

राजनीति में हवा का रुख़ पलटने में ज़्यादा देर नहीं लगती। इसीलिए सभी राजनेता हर बात का राजनीतिकरण करने का मौक़ा ढूँढते रहते हैं। यह हवा जिसके ख़िलाफ़ होती है, वो हमेशा ‘इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’ की दुहाई देता रहता है। पहले से ही अर्थव्यवस्था ख़राब हालत में थी। लॉकडाउन ने बचे-खुचे को भी ध्वस्त कर दिया। ग़रीबों पर ऐसी मार पहले कभी नहीं पड़ी। इसीलिए रेल-भाड़े की पेशकश कांग्रेस के लिए टर्निंग प्वाइंट बन सकती है।

मुख्यमंत्रियों के साथ 27 अप्रैल को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो सबसे बड़ी बात कही, उसे…

वैसे तो सारी दुनिया में जनता की नब्ज़ को भाँपने के लिए अनेक सर्वेक्षण होते हैं, लेकिन अमेरिकी सर्वेक्षणों की…

अमेरिका की तुलना में, चीन ने वायरस पर प्रभावी ढंग से काबू पाया है। उसने अभूतपूर्व ढंग से महामारी-रोधी उपाय अपनाये हैं और दुनिया को इस महामारी के खिलाफ लड़ने के प्रति मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास का जोश भरा है।

क्या बीजेपी ने दिल्ली में अपने पुनर्निर्वाचित विधायक ओम प्रकाश शर्मा को सुपर पीएम बना दिया है? वर्ना वो कैसे…

हेमंत सोरेन ने ‘बदलाव यात्रा’ की शुरुआत संथाल परगना के साहिबगंज से की थी और इसका समापन रांची में हुआ। इस यात्रा के दौरान उन्होंने पूरे झारखंड के सुदूर इलाकों का दौरान किया और लोगों की समस्याएं सुनीं और उसके समाधान का वादा किया।

IT Cell की बदौलत तरह-तरह के झूठ, अफ़वाह और विरोधियों के चरित्र-हनन का सहारा लेकर बीजेपी ने 2014 में सबको धूल चटा दी। तब तक उसका IT Cell अभेद्य दुर्ग की तरह अपराजेय बन चुका था। 2015 में आम आदमी पार्टी ने भी बीजेपी के आज़माये हुए इसी नुस्ख़े को और सफलता से अपनाया।

शिवसेना को अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने दो परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन लेना पड़ेगा। ऐसे में यहां अब सवाल यह उठता है कि हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे की शिवसेना उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की अनुवाई में सत्ता के लिए कट्टर हिंदुत्ववाद का रास्ता छोड़ देगी और सेकुलर शब्द को ‘छद्म’ कहने वाली शिवसेना सेकुलर रास्ता अख्तियार करेगी?

“इससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि मतदाता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार को प्राथमिकताएं तय करनी होंगी और इन क्षेत्रों में अधिक निवेश करना होगा।”

कभी पाकिस्तान के सबसे ख़ास दोस्त रहे अमेरिका के सामने अब धर्मसंकट है। अमेरिका को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ये स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी पुरानी नीति ग़लत थी।

घंटों की चुप्पी के बाद भारत ने पुष्टि की कि उसका एक पायलट कार्रवाई में लापता है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। इस बात की भी पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या यह एफ-16 है।

प्रमुख राज्यों और सहयोगियों को संभालने वाले एक सशक्त कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की सत्ता के…

क्या प्रियंका वाड्रा, राहुल गांधी का ब्रहमास्त्र हैं, जिनका निशाना केवल भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) है? या कांग्रेस अध्यक्ष के निशाने…

प्रियंका की चारुता और लंबी कद-काठी व उनके साड़ी पहनने का ढंग बिल्कुल इंदिरा गांधी जैसा है। प्रियंका की शख्सियत सार्वजनिक जीवन के लिए काफी आशावादी है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा)…

ताज़्ज़ुब की बात है कि क़ानून मंत्री और केन्द्र तथा बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों में बैठे गणमान्य लोग, सार्वजनिक तौर पर ऐसे बयान देते रहे हैं, जिनसे साफ़ तौर पर कोर्ट के इन आदेश की अनदेखी होती है। ये सीधे-सीधे अदालत की अवमानना है।

चतुर्वेदी का आरोप है कि केंद्र की सरकार बदलते ही बुंदेलखंड के हालात को बदलने वाली इस परियोजना को ही बंद करने का फैसला ले लिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सब इसलिए हो गया, क्योंकि राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकारें थीं।

उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गांव के गरीबों के लिए समर्पित कर दिया। इसीलिए देश के लोग मानते रहे हैं कि चौधरी चरण सिंह एक व्यक्ति नहीं, विचारधारा का नाम है।

“महान टीम असाधारण परिणाम प्रदान करती है, मैं टीम एआईसीसी, हमारे महासचिव, राज्य-प्रभारी, सचिवों और अन्य सभी असंगत नायकों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपनी जीत हासिल की।”

देश के प्रधानसेवक से शुरू करें तो नरेंद्र मोदी ने संसद में जिस अंदाज में कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना शूर्पणखा से की और इस पर जिस अंदाज में संसद में बैठे नेताओं ने ठहाके लगाए, यह दृश्य सारी हकीकत बयान कर देता है।

साल 2003 की मिस इंडिया का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न पर लगाम लगाने व समाज में सुधार और बदलाव लाने के लिए घर से शुरुआत करनी चाहिए और बाहर के बजाय सबसे पहले घर में झांककर देखना चाहिए कि घर में क्या हो रहा है।

कथाकार वीणा का कहना है कि पुरस्कार एक उपलब्धि होती है, इसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन साहित्य सृजन की चीज है, जिसका सही मूल्यांकन पाठक ही करते हैं।

“अब लोग कंटेंट के भूखे हैं..चीजें बदल गई हैं। पहले लोग अक्सर बड़े पर्दे पर बस अपने पसंदीदा सितारों को देखने के लिए थिएटर जाते थे, उन्हें कहानी से कोई मतलब नहीं होता था और अब वही लोग हैं जो कहानी के बारे में जानना चाहते हैं। वे फिल्म की समीक्षा पढ़ते हैं और उसके बाद किसी एक फिल्म को देखने के लिए थिएटर पर जाते हैं।”

सत्यव्रत चतुर्वेदी के पिता बाबूराम चतुर्वेदी और मां विद्यावती चतुर्वेदी कांग्रेस की प्रमुख नेताओं में रही हैं। दोनों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, इंदिरा गांधी के काफी नजदीक रहे।

अब तक सवा सौ करोड़ भारतवासियों के सामने 9, 20, 26 और 40 फ़ीसदी कम पर राफ़ेल सौदा करने का दावा किया जा चुका है! इसमें ग़ौर करने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा है, वैसे-वैसे राफ़ेल सौदे पर हुई बचत का आँकड़ा भी विकास के नये-नये कीर्तिमान बना रहा है! बिल्कुल पेट्रोल-डीज़ल, सीएनजी और रसोई गैस के क़ीमतों की तरह!

“यह केंद्र सरकार की साजिश है कि जो लोग आपसे सहमत नहीं हैं, उन्हें अलग-अलग तरह के लेबल दे दो, कभी उन्हें देशद्रोही करार दे दो, कभी हिंदू विरोधी कह दो। इस तरह किसी का अपमान कर, उन पर हमला कर घटिया लेबल लगाना लोकतंत्र नहीं है।”

इन्द्रेश कुमार सरीखे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक/प्रचारक/नेता का नज़रिया कितना संकुचित और मूर्खतापूर्ण हो सकता है, इसे समझने…

अब तो भीड़, पुलिस को भी पीट डालती है। क़ानून को हाथ में लेने वालों का पुलिस-अदालत कुछ नहीं बिगाड़ पाती। यही आलम दंगाइयों का भी होता है। उनके चेहरे पर भी भीड़ का मुखौटा ही होता है।

यदि भारत की जीडीपी एक दशक में दोगुनी हो गयी और वो कौन-कौन से देश हैं, जिनकी जीडीपी इसी दौरान भारत की जीडीपी से पहले दोगुनी हुई है?

साल 2016 में राजीव अग्रवाल नाम के ट्विटर हैंडल से मुझे धमकी दी गई थी कि तुम्हारे साथ निर्भया जैसा हाल होना चाहिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इन लोगों के मन में भय नहीं है। इन लोगों को जब तक सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक ये इस तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते रहेंगे।”

अपने अब तक के राजनीतिक करियर में मुखर्जी जिन मान्यताओं और मूल्यों पर कायम रहने के लिए जाने जाते रहे, क्या उन्हें ताक पर रखकर उनका नागपुर जाने का फैसला गलत था?

नई दिल्ली, 7 मई | मध्यप्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष कमलनाथ का कहना कि पार्टी में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री…

अभी तो संघ प्रमुख मोहन भागवत की ओर से तो ये यक्ष-प्रश्न उछाला ही नहीं गया है कि काँग्रेस के ज़माने में कितने बलात्कार और हत्याएँ होती थीं! राहुल गाँधी पहले अपनी चार पीढ़ियों के राज में हुए रेप का ब्यौरा दें, फिर उनके कैंडल-मार्च को गम्भीरता से लेने पर विचार किया जा सकता है!

बीते चार सालों में हमारे संवैधानिक लोकतंत्र की दो अहम विशेषताओं का पतन हुआ है। पहला, क़ानून के सर्वोपरि होने की धारणा पर हमले हुए हैं। दूसरा, क़ानूनी प्रक्रिया का सियासी मक़सद के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक के. पी. रामानुन्नी का कहना है कि भाजपानीत केंद्रीय सरकार अप्रत्यक्ष रूप से हिंदू सांप्रदायिक…

चालू गन्ना पेराई वर्ष 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में देशभर में चालू 504 चीनी मिलों में 15 जनवरी 2018 तक 135.37 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था।

देश की सभी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। यह एक खतरनाक खेल है। प्रधानमंत्री कालिदास की तरह व्यवहार कर रहे हैं, वह जिस शाखा पर बैठे हैं उसी को काटने की कोशिश कर रहे हैं।

हेगड़े, उस धूर्त भगवा रणनीति को हवा देना चाहते हैं, जिसके तहत कर्नाटक के मन्दबुद्धि और अशिक्षित हिन्दुओं में ये ज़हर भरा जा सके कि ‘तख़्त बदल देंगे, ताज बदल देंगे, कर्नाटक जीते तो संविधान बदल देंगे!’

साफ़ है कि 2012 में हमारे सुप्रीम कोर्ट पर भी वो आम धारणा हावी थी, जिसमें ये माना जाता है कि हमारे सारे के सारे नेता चोर हैं, सारी की सारी पार्टियाँ बेईमान हैं। जबकि हमारी नौकरशाही बड़ी ईमानदार और कर्तव्यपरायण है।

गुजरात मॉडल का हर वक़्त बख़ान करने वाले नरेन्द्र मोदी को गुजरात में प्रचार के लिए इतना अधिक वक़्त लगाना पड़ा, मानो वो देश के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री हों। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान तो प्रधानमंत्री अपने ‘विकास के गुजरात मॉडल’ की बातें करने से भी कतराते रहे।

राजनीति में संख्या यानी अंकगणित, बहुत मायने रखती है। चुनाव में बीजेपी जीती है। हालाँकि गुजरात में उसकी संख्या कम…

असली हिन्दू और नकली हिन्दू, हिन्दू या ग़ैर-हिन्दू जैसी फ़िज़ूल की बातों में लोगों को उलझाया जाता है। झूठ फैलाया जाता है कि सरदार पटेल और सुभाष चन्द्र बोस से नेहरू की ठनी रहती थी। इन्हें पता ही नहीं है कि उस दौर के नेताओं में मतभेदों के बावजूद साथ चलने, एक-दूसरे का आदर करने तथा सही मायने में देश को आगे रखने का बेजोड़ संस्कार था। इन्हीं संस्कारों की वजह से काँग्रेस पार्टी दशकों तक जनता की चहेती बनी रही।

हिन्दूवाद एक जीवनशैली है। इसीलिए इसे विचारधारा के दायरे में नहीं बाँधा जा सकता। जब भी ऐसा करने की कोशिश की जाएगी, तब हिन्दूवाद की आत्मा नष्ट हो जाएगी।

जिन ट्रेनों को अब सुपरफास्ट बनाया गया है, उनमें पुणे-अमरावती एसी एक्सप्रेस, पाटलीपुत्र-चंडीगढ़ एक्सप्रेस, विशाखापट्टनम-नांदेड़ एक्सप्रेस, दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस, कानपुर-ऊधमपुर एक्सप्रेस, छपरा-मथुरा एक्सप्रेस, रॉक फोर्ट चेन्नई-तिरुचिलापल्ली एक्सप्रेस, बेंगलोर-शिवमोग्गा एक्सप्रेक्स, टाटा-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस, दरभंगा-जालंधर एक्सप्रेस, मुंबई-मथुरा एक्सप्रेस और मुंबई-पटना एक्सप्रेस शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐसे ‘नये भारत’ का वादा किया था जो भ्रष्टाचार रहित, कारोबार को प्रोत्साहित करने वाला और…

मुख्यमंत्री भले ही यह कहें कि राज्य की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं, मगर यह बात भी उतनी ही सही है कि राज्य के कई इलाकों की सड़कों पर चलना आसान नहीं है। आलम यह है कि यहां जरा से सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।

राष्ट्रपति कोविन्द ने टीपू सुल्तान के मामले में पार्टी लाइन से अलग हटकर अपना नज़रिया देश के सामने रखा है। इससे ज़ाहिर है कि बीजेपी समाज को बाँटने तथा हिन्दू-मुसलमान को आपस में लड़ाने के लिए नीचता की किसी भी हद्द को आसानी से पार कर सकती है।

बात 2013 के विधानसभा चुनाव की करें, तो समझ में आता है कि चुनाव से पहले राज्य के क्षत्रपों दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किस तरह पार्टी की जीत की बजाय अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में दिलचस्पी दिखाई थी।

कुरैशी दो और किताबों पर काम कर रहे हैं। इनमें से एक ‘फैमिली प्लानिंग इन इस्लाम’ और दूसरी ‘एलेक्टोरल रिफार्म्स इन साउथ एशिया’ है।

गुजरात में 24 मुख्यमंत्रियों में 16 मुख्यमंत्री सवर्ण जातियों- ब्राह्मण, बनिया और क्षत्रिय के रहे हैं, जबकि वर्चस्व वाली पाटीदार जाति छह अवसरों पर राज सिंहासन पर आरूढ़ हुई है।

फोरम फॉर दुर्गोत्सव के अध्यक्ष पार्थ घोष बताते हैं कि वास्तव में आयोजकों के लिए नई टैक्स प्रणाली ‘अस्पष्ट’ है। नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद बुरी तरह प्रभावित हुआ उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र इस साल विज्ञापन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

सदियों से सामाजिक सुधार की प्रक्रिया बहुत धीमी और कष्टकारी रही है। 500 साल पहले मार्टिन लूथर किंग ने कैथोलिक…

अरुं धति ने इस परमाणु परीक्षण की आलोचना करते हुए ‘द एंड ऑफ इमैजिनेशन’ शीर्षक से एक लेख लिखा, और इसके साथ ही राजनीतिक और सामाजिक चेतना से युक्त अरुं धति दुनिया के सामने आई।

वीडियो और तस्वीरों वाले साक्ष्य व रिपोर्टरों की व्यक्तिगत उपस्थिति डीजीपी के उस दावे को नकार रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि हरियाणा पुलिस के जवान डेरा समर्थकों का डटकर मुकाबला कर रहे थे।

पिछले 34 महीनों में राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में वरिष्ठ नौकरशाहों और अधिकारियों का स्थानान्तरण एक मजाक बन कर रह गया है। मुख्यमंत्री ने अपने दफ्तर में ही प्रमुख सचिवों एवं अन्य नौकरशाहों को कई बार बदला है।

बाबाओं और संतों के नाम पर अगर इसी तरह लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी मिलती रहेगी तो फिर देश और उसके संविधान का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उस स्थिति में हम एक राष्ट्र के निर्माण के बजाए ऐसे समाज का निर्माण कर रहे, होंगे जहां सदाचार की बजाय कदाचार अधिक होगा।

इस फैसले को लेकर मुस्लिम संप्रदाय भड़का हुआ है। वह आगे क्या कुछ कदम उठा सकता है, इसके बारे में पूछे जाने पर दयाल कहते हैं, “वे रिव्यू पेटीशन डाल सकते हैं, लेकिन इसमें भी कुछ गुंजाइश नहीं है। हां, संसद में कानून बनने के लिए बहस के दौरान वह कुछ सांसदों के हवाले से कह सकते हैं कि सरकार इस पर दखल न दे।”

अगले महीने हमारे प्रधानमंत्री और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे मिलकर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखेंगे, जिसकी रफ्तार 350 किलोमीटर…

शाह का बयान आने के बाद से 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके गौर और सरताज ने पूर्व में लिए गए फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं पार्टी के भीतर और बाहर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन दोनों नेताओं से झूठ बोला गया था?

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह चेतावनी जैसी होनी चाहिए, जो ऊपर से तो देश की अंदरूनी और बाह्य सुरक्षा के लिए स्पष्टत: खतरा नजर आती है, लेकिन वास्तव में यह देश की राजनीति में हिंदू राष्ट्रवाद की धाक जमाने के एजेंडे को ही पूरा करती है।

भारत को अभी निष्पक्ष मीडिया, स्वतंत्र न्यायपालिका, प्रमाणिक जाँच एजेंसियाँ, ईमानदार सरकारी अफ़सरों के अलावा एक ऐसे अर्थतंत्र की बेहद ज़रूरत है जिसे पुख़्ता बैंकिंग आधार की गति मिले।

बैंकों का 11 प्रतिशत क़र्ज़ा डूब चुका है। इससे क़र्ज़ पाना मुश्किल हो गया है। माँग में कमी होने की वजह से क़र्ज़ लेने की गतिविधि का बुरी तरह से प्रभावित होना बेहद चिन्ताजनक है। बेरोज़गारी की भरमार है। हर साल रोज़गार की चाहत रखने वालों की संख्या में 1.2 करोड़ लोगों का इज़ाफ़ा हो रहा है। लेकिन साल 2015 में जहाँ 1.35 लाख लोगों को रोज़गार मिला, वहीं 2016 में रोज़गार पाने वालों की तादाद सिर्फ़ 2.31 लाख रहा।