राष्ट्रीयबंगाल विधानसभा सत्र शुरू होते ही राज्यपाल के भाषण पर टिकी सबकी निगाहें

IANSJuly 2, 20212871 min

पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनखड़ और तृणमूल कांग्रेस की सरकार के बीच विवाद का पारा चढ़ने के साथ ही शुक्रवार को विधानसभा में राज्य के संवैधानिक प्रमुख के चुनाव के बाद सभी का ध्यान उद्घाटन भाषण पर होगा। धनखड़ दोपहर 2 बजे भाषण का वाचन शुरू करेंगे। वह पहले ही भाषण के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जता चुके हैं और इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा चाहते हैं।

 

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल को अवगत कराया था कि भाषण को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और इसे बदला नहीं जा सकता है। अब देखना होगा कि राज्यपाल राज्य द्वारा तैयार किए गए भाषण पर अड़े रहते हैं या उससे विचलित होते हैं।

 

तृणमूल कांग्रेस सरकार और राज्यपाल के बीच तनाव तब बढ़ गया जब ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल भ्रष्ट हैं और उनका नाम जैन हवाला मामले में आया है।

 

धनखड़ ने तुरंत आरोप लगाया कि आरोप विधानसभा में उनके द्वारा पढ़े जाने वाले भाषण के कुछ हिस्सों पर उनकी (धनखड़ की) आपत्ति पर उनकी आवेग प्रतिक्रिया का परिणाम था।

 

धनखड़ ने कहा, “मैंने पाया कि कोई भी उस भाषण के कुछ हिस्सों पर विश्वास नहीं करेगा, जो मुझे बजट सत्र के पहले दिन देना था। मैंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर उनसे कल भाषण पर विचार-विमर्श के लिये कुछ समय देने के लिए कहा ताकि हम एक हो सकें। उन्होंने उसके तुरंत बाद मुझे फोन किया और कहा कि भाषण को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मैंने उनसे विचार-विमर्श के लिए कहा। उन्होंने मुझसे कहा कि वह मेरे पास वापस आ जाएगी।”

 

कोलकाता हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा, स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल को विधानसभा के विशेष सत्र में जरूर शामिल होना चाहिए, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है जो कहता हो कि वह अपनी मर्जी से नहीं बोल सकते। अनुच्छेद 176 विधानसभा के चुनाव के बाद पहले सत्र की शुरूआत में राज्यपाल द्वारा विशेष अभिभाषण के बारे में बताता है। ऐसा कोई कठोर नियम नहीं है कि उन्हें राज्य द्वारा अनुमोदित भाषण को पढ़ना पड़े।”

 

धनखड़ के समर्थन में, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल और भाजपा नेता तथागत रॉय ने ट्वीट कर कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि विधानसभा में राज्यपाल के भाषण को राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया हो। उन्होंने कहा, “इस पर कोई सुस्थापित परंपरा भी नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुव धरम वीरा इससे विचलित हुए और मैंने त्रिपुरा में ऐसा किया। कुछ विधायक चिल्लाए। कौन परवाह करता है?”

 

राज्यपाल-तृणमूल के आमने-सामने के अलावा अन्य मुद्दे भी हैं जिन पर शुक्रवार को विधानसभा में बहुत बारीकी से विचार किया जाएगा। यह भी देखना होगा कि भाजपा के टिकट पर मार्च-अप्रैल विधानसभा चुनाव जीतने वाले, लेकिन बाद में पिछले महीने तृणमूल का दामन थामने वाले दिग्गज नेता मुकुल रॉय को कौन सी सीट मिलती है। रॉय ने खेमे बदल लिए लेकिन अभी तक भगवा पार्टी के विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

 

सुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी पहली बार विधानसभा में आमने-सामने होंगे। कभी बनर्जी के समर्थक माने जाने वाले अधिकारी ने विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया और हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री को मामूली अंतर से हराया। चुनाव परिणाम को बनर्जी ने अदालत में चुनौती दी है।

 

राज्यपाल के अभिभाषण के साथ 2 जुलाई को शुरू होने वाला सदन का कामकाज 8 जुलाई तक चलेगा। 2021-22 का राज्य बजट 7 जुलाई को रखा जाएगा। राज्य का बजट अगले हफ्ते पेश करने के अलावा तृणमूल कांग्रेस सरकार आगामी सत्र में चर्चा के लिए विधान परिषद बनाने की सिफारिश की जांच के लिए तदर्थ समिति की रिपोर्ट भी पेश करेगी।

 

–आईएएनएस

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