मनोरंजनजन्मदिन विशेष : बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं 5 बार नेशनल अवॉर्ड पाने वाले गीतकार जावेद अख्तर

Abhishek KumarJanuary 17, 2018681 min

हिंदी सिनेमा के बेहतरीन गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख़्तर साहब आज अपना 73वां जन्मदिन मना रहें है। 17 जनवरी, 1945 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के खैराबाद कस्बे में जन्में जावेद के बचपन का नाम ‘जादू’ है। आज भी उनकी पत्नी शबाना उन्हें इसी नाम से पुकारती हैं।

javed akhtar

हजारों रोमांटिक गाने लिखने वाले गीतकार अख़्तर साहब ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे, जहां हर कोई शब्दों से खेलता था। ऐसे में उनका लेखक बनना तो लाजमी था। इनके पिता जान निसार अख्तर हिंदी सिनेमा के फेमस गीतकार थे और उनकी मां सैफिया अख्तर गायिका-लेखिका थीं। लेखन की कला जावेद में भी बचपन से ही थी, वे भी बचपन में ही कविताएं और गाने लिखा करते थे। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि स्कूल के समय लोग उनसे लव लेटर लिखवाने आया करते थे।

जावेद अख़्तर ने बॉलीवुड कैरियर की शुरुआत बतौर डायलॉग राइटर की थी, लेकिन बाद में यश चोपड़ा की जिद पर वह स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार बने। सलीम-जावेद की जोड़ी ने कई फिल्मों की कहानी लिखी, इनमें ‘ज़ंजीर’, ‘त्रिशूल’, ‘दोस्ताना’, ‘सागर’, ‘काला पत्थर’, ‘मशाल’, ‘मेरी जंग’ और ‘मि. इंडिया’, ‘दीवार’, ‘शोले’ जैसी फ़िल्में शामिल हैं।सलीम-जावेद की जोड़ी ने ही अमिताभ के करियर को निखारा था और उन्हें उस दौर का सबसे उम्दा कलाकार बना दिया।

salimjavedmidday

70 के दशक में स्क्रिप्ट राइटर्स का नाम फ़िल्मों के पोस्टर पर नहीं दिया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद ने बॉलीवुड में ऐसी कामयाबी पायी कि तब फ़िल्मों के पोस्टर्स पर राइटर्स का भी नाम लिखा जाने लगा। जावेद अख़्तर को 14 बार फ़िल्मफेयर अवॉर्ड मिला है। इनमें सात बार उन्हें बेस्ट स्क्रिप्ट के लिए और सात बार बेस्ट लिरिक्स के लिए अवॉर्ड दिया गया। जावेद अख़्तर को 5 बार नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। भारत सरकार ने सन् 2007 में इन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

जावेद सामाजिक ,राजनीतिक जिवन में भी बहुत सक्रिय रहते है। देश और दुनिया के प्रासंगित मुद्दों पर वे अक्सर बोलते रहते है। किसी भी सामाजिक और सार्वजनिक सभा में वे बेहद ही सहज और सरल रहते है। जावेद कहते हैं कि लोग ट्रांसमीटर की तरह होते हैं इसलिए जिससे मिले अदब से मिले।

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