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अमूल ने फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को ‘लड़ता पहलाज’ बना कर चुटकी ली

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मुंबई: देश की प्रासंगिक घटनाओं पर समय-समय पर विशाल पोस्टर विज्ञापनों से गुदगुदाने वाले भारतीय डेयरी ब्रांड अमूल को-ऑपरेटिव लिमिटेड ने अब ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माताओं और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी के बीच चल रही खींचतान पर व्यंग्य करते हुए ध्यान खींचा है। अमूल को-ऑपरेटिव लिमिटेड ने ‘उड़ता पंजाब’ की सेंसरशिप से संबंधित विवाद पर एक विशेष पोस्टर विज्ञापन निकाला है।

अमूल ने अपने नए पोस्टर विज्ञापन में ‘टॉमी सिंह’ (फिल्म में शाहिद कपूर का किरदार), एक डॉक्टर (करीना कपूर), एक पुलिसकर्मी (दिलजीत दोसांझ) और अमूल गर्ल पर आधारित कार्टून दिखाया है। ये सभी कार्टून किरदार विज्ञापन में मौजूद एक बड़ी सी कैंची को देख उलझे नजर आ रहे हैं। यह कैंची यकीनन फिल्म से कुछ दृश्य काटने की मांग करने वाले सेंसर बोर्ड का सांकेतिक रूप है। विज्ञापन पर अंग्रेजी में बड़े अक्षरों में ‘लड़ता पहलाज’ लिखा है।

‘उड़ता पंजाब’ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष निहलानी द्वारा इसमें 89 कट लगाने का फरमान सुनाने के बाद से सुर्खियों में है। निहलानी ने फिल्म के निर्माताओं से इसमें कट लगाने को कहा है, जिनमें से एक अनुराग कश्यप भी हैं। फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ 17 जून को रिलीज होनी है।

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हम आर्मी ऑपरेशन नहीं, बेगुनाहों को मारे जाने के खिलाफ: फारूक अब्दुल्ला

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने संसद परिसर मे कहा कि हम सेना की कार्रवाई के खिलाफ नहीं है।

अब्दुल्ला ने कहा कि हम आर्मी ऑपरेशन विरोध नहीं करते हैं लेकिन बेगुनाहों को निशाना बनाया जाता है तो हम उसकी मुखालफत करते हैं। 18 जुलाई को शोपियां के आशिमपोरा गांव में तीन युवकों के सेना ने एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। जांच में सेना ने पाया है कि फर्जी तरीके से तीन मजदूरों को सेना के जवानों ने आतंकी बताकर मार दिया था। सेना ने इन जवानों पर कार्रवाई की बात भी कही है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल्ला ने ये कहा है।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जम्मू और कश्मीर में कोई प्रगति नहीं हो रही है। यहां के लोगों के पास 4G की सुविधा नहीं है। वर्तमान समय में वे कैसे आगे बढ़ेंगे, जबकि देश के बाकी हिस्सों में इंटरनेट पर हर सुविधा उपलब्ध है।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, आर्मी ने ये मान लिया है कि जो तीन लड़के शोपियां में सेब तोड़ने के काम से आए थे, उन्हें बेगुनाह मारा गया है। मुझे खुशी है कि आर्मी इस पर एक्शन ले रही है। इसके साथ-साथ जो औरत सचिवालय के पास मारी गई मैं चाहता हूं कि उसकी भी ज्युडिशियल इनक्वायरी की जाए। हम कहना चाहते हैं कि ऑपरेशन्स के खिलाफ हम लोग नहीं है। जहां बेगुनाह मारा जाता है हम लोग उसके खिलाफ हैं।

बता दें कि 18 जुलाई को आशिमपोरा में हुए एनकाउंटर की जांच में सेना को अपने जवानों के खिलाफ सबूत मिले हैं और इसके बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आर्मी ने बताया कि इस एनकाउंटर के दौरान जवानों ने आर्म्ड फोर्सस स्पेशल पावर एक्ट के तहत मिली शक्तियों का उल्लंघन किया। इस ऑपरेशन में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के निर्देशों का भी उल्लंघन किया गया।

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गोवा विस्फोट मामले में 6 लोग हुए बरी

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Bombay High Court

पणजी, 19 सितंबर (आईएएनएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने गोवा मुख्यालय वाली सनातन संस्था से जुड़े 6 लोगों को दोषमुक्त करार दिया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वकील प्रवीण फलदेसाई ने संवाददाताओं से कहा कि विनय तालेकर, धनंजय अष्टेकर, प्रशांत अष्टेकर, विनायक पाटिल, प्रशांत जुवेकर और दिलीप मझगांवकर को ‘संदेह का लाभ’ मिला और उन्हें बरी कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “आज हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश द्वारा बम विस्फोट मामले में दोषमुक्त करार दिए गए आदेश के खिलाफ एनआईए की अपील पर फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने अपील सुनी और कहा कि आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाए।”

बता दें कि 16 अक्टूबर, 2009 को आरोपी मलगोंडा पाटिल और योगेश नाइक मार्गो में एक दिवाली पंडाल में आईईडी ले जा रहे थे, तभी इसमें दुर्घटनावश विस्फोट हो गया था और दोनों की मौत हो गई थी।

शुरुआत में मामले की की जांच गोवा पुलिस अपराध शाखा द्वारा की गई थी, लेकिन बाद में उसे एनआईए को सौंप दिया गया।

इस मामले में 11 व्यक्तियों पर साजिश में भाग लेने का आरोप लगाया गया था, जिसमें दो मृतक भी शामिल थे। वहीं तीन व्यक्ति अभी भी फरार हैं।

31 दिसंबर, 2013 को गोवा की एक विशेष अदालत ने मामले में सनातन संस्था को फंसाने के लिए एनआईए पर ‘हेरफेर’ करने का आरोप लगाते हुए तालेकर, धनंजय और प्रशांत अष्टेकर, पाटिल, जुवेकर और मझगांवकर को बरी कर दिया था।

वकील ने कहा, “हम गोवा और पूरे भारत में आतंक फैलाने के लिए इस विस्फोट को अंजाम देने के संस्थान के मकसद को साबित करना चाहते थे, लेकिन अदालत ने कहा कि कोई सबूत नहीं था।”

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स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी है कि पीतमपुरा निवासी स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल ने राजीव शर्मा को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उनके पास कुछ रक्षा संबंधित खुफिया दस्तावेज पाए गए थे। 

अधिकारियों ने दावा किया है कि पत्रकार के कब्जे से सेना से संबंधित कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल वह छह दिन की रिमांड पर है। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी पत्रकार चीन के लिए जासूसी कर रहा था।

स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि राजधानी के पीतमपुरा निवासी राजीव शर्मा कई अखबारों में काम कर चुका है। उसे गत 14 सितंबर को गिरफ्तार किया था और अगले दिन कोर्ट में पेश कर छह दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में एक और पत्रकार से पूछताछ चल रही है।

पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि राजीव शर्मा चीन के लिए जासूसी कर रहा था। उसके कब्जे से जो कागजात मिले हैं, वह उस देश को देने वाला था। इस बात के भी सबूत मिले हैं कि आरोपी पहले कुछ दस्तावेज दे चुका है और इसकी एवज में पैसे लिए हैं।

बताया जा रहा है कि पत्रकार के खिलाफ विदेश मंत्रालय को भी शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है। राजीव शर्मा केे साथ ही एक चीनी और उसका नेपाली साथी भी गिरफ्तार हुआ है जो उसे फर्जी (शेल) कंपनियों के जरिए मोटा पैसा देते थे।

स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने ये भी बताया कि राजीव शर्मा ने चीनी खुफिया विभाग को 2016 से 2018 के बीच में रक्षा और रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वह चीनी खुफिया अधिकारियों से अलग-अलग देशों के अलग अलग ठिकानों पर मिलता था।

डीसीपी ने ये भी बताया कि उसके दो साथी चीनी महिला और नेपाली युवक की महिपालपुर में कंपनी है, जहां से वो चीन को दवाइयां एक्सपोर्ट करते हैं। चीन से भेजे गए पैसे यहां एजेंट को दिए जाते हैं। जांच में पता चला है कि पिछले एक साल में 40-50 लाख रुपये पत्रकार को दिए गए हैं।

डीसीपी यादव ने ये भी कहा कि राजीव शर्मा के पास पत्रकारिता का 40 सालों का अनुभव है। भारत के कई समाचार पत्रों में काम के साथ ही राजीव ने चीन की मीडिया एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के लिए भी फ्रीलांस पत्रकारिता की है।

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