BSNL ग्राहकों को खुशखबरी, कॉल दरों में की 80 फीसदी की कटौती | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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BSNL ग्राहकों को खुशखबरी, कॉल दरों में की 80 फीसदी की कटौती

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सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल ने शुक्रवार को कहा कि उसने मोबाइल दर में 80 प्रतिशत की कमी देने वाली स्कीम का विस्तार करते हुए इसमें मौजूदा ग्राहकों को शामिल कर लिया है. यह 16 जनवरी से प्रभावी होगी.

इससे पहले, कंपनी ने नए ग्राहकों के लिए इस स्कीम की घोषणा की थी. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘पूर्व में बीएसएनएल ने अपने नए प्रीपेड मोबाइल ग्राहकों के लिए कॉल दर 80 प्रतिशत तक घटाई थी और अब इस स्कीम का विस्तार करते हुए इसमें मौजूदा प्रीपेड ग्राहकों को शामिल कर लिया गया है.

कंपनी ने कहा कि कॉल दरें प्रति मिनट और प्रति सेकेंड दोनों ही बिलिंग प्लान के लिए घटाई गई हैं. बीएसएनएल बोर्ड के निदेशक  आर.के. मित्तल ने कहा, ‘हमारी शुल्क दरें उद्योग में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी हैं. दो नए विशेष टैरिफ वाउचर्स भी लांच किए गए हैं.

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सीबीआई ने कैंब्रिज एनालिटिका के खिलाफ दर्ज किया केस, फेसबुक डाटा चोरी का है आरोप

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को 5.62 लाख भारतीय फेसबुक उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डाटा को कथित तौर पर इकट्ठा करने के लिए ब्रिटेन स्थित राजनीतिक परामर्श फर्म कैंब्रिज एनालिटिका के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

 एजेंसी ने इसी मामले में, देश से बाहर की एक अन्य कंपनी ग्लोबल साइंस रिसर्च (जीएसआरएल) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि फेसबुक-कैंब्रिज एनालिटिका डाटा चोरी मामले की सीबीआई जांच की जाएगी। सीबीआई को प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया कंपनी ने कहा था कि जीएसआरएल ने भारत में अवैध रूप से लगभग 5.62 लाख उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डाटा को एकत्र किया और इसे कैंब्रिज एनालिटिका के साथ साझा किया। 

आरोप है कि कंसल्टिंग फर्म ने इस डाटा का इस्तेमाल भारत में चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया था। मार्च 2018 में, कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म ने कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारियों, सहयोगियों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि फर्म ने उनकी अनुमति के बिना 50 मिलियन (पांच करोड़) से अधिक उपयोगकर्ताओं के फेसबुक प्रोफाइल से निजी जानकारी को इकट्ठा किया। सीबीआई ने इन आरोपों को लेकर कैंब्रिज एनालिटिका और जीएसआरएल के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।

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अंतरराष्ट्रीय

ट्विटर ने अमेरिका स्थित चीनी दूतावास का अकाउंट किया बंद

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ट्विटर ने अमेरिका स्थित चीनी दूतावास का ट्विटर अकाउंट बंद (लॉक) कर दिया है। दूतावास ने शिनजियांग के उइगर महिला के मामले में अपनी नीति का बचाव करने संबंधी ट्वीट किया था। सोशल मीडिया कंपनी ने इस ट्वीट को अमानवीय बताते हुए अकाउंट को बंद कर दिया है।

दूतावास ने शिनजियांग प्रांत के यातना शिविर में रखी गई महिलाओं के संबंध में दावा किया था कि अब वह स्वतंत्र हैं और बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं रह गई हैं। ट्वीट सात जनवरी को किया गया और ट्विटर ने अकाउंट को नौ जनवरी को बंद कर दिया।

ट्विटर के अधिकारी ने कहा कि किसी भी धर्म, जाति और नस्ल के बारे में अमानवीय टिप्पणी कंपनी की नीति के खिलाफ है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में कुछ भ्रम की स्थिति हुई है। यह दूतावास की जिम्मेदारी है कि वह गलत सूचना के बारे में सही स्थिति स्पष्ट करे और सच सामने लाए।

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गेमिंग इंडस्ट्री ने की ऑनलाइन स्किल गेम्स के लिए नीति आयोग के दिशा-निर्देशों की मांग

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प्रतीकात्मक तस्वीर

ऑनलाइन स्किल गेमिंग इंडस्ट्री ने सम्पूर्ण स्किल गेमिंग इंडस्ट्री को नियंत्रित करने हेतु नियमों को मानकीकृत करने के लिए नीति आयोग से एक नियामक की स्थापना करने की सिफारिश की है।

इस सिफारिश के तहत एक मसौदे का निर्माण किया गया है, जिसका शीर्षक ‘गाइडिंग प्रिंसिपल्स फॉर द यूनिफॉर्म नेशनल-लेवल रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स इन इंडिया’ है, जिसमें नीति आयोग ने फंतासी खेलों के लिए एक एकल-स्व-नियामक निकाय की स्थापना का सुझाव दिया है।

फंतासी स्पोर्ट्स के क्षेत्र में भारत का स्किल गेमिंग उद्योग को अलग-अलग राज्यों के तमाम कानूनों और नियमों से गुजरना पड़ता है। द ऑनलाइन रमी फेडरेशन समीर बर्डे ने कहा, केपीएमजी के मुताबिक, भारत की कुल ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री करीब 5,250 करोड़ रुपये की है, ऐसे में इनके लिए एक सटीक नियमन का होना एक बेहतरीन कदम है, लेकिन इसी के साथ यह भी समझना बहुत जरूरी है कि फैंटेसी स्पोर्ट्स पूरे स्किल गेमिंग इंडस्ट्री का महज एक हिस्सा मात्र है।

ऐसे में पूरे स्किल गेमिंग इंडस्ट्री का परिचालन करने के लिए समान विनियमन व्यवस्था के होने की जरूरत है। 1960 के दशक में सुप्रीम कोर्ट ने गैम्बलिंग से गेम्स ऑफ स्किल्स को अलग कर दिया और इस तरह के स्किल गेम्स के लिए संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखा। गेम्स ट्वेंटी फोर इनटु सेवेन के सीईओ और सह-संस्थापक भाविन पांड्या ने कहा, नीति आयोग को इस ओर अधिक गौर फरमाकर गेम ऑफ स्किल्स के लिए एक फ्रेमवर्क को सुझाने की जरूरत है।

फैंटेसी एक तरह का स्किल गेम है, जबकि मीडिया में इसके और अन्य गेम्स ऑफ स्किल्स के बीच अंतर किया गया है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इसे एक ही माना गया। उन्होंने आगे कहा, कानूनन फैंटेसी स्पोर्ट्स और अन्य स्किल गेमों में कोई अंतर नहीं है, बल्कि रमी जैसे कुछ स्किल गेमों के पक्ष में तो सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं, जबकि फैंटेसी के पास बस एक-दो उच्च न्यायालयों के ही फैसले हैं।

इंडस्ट्री का मानना है कि भारत के पूरे स्किल गेमिंग इंडस्ट्री के लिए मानकीकृत नियमों के होने से बड़ी संख्या में मौजूद अवैध ऑपरेटर्स खत्म हो जाएंगे, जिनका अभी भारतीय बाजारों में बोलबाला है। इस कदम से 2025 तक सरकार को सालाना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के रूप में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आर्थिक मदद मिलेगी और साथ ही प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हजारों की संख्या में रोजगार भी पैदा होंगे।

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